500 पुलिसकर्मी, ड्रोन, 32 दिन की खोज… फिर भी नहीं मिला मासूम!
500 पुलिसकर्मी, ड्रोन, 32 दिन की खोज… फिर भी नहीं मिला मासूम! हारकर स्वजन पहुंचे ‘महादेव’ की अदालत, 11 लोगों ने ली शपथ
मुरार के मोहनपुर से लापता तीन वर्षीय रितेश पाल की तलाश में पुलिस 32 दिनों से जुटी है, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। 500 पुलिसकर्मियों और ड्रोन सर्चिंग के बावजूद जांच परिवार के संदेहों पर ही केंद्रित है। पुलिस की असफलता के बाद समाज ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों को गिरगांव स्थित मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत ले जाकर कसम खिलवाई।
MP में बच्चा गायब, परिवार पर शक, दोनों पक्षों ने शिवलिंग पर खाई निर्दोषता की कसम- 500 पुलिसकर्मियों की सर्चिंग के बाद भी सुराग नहीं
- 11 लोगों ने शिवलिंग पर रखकर कसम खाई
- 6 दिसंबर 2025 तक महादेव पर छोड़ा फैसला
ग्वालियर: मुरार के मोहनपुर से 32 दिन पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुआ तीन वर्षीय मासूम रितेश पाल को पुलिस ढूंढ नहीं सकी। 32 दिन से करीब 500 पुलिसकर्मी जंगल से लेकर हाइवे और गांव में परिचित, रिश्तेदारों के घर तक खंगाल चुके हैं। लेकिन असफलता ही हाथ लगी, पुलिस को स्वजनों पर शक है। फिर भी अब तक खाली हाथ है।
जब पुलिस बच्चे को ढूंढ नहीं सकी तो समाज के लोग आगे आए। रितेश के ननिहाल और दादा पक्ष के लोगों को महाराजपुरा के गिरगांव स्थित मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत में ले जाया गया। पहले पंचायत लगी, फिर 11 लोगों ने शिवलिंग पर हाथ रखकर कसम खाई। कहा, “रितेश को गायब करने में न हम शामिल हैं न कोई षड़यंत्र है।”

महादेव पर छोड़ दिया फैसला
अब फैसला महादेव पर छोड़ दिया गया है। 6 दिसंबर शाम 6 बजे तक का समय पंचायत ने दिया है। अगर इस समय किसी भी पक्ष का कोई नुकसान नहीं हुआ तो यह दोषमुक्त होंगे। अब सभी को महादेव के फैसले का इंतजार है।
यहां बता दें कि गिरगांव महादेव की अदालत पूरे अंचल में निष्पक्ष फैसले के लिए जानी जाती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर ही लिखा है- मजिस्ट्रेट महादेव। अब तक यहां पैसों के लेनदेन और जमीनों के विवाद से जुड़े मामले ही आते थे। पहली बार ऐसा अवसर है- जब किसी अपहरणकांड में मजिस्ट्रेट महादेव की अदालत लगी है।
यह है पूरा मामला
- एक नवंबर को तीन वर्षीय रितेश पाल पुत्र दलवीर पाल अपने ननिहाल से लापता हो गया था। वह घर के बाहर खेल रहा था। ननिहाल मुरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत मोहनपुर गांव में है। रितेश अपनी मां सपना के साथ ननिहाल में रहता है। जबकि बड़ा भाई पिता दलवीर के साथ उपनगर ग्वालियर में रहता है। सपना व दलवीर में झगड़ा रहता है। इसके कारण दोनों अलग रहते हैं।
- पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया और बालक की तलाश शुरू की। सपना व उसके मायके वाले पति और ससुराल पक्ष पर आरोप लगा रहे थे।जबकि पति दलवीर का कहना था- सपना ने अपने मायके वाले और परिचितों के साथ मिलकर बच्चे को गायब करा दिया है।
- खुद एसएसपी धर्मवीर सिंह, तीन एएसपी, चार सीएसपी, तीन टीआइ और करीब 500 पुलिसकर्मी अब तक तलाश में लग चुके हैं। ड्रोन से भी जंगल में सर्चिंग कराई गई, लेकिन बच्चे का सुराग नहीं लगा।
- पुलिस ने करीब 50 संदेहियों से पूछताछ कर ली, सुई आखिर में स्वजनों पर ही आकर रुक जाती है। पुलिस इन पर ही संदेह कर रही है, इसके चलते इनसे पूछताछ भी हुई। जब बच्चा नहीं मिला तो समाज के लोग आगे आए और मजिस्ट्रेट महादेव के सामने ले गए।

मंदिर में पंचों के सामने हुई चर्चा, फिर खाई कसम
सपना, उसका भाई राजू, भाभी ज्योति व दो अन्य लोग और दलवीर के साथ उसका भाई, पिता व अन्य स्वजन पहुंचे। दोनों पक्षों से 11 लोग पंचायत में शामिल हुए। यहां करीब दो घंटे तक चर्चा हुई। फिर महादेव के सामने ले जाया गया, यहां दोनों पक्षों ने कसम खाकर कहा- वह निर्दोष हैं।
5 दिन में आ जाएगा फैसला
पंचों ने कहा कि 6 दिसंबर शाम 6 बजे तक फैसला आ जाएगा। अगर इस दौरान किसी भी पक्ष के यहां चोरी, किसी की मृत्यु, पशु की मृत्यु या कोई हादसा होता है तो वह पक्ष दोषी माना जाएगा। अपराध स्वीकार करने पर सजा दी जाएगी।
करोड़ों के लेनदेन में फैसला हो चुका है
मजिस्ट्रेट महादेव के समक्ष करोड़ों रुपए और जमीनों के लेनदेन के विवाद में फैसला हो चुका है।
पुलिस की पहल नहीं, खुद गए स्वजन
पुलिस अपनी जांच कर रही है। तकनीकि साक्ष्यों का विश्लेषण चल रहा है। पुलिस द्वारा इन्हें किसी मंदिर में नहीं ले जाया गया। यह लोग खुद ही वहां गए हैं।
-एसएसपी धर्मवीर सिंह

