क्राइममध्य प्रदेश

पुलिस ने स्टूडेंट को अफीम तस्कर बनाया !!

12 लाख के लिए स्टूडेंट को अफीम तस्कर बनाया
परिजन बोले- पुलिस 6 घंटे पीटती रही; एसपी ने कहा- केस फर्जी नहीं, पर्याप्त सबूत है

पुलिस ने मेरे भाई को 6 घंटे तक एक अनजान कमरे में बंद रखकर जानवरों की तरह पीटा। वे चिल्ला रहे थे, ’12 लाख रुपए का इंतजाम कर, नहीं तो ऐसी धाराएं लगाएंगे कि पूरी जिंदगी जेल में सड़ जाएगा। बस में कैमरा न होता तो मेरा भाई आज सलाखों के पीछे होता। हम उसे आतंकवादी या तस्कर समझकर शायद भूल चुके होते।

ये कहते हुए राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले खरताराम की आवाज में दर्द और गुस्सा दोनों महसूस किया जा सकता है। दरअसल, खरताराम के भाई सोहनलाल को मंदसौर की मल्हारगढ़ थाने की पुलिस ने 2.7 किलो अफीम तस्करी के झूठे केस में फंसा दिया था। खरताराम का आरोप है कि उनसे पुलिस ने 12 लाख रुपए की डिमांड की थी जो पूरी नहीं हुई तो सोहनलाल को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।

परिवार ने इस मामले में हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की। साथ ही बस में लगे सीसीटीवी के फुटेज भी कोर्ट के सामने पेश किए। इसी आधार पर कोर्ट ने सोहनलाल की न केवल जमानत मंजूर की, बल्कि मंदसौर एसपी विनोद मीणा को जवाब देने के लिए बुलाया। एसपी ने आरोपी पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

 

पुलिस बोली- ऐसा केस बनाएंगे कि जमानत भी नहीं होगी

जब परिवार जेल में सोहन से मिला तो उसने जो आपबीती सुनाई, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। सोहन ने बताया, ‘सुबह करीब 11:30 बजे मुझे बस से उतारकर वे लोग एक प्राइवेट रूम में ले गए। वहां मुझे बेरहमी से पीटा गया। उन्होंने धमकी दी कि अगर मैं बचना चाहता हूं तो 12 लाख रुपए का इंतजाम करूं।

ऐसा नहीं हुआ तो वे मुझ पर NDPS एक्ट के तहत कमर्शियल मात्रा में अफीम रखने का केस बनाएंगे, जिसमें जमानत भी नहीं होगी। मैं एक छात्र हूं। मेरे पास इतने पैसे कहां से आते? जब मैंने बोला कि मैं पैसे नहीं दो सकता तो उन्होंने मुझे और पीटा और शाम 5 बजे मल्हारगढ़ थाने ले जाकर मुझ पर झूठा केस दर्ज कर दिया।

29 अगस्त को मल्हारगढ़ पुलिस ने सोहन को गिरफ्तार कर उसे कोर्ट के सामने पेश कर दिया था।
29 अगस्त को मल्हारगढ़ पुलिस ने सोहन को गिरफ्तार कर उसे कोर्ट के सामने पेश कर दिया था।

एक CCTV फुटेज बना केस का टर्निंग पॉइंट

सोहन से पूरी कहानी सुनने के बाद परिवार को यकीन हो गया कि उनका बेटा निर्दोष है और उसे फंसाया गया है। अब चुनौती थी, इसे साबित करने की। खरताराम ने हिम्मत नहीं हारी। सोहन ने उन्हें बताया था कि बस में एक व्यक्ति पहले से बैठा था जो स्कॉर्पियो वालों को इशारा कर रहा था। खरताराम मंदसौर बस स्टैंड पहुंचे और किसी तरह उस बस के ड्राइवर को ढूंढ निकाला।

ड्राइवर ने घटना की पुष्टि की और बताया कि स्कॉर्पियो बिना नंबर प्लेट की थी, तभी ड्राइवर ने एक ऐसी बात बताई, जो इस केस का टर्निंग पॉइंट बनी। उसने कहा, ‘जिस बस में यह घटना हुई, उसमें CCTV कैमरा लगा हुआ था।’ यह सुनकर खरताराम की जान में जान आई, लेकिन फुटेज हासिल करना आसान नहीं था। बस मालिक ने पुलिस का मामला होने के कारण फुटेज देने से साफ इनकार कर दिया।

खरताराम ने उसके हाथ-पैर जोड़े, अपने भाई के अपहरण की कहानी सुनाई और पैसों का भी लालच दिया। आखिरकार, 10 सितंबर को बस मालिक ने बिना पैसे लिए वह वीडियो फुटेज खरताराम को सौंप दिया।

एसपी बोले- ‘प्रक्रिया में कुछ खामी रही, केस फर्जी नहीं’ मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा के मुताबिक, हमने कोर्ट में स्वीकारा है कि FIR संबंधित प्रक्रिया में खामी रही, लेकिन यह भी बताया कि यह केस किसी भी तरह से फर्जी नहीं है। खामी बरतने के चलते ही संबंधितों को लाइन अटैच कर चुके हैं। जांच भी शुरू हो गई। फुटेज में सब स्पष्ट दिख रहा है कि आरोपी के जो बैग दिखे, उसमें से ही मादक पदार्थ जब्त हुआ है। यही विषय हमने कोर्ट में रखा और तस्करी के नेटवर्क के अन्य पर्याप्त सबूत भी हैं।

ये वो सीसीटीवी फुटेज है, जो सोहनलाल की रिहाई का आधार बना।
ये वो सीसीटीवी फुटेज है, जो सोहनलाल की रिहाई का आधार बना।

सिस्टम की बेरुखी और तीन महीने का लंबा इंतजार वीडियो हाथ में आते ही खरताराम को लगा कि अब न्याय मिल जाएगा। वह सबूत लेकर सबसे पहले अपने गृह जिले बालोतरा के एसपी के पास गए, लेकिन उन्होंने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला बताकर मदद करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 12 सितंबर को खरताराम ने मध्य प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी और आईजी को स्पीड पोस्ट के जरिए वीडियो के स्क्रीनशॉट के साथ एक विस्तृत शिकायत भेजी, लेकिन हफ्तों और फिर महीनों बीत गए, कहीं से कोई जवाब नहीं आया।

अदालत में ऐसे टूटा पुलिस के झूठ का चक्रव्यूह

जब हर दरवाजे बंद हो गए तो परिवार ने अदालत का रुख किया। इंदौर हाईकोर्ट के वकील हिमांशु ठाकुर ने इस केस को अपने हाथ में लिया। एडवोकेट ठाकुर बताते हैं, ‘पुलिस अपनी चार्जशीट कोर्ट में पेश कर चुकी थी, जो हमारे लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट था, क्योंकि अब वे अपनी कहानी से मुकर नहीं सकते थे।’ हमने जब चार्जशीट की डिटेल स्टडी की तो पुलिस का झूठ सामने आ गया।

  • पहला झूठ: पुलिस ने अपनी चार्जशीट में सोहन की गिरफ्तारी मल्हारगढ़ थाना क्षेत्र के बांडा खाल चौराहा श्मशान के पास से दिखाई थी।
  • काउंटर: एडवोकेट ठाकुर ने कोर्ट में बस का CCTV फुटेज पेश किया, जिसमें साफ दिख रहा था कि सोहन को पुलिसकर्मियों ने बताए गए स्थान से 35 किलोमीटर दूर चलती बस से दिनदहाड़े उठाया था।
  • दूसरा झूठ: जब अदालत में जांच अधिकारी से पूछा गया कि क्या वह स्कॉर्पियो में मौजूद युवकों को पहचानता है तो उसने पहचानने से इनकार कर दिया।
  • काउंटर: खरताराम ने थाने के बाहर से कुछ तस्वीरें खींची थीं, जिनमें वही स्कॉर्पियो और वही युवक पुलिस की वर्दी में दिख रहे थे। यह तस्वीरें भी कोर्ट में पेश की गईं।

इन पुख्ता सबूतों के सामने पुलिस का झूठ टिक नहीं सका। कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई और मंदसौर एसपी विनोद मीणा को तलब किया। एसपी मीणा ने अदालत में स्वीकार किया कि वीडियो में दिख रहे लोग मल्हारगढ़ थाने के ही पुलिसकर्मी हैं। इस मामले में TI समेत 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

जेल से छूटने के बाद सोहनलाल डिप्रेशन में

महज एक सप्ताह की सुनवाई के बाद 5 दिसंबर को कोर्ट ने सोहन को जमानत दे दी है। जबकि, फैसला सुरक्षित रख लिया है। खरताराम कहते हैं, ‘मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि उस लोकल बस में कैमरा लगा था। उसी एक वीडियो ने मेरे भाई की जिंदगी बचा ली, वरना वह जिंदगी भर जेल में सड़ता रहता।’ जेल से बाहर आने के बाद सोहन गहरे डिप्रेशन में है।

उसका प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना टूट चुका है। वह उस खौफनाक दिन को भूलकर मुख्य धारा में लौटने की कोशिश कर रहा है।

 

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