3 लाख में फर्जी हथियार लाइसेंस ,MP, यूपी और जम्मू–कश्मीर तक फैला नेटवर्क !!!
3 लाख में फर्जी हथियार लाइसेंस, MP, यूपी और जम्मू–कश्मीर तक फैला नेटवर्क, कहीं भी ले जाने की सुविधा, देश की सुरक्षा के लिए खतरा
MP News: भिंड जिले में 3 लाख रुपये में ऑल इंडिया वैधता वाले फर्जी हथियार लाइसेंस के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. यह नेटवर्क मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और जम्मू–कश्मीर तक फैला है. फर्जी क्यूआर कोड, सरकारी सील और हस्ताक्षरों के सहारे सैकड़ों हथियार खरीदे गए और इन्हें कहीं भी ले जाने की अनुमति दी गई. जिससे यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन गया.

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में फर्जी हथियार लाइसेंस के बड़े नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. करीब 3 लाख रुपये में ऑल इंडिया वैधता वाले फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर यहां सैकड़ों हथियार खरीदे जा रहे थे. यह नेटवर्क भिंड, ग्वालियर, उत्तर प्रदेश के इटावा–लखना और जम्मू–कश्मीर तक फैला है. फर्जी लाइसेंस पर क्यूआर कोड, कलेक्टर कार्यालय व एसपी कार्यालय की सील और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर तक हैं. लेकिन, जांच में कलेक्टरेट की आर्म्स शाखा और पुलिस रिकॉर्ड में ये लाइसेंस कहीं दर्ज नहीं मिले. इसके बाद पुलिस अधीक्षक असित यादव ने मामले की जांच शुरू कर दी है. कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने भी जांच के लिए एक समिति का गठन किया है. उन्होंने यह माना कि जांच के दौरान कई हथियार लाइसेंस फर्जी मिले हैं.
क्यूआर कोड भी निकला फर्जीहैरानी की बात यह है कि इन फर्जी लाइसेंसों पर भले ही क्यूआर कोड छपा हो, लेकिन स्कैन करने पर उससे किसी तरह की वैध जानकारी सामने नहीं आती. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन लाइसेंसों पर भिंड का नाम छपा है, वे न तो कलेक्टर कार्यालय और न ही एसपी कार्यालय के रिकॉर्ड में मौजूद हैं.

कहीं भी ले जा सकते हैं, 100 कारतूस मिलेंगे मध्यप्रदेश में असली लाइसेंस पर जहां एक बार में 10 और साल में अधिकतम 25 कारतूस की अनुमति होती है, वहीं फर्जी लाइसेंस पर 50 से 100 कारतूस तक की अनुमति दर्ज है. इतना ही नहीं, इन लाइसेंसों पर पूरे भारत में वैधता और 2028 तक की अवधि दर्शाई गई है, जिससे हथियार देश में कहीं भी ले जाए जा सकते हैं. यही वजह है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है.
हूबहू हस्ताक्षर और सरकारी सीलजांच में सामने आया कि कुछ लाइसेंसों पर अपर जिला दंडाधिकारी के हूबहू हस्ताक्षर और सील लगी हुई है. वर्तमान में पदस्थ एडीएम एल.के. पांडेय के नाम और हस्ताक्षर की नकल कर लाइसेंस तैयार किए गए हैं. एसडीएम ने साफ कहा कि ऐसे किसी लाइसेंस पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए.
जम्मू–कश्मीर होम डिपार्टमेंट की सील भी इस्तेमालफर्जी लाइसेंसों पर गवर्नमेंट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर, होम डिपार्टमेंट और अंडर सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट की सील तक लगी हुई है. कुछ मामलों में 2016–17 के दौरान जम्मू–कश्मीर में डीसी के नाम से लाइसेंस बनवाने की बात भी सामने आई है.
यूपी से चल रहा था खेल
जांच में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के लखना कस्बे में स्थित अटल सिंह कुशवाह आर्म्स एंड एम्युनिशन दुकान से यह नेटवर्क संचालित होता था. आरोप है कि आधार कार्ड में पता बदलवाकर भिंड का पता डाला जाता था और फिर आर्म्स लाइसेंस पोर्टल पर ऑनलाइन फर्जी लाइसेंस तैयार कर दिए जाते थे. महाराष्ट्र के रहने वाले हेमंत राजेंद्र देवरे और राहुल दौलत पाटिल के आधार कार्ड में भिंड का पता जोड़कर फर्जी लाइसेंस बनाए गए.
3 लाख में लाइसेंस बनवाने की गारंटी अब तक की जांच में सामने आया है कि ग्वालियर का एक डीलर 3 लाख रुपये लेकर आधार, पैन कार्ड और फोटो के आधार पर लाइसेंस बनवाने की गारंटी देता था. लाइसेंस बनने में करीब 6 महीने का समय बताया जाता था, लेकिन पूरी प्रक्रिया पहले से सेट रहती थी. सामने आया है कि दतिया में करीब 50 लाइसेंस, ग्वालियर और भिंड के लहार क्षेत्र में कई फर्जी लाइसेंस जारी किए गए हैं. इन सभी लाइसेंसों पर हथियार भी उपलब्ध कराए जाते थे.
भिंड व जम्मू के डीएम कार्यालय में फर्जी बताए गए लाइसेंस
- अजीत सिंह, कृष्णा नगर भिंड, 32 बोर पिस्टल शस्त्र नम्बर 320372,
- अशोक कुशवाह, मढैयापुरा लहार – 32 बोर पिस्टल शस्त्र नम्बर 2615 व 315 बोर बंदूक शस्त्र नम्बर 250137
- गौरव सिंह भदौरिया, गांधी नगर भिंड – 315 बोर बंदूक शस्त्र नम्बर 1701-00653 व 32 बोर पिस्टल शस्त्र नम्बर 87 एबी 2415
- हेमंत राजेंद्र देवरे, जमुना रोड भिंड – 32 बोर पिस्टल शस्त्र नम्बर आरपी-163809,
- राहुल दौलत पाटिल, महावीर गंज भिंड – 32 बोर पिस्टल शस्त्र नम्बर आरपी- 146624
- जावेद अनवर, वीरेंद्र नगर भिंड – 32 बोर पिस्टल शस्त्र नम्बर आरपी- 163809 व 315 बोर बंदूक शस्त्र नम्बर एबी 04-5558
- 70 शब्दों में सार, सर्चिंग अंग्रेजी हेडिंग, सर्चिंग यूआरएल, सर्चिंग कीवर्ड, और 70 शब्दों का सार हिंदी में
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Fake License Racket: भिंड में 3 लाख में फर्जी हथियार लाइसेंस का बड़ा खेल उजागर, सुरक्षा के लिए बढ़ा खतरा

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भिंड (Bhind) जिले में फर्जी हथियार लाइसेंस (Fake weapons Licenses) का एक बड़ा और बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है. आरोप है कि करीब 3 लाख रुपये में ऑल इंडिया वैधता वाले फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार कराए जा रहे थे, जिनके आधार पर सैकड़ों की संख्या में हथियार खरीदे गए. शुरुआती जांच में इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क भिंड, ग्वालियर, उत्तर प्रदेश के इटावा-लखना और जम्मू–कश्मीर तक फैला होने की बात सामने आई है.
चौंकाने वाली बात यह है कि फर्जी लाइसेंसों पर क्यूआर कोड, कलेक्टर कार्यालय और एसपी कार्यालय की सील, साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों जैसे हस्ताक्षर तक लगाए गए थे. लेकिन जब दस्तावेजों की पड़ताल हुई, तो ये लाइसेंस न तो कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा में दर्ज मिले और न ही पुलिस रिकॉर्ड में इनका कोई उल्लेख पाया गया. खुलासे में बताया गया कि दतिया में करीब 50 लाइसेंस, ग्वालियर और भिंड के लहार क्षेत्र में कई लाइसेंस पहले ही जारी किए जा चुके हैं. इन लाइसेंसों के आधार पर संबंधित लोगों को हथियार भी उपलब्ध कराए जाने की आशंका जताई गई है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है.

प्रशासन और पुलिस हरकत में, जांच शुरूमामला सामने आते ही पुलिस अधीक्षक असित यादव ने इसे गंभीर मानते हुए जांच शुरू कर दी है. वहीं कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने भी जांच समिति गठित कर दी है. कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सामने आए कई हथियार लाइसेंस फर्जी पाए गए हैं और पूरे प्रकरण की तकनीकी व दस्तावेजी जांच कराई जा रही है.
क्यूआर कोड भी निकला फर्जीफर्जी लाइसेंसों पर भले ही क्यूआर कोड छपा हो, लेकिन जांच में यह भी फर्जी निकला. अधिकारियों के अनुसार जब इन लाइसेंसों को स्कैन किया गया, तो किसी अधिकृत पोर्टल पर कोई वैध जानकारी सामने नहीं आई. प्रशासन ने साफ किया कि जिन लाइसेंसों पर भिंड का नाम अंकित है, वे न तो कलेक्टर कार्यालय के रिकॉर्ड में हैं और न ही एसपी कार्यालय में उनका कोई विवरण दर्ज है.
ऑल इंडिया परमिशन और ज्यादा कारतूस की अनुमतिमध्यप्रदेश में वैध हथियार लाइसेंस पर आमतौर पर एक बार में 10 कारतूस और साल भर में अधिकतम 25 कारतूस की सीमा रहती है. लेकिन इस फर्जी लाइसेंस गिरोह ने दस्तावेजों में 50 से 100 कारतूस तक की अनुमति लिख दी. इतना ही नहीं, फर्जी लाइसेंस पर पूरे भारत में वैधता (All India Permission) और 2028 तक लाइसेंस अवधि दर्शाई गई. यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं रहा, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है.
हूबहू हस्ताक्षर और सरकारी सील की नकलजांच में सामने आया कि कई फर्जी लाइसेंस पर अपर जिला दंडाधिकारी (ADM) के हूबहू हस्ताक्षर और सरकारी सील लगी है. बताया गया कि वर्तमान में पदस्थ एडीएम एलके पांडेय के नाम और हस्ताक्षर की नकल कर दस्तावेज तैयार किए गए. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ऐसे किसी लाइसेंस पर हस्ताक्षर नहीं किए.
जम्मू–कश्मीर होम डिपार्टमेंट की सील का भी इस्तेमालइस गिरोह की सबसे खतरनाक बात यह है कि दस्तावेजों में Government of Jammu and Kashmir, Home Department की सील और “Under Secretary to Government” जैसी मुहरों का उपयोग भी किया गया. कुछ मामलों में 2016-17 के दौरान जम्मू-कश्मीर में डीसी के नाम से लाइसेंस बनवाने की बातें भी सामने आई हैं, जिससे यह फर्जीवाड़ा बहुराज्यीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है.
दलाल, आर्म्स डीलर और फर्जी दस्तावेजों से चलता था सिस्टमजांच में सामने आया है कि फर्जी लाइसेंस बनवाने के लिए एक पूरा सिस्टम काम कर रहा था. आरोप है कि उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के लखना कस्बे में स्थित “अटल सिंह कुशवाह आर्म्स एंड एम्युनिशन” नामक दुकान के जरिए यह नेटवर्क ऑपरेट किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि पहले आधार कार्ड में पता बदलवाकर भिंड का पता जोड़ दिया जाता था, फिर आर्म्स लाइसेंस पोर्टल पर ऑनलाइन प्रक्रिया दिखाकर फर्जी लाइसेंस तैयार किए जाते थे. जांच में यह भी सामने आया कि महाराष्ट्र के रहने वाले हेमंत राजेंद्र देवरे और राहुल दौलत पाटिल के आधार में भी भिंड का पता जोड़कर फर्जी लाइसेंस बनाए गए.
सूत्रों के मुताबिक ग्वालियर का एक डीलर करीब 3 लाख रुपये लेकर आधार, पैन कार्ड और फोटो के आधार पर हथियार लाइसेंस बनवाने की “गारंटी” देता था. लाइसेंस बनने में करीब 6 महीने का समय बताया जाता था, लेकिन दावा है कि पूरी प्रक्रिया पहले से सेट रहती थी और आवेदक को बाद में फर्जी लाइसेंस का प्रिंट दे दिया जाता था.
फर्जी बताए गए लाइसेंस धारकों के नाम भी सामने आएजांच में जिन लोगों के लाइसेंस भिंड और जम्मू के डीएम कार्यालय रिकॉर्ड में फर्जी बताए गए, उनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—
- अजीत सिंह (कृष्णा नगर, भिंड)
- अशोक कुशवाहा (मढैया पुरा, लहार)
- गौरव सिंह भदौरिया (गांधी नगर, भिंड)
- हेमंत राजेंद्र देवरे (जमुना रोड, भिंड)
- राहुल दौलत पाटिल (महावीर गंज, भिंड)
- जावेद अनवर (वीरेंद्र नगर, भिंड)
- मो. राशिद (महावीर नगर, भिंड)
(इनसे जुड़े हथियारों के विवरण को लेकर भी जांच चल रही है.)
जांच जारी, प्रशासन में हड़कंपमामला उजागर होते ही प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा है कि क्यूआर कोड, सील और हस्ताक्षरों की तकनीकी जांच कराई जा रही है. साथ ही दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह प्रकरण केवल एक दस्तावेजी घोटाला नहीं, बल्कि सरकारी सिस्टम में सेंध और देश की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला मामला बन चुका है.

