बड़ी ख़बरमध्य प्रदेश

इंदौर नगर निगम पिलाता रहा ‘जहर’…2.40 करोड़ का टेंडर, 100 दिन लटकाए रखा!!!

2.40 करोड़ का टेंडर, 100 दिन लटकाए रखा, नहीं बदल पाई पाइपलाइन… इंदौर नगर निगम पिलाता रहा ‘जहर’

इंदौर में दूषित पानी की सप्लाई को लेकर नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है. आरोप है कि 2.40 करोड़ के टेंडर की फाइल को अधिकारियों ने 100 दिन दबाए रखा, जिससे समय पर पाइपलाइन बदल नहीं पाई.

2.40 करोड़ का टेंडर, 100 दिन लटकाए रखा, नहीं बदल पाई पाइपलाइन... इंदौर नगर निगम पिलाता रहा 'जहर'

इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 की मौत.
Updated on: Jan 02, 2026 7:33 PM IST
Share

इंदौर के भागीरथपुरा मोहल्ले में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों के मामले में नगर निगम अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है. जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जिस नर्मदा पाइपलाइन में ड्रेनेज का पानी मिल रहा था, उसे महीनों पहले ही बदला जाना था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की. इस लापरवाही का खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान और सेहत से चुकाना पड़ा.

जानकारी के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके की नर्मदा पाइपलाइन बदलने के लिए 8 अगस्त को टेंडर जारी किया गया था. टेंडर खरीदने की अंतिम तिथि 15 सितंबर शाम 6 बजे तक तय की गई थी, जबकि टेंडर 17 सितंबर को दोपहर 12 बजे खोला जाना था. इस दौरान सात कंपनियों ने 2.40 करोड़ रुपए के इस टेंडर में हिस्सा लिया था. सभी कंपनियों ने तय समय सीमा के भीतर टेंडर भर दिए थे, जिनमें से एक कंपनी का टेंडर तकनीकी कारणों से रिजेक्ट किया गया.

आयुक्त और अपर आयुक्त पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि तय तारीख पर टेंडर खोलने के बजाय इसे 100 से ज्यादा दिन तक दबाकर रखा गया. अंततः 29 दिसंबर को शाम साढ़े चार बजे टेंडर खोला गया. इस देरी के पीछे नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है. आरोप है कि निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने समय पर टेंडर खोलने में कोई रुचि नहीं दिखाई.

…तो बच जाती भागीरथपुरा के लोगों की जान

यदि टेंडर प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी कर ली जाती तो अब तक भागीरथपुरा इलाके की पाइपलाइन बदली जा चुकी होती. ऐसे में नर्मदा जल में ड्रेनेज का पानी मिलने की समस्या शायद समय रहते खत्म हो जाती और कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की उदासीनता और टालमटोल के कारण ही यह गंभीर स्थिति बनी.

मामले के उजागर होने के बाद नगर निगम ने केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, जबकि असली निर्णय लेने वाले अधिकारी अब भी सवालों के घेरे में हैं. यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि समय पर लिए गए फैसले किस तरह बड़े हादसों को टाल सकते हैं.

6 महीने पहले मेयर ने पाइपलाइन बदलने को कहा थाएक दिन पहले दूषित पानी पीने से लोगों की मौत के मामले पर TV9 डिजिटल ने बड़ा खुलासा किया था. भागीरथपुर मोहल्ले बीते 6 महीने से लोग दूषित पानी पी रहे थे. लोगों ने नगर निगम के साथ-साथ CM हेल्पलाइन पर इसकी शिकायत की थी. 6 महीने पहले ही इंदौर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने पाइपलाइन बदलने के लिए टेंडर जारी करने को कहा था, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ऐसी थी कि वो टेंडर आज तक स्वीकृत नहीं हुए. मेयर ने निगम कमिश्नर को जांच के आदेश दिए हैं कि आखिर टेंडर 6 महीने से क्यों नहीं दिए गए?

वहीं दूषित पानी सप्लाई करने को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ा एक्शन लिया है. अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश भी दिए. सीएम ने मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल मामले में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की.

इंदौर नगर निगम को मिले 3 नए अपर आयुक्त

सीएम मोहन यादव ने अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा की. इसके साथ ही नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए. यही नहीं सीएम मोहन यादव की सख्ती के बाद शासन एक्टिव हुआ है. सामान्य प्रशासन विभाग ने आकाश सिंह, प्रखर सिंह और आशीष कुमार पाठक को बड़ी जिम्मेदारी दी है. तीनों को इंदौर नगर निगम का नया अपर आयुक्त बनाया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *