इंदौर में 23वीं मौत, ICU में भी मरीज बढ़कर 13 हुए !!!
भगवानदास को उल्टी-दस्त से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की गंभीर कमी हो गई थी, जिससे ब्लड प्रेशर अस्थिर हुआ। मरीज पहले से डायबिटीज और हृदय रोग से ग्रसित थे, इसलिए संक्रमण और डिहाइड्रेशन का असर ज्यादा पड़ा। ऑक्सीजन की कमी के कारण दिमाग पर भी असर पड़ा। भगवानदास गुजराती साइंस कॉलेज से लैब असिस्टेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। परिवार में पत्नी और चार बच्चे हैं। एक बेटा इंदौर में है, दूसरा बेटा नागपुर में रहता है।
हॉस्पिटल के जनरल मैनेजर राहुल पाराशर ने बताया कि जब उन्हें यहां लाया गया तो उस दौरान कार्डियक अरेस्ट आया था। इस पर सीपीआर देकर उन्हें फिर वेंटिलेटर पर लिया गया था। उन्हें गैंग्रीन सहित मल्टी ऑर्गन्स फेल्यूअर जैसी तकलीफ थी।
इससे पहले एक मृतक की पहचान कमला बाई, पति तुलसीराम (59) के रूप में हुई। उसे 5-6 जनवरी से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। हालत बिगड़ने पर 7 जनवरी को उसे एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 9 जनवरी को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मृतक का पति मजदूरी करता है। दोनों लगभग 20 दिन पहले ही जीवन की फेल से भागीरथपुरा में आकर रहने लगे थे। इस दौरान दूषित पानी पीने से कमला बाई की तबीयत बिगड़ गई।
मौत के बाद परिजन ने भागीरथपुरा में नगर निगम की टीम और संबंधित केंद्र को इसकी जानकारी दी, लेकिन आधार कार्ड जीवन की फेल का होने के कारण इस मामले को दूषित पानी से हुई मौत के रूप में दर्ज नहीं किया गया।
1 साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी
एमवाय अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव का कहना है कि कमला बाई भागीरथपुरा के मरीजों की यूनिट में भर्ती नहीं थी। वह पंचम की फेल की निवासी थी और पिछले एक साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित थी। मामला एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) का नहीं होने के कारण उनका पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया।
आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 13 हुई
दूसरी तरफ, भागीरथपुरा में अभी भी लोगों में दूषित पानी का डर बना हुआ है। लोग आरओ, बोरिंग और बोतल के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। पानी को छानकर और उबालकर इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस बीच, आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या कम ज्यादा हो रही है। 8 जनवरी को जहां आईसीयू में 10 मरीज थे। 10 जनवरी को ये आंकड़ा 11 तक पहुंच गया। वहीं, 11 जनवरी को आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या 13 हो गई। जबकि पिछले कई दिनों से 3 मरीज वेंटिलेटर पर बताए जा रहे हैं।
29 दिसंबर को जब कई लोग अस्पताल में भर्ती हुए तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ अस्पतालों में पहुंचे और मरीजों व उनके परिजनों से बातचीत की। देखते ही देखते दूषित पानी के कारण मौतों का सिलसिला शुरू हो गया।
एक के बाद एक कई लोगों की जान दूषित पानी के कारण चली गई। स्थिति ये है कि कई लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। कुछ लोग आईसीयू में इलाजरत है।

स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को बुलेटिन जारी किया। इसके मुताबिक 50 दलों ने भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे किया। 176 सदस्यों ने 924 घरों में ORS और जिंक की गोलियां दी। इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी जांचे भी की गई। इलाके में आज OPD में 13 मरीज डायरिया के आए, जिसमें से 1 को रेफर किया है।
| कुल भर्ती मरीज | 427 |
| डिस्चार्ज हुए | 385 |
| अभी इतने भर्ती | 42 |
| ICU में मरीज | 13 |
| एंबुलेंस की संख्या | 3 |
निगम आयुक्त ने किया इलाके का दौरा
रविवार को भी नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने भागीरथपुरा इलाके का दौरा किया। यहां पर चल रहे कामों को देखा। इलाके में टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई की भी समीक्षा की।
लगातार टीम के माध्यम से लोगों को पानी उबालकर, छानकर पीने के संबंध में अनाउंसमेंट करने, ड्रेनेज सीवरेज लाइन की सफाई करने, सफाई के बाद निकलने वाली गाद को तुरंत हटाने, मलेरिया टीम द्वारा नाला सफाई करने के लिए भी कहा है।
इसके अलावा निगमायुक्त ने भागीरथपुरा के सभी बीट प्रभारी, उपयंत्री को अपनी-अपनी बीट में आने वाले सरकारी बोरिंग में क्लोरिनेशन काम करने के लिए कहा है।

