मध्य प्रदेश

धर्मक्षेत्र में कुरुक्षेत्र…?

धर्मक्षेत्र में कुरुक्षेत्र…:उज्जैन में लैंड पूलिंग के बाद अब ममलेश्वर लोक का प्रस्ताव भी निरस्त
खंडवा/ओंकारेश्वर

मात्र 48 घंटे के भीतर मध्य प्रदेश में धार्मिक नगरों को प्रभावित करने वाली दो बड़ी योजनाएं सरकार ने वापस ले ली हैं। सोमवार को उज्जैन में लैंड पूलिंग को लेकर किसानों और संत समुदाय के भारी विरोध के बाद सरकार ने पूरा एक्ट वापस लेने की घोषणा कर दी थी। अगले ही दिन मंगलवार दोपहर को ओंकारेश्वर में प्रस्तावित ममलेश्वर लोक को भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।

ममलेश्वर लोक के विरोध में ओंकारेश्वर में 33 घंटे से संत समाज और स्थानीय लोगों का ऐच्छिक बंद चल रहा था। सोमवार से मंगलवार दोपहर तक ओंकारेश्वर पूरी तरह बंद रहा। नगर पालिका क्षेत्र में न दुकानें खुलीं, न होटल-रेस्टोरेंट, न ऑटो चले।

नावों का संचालन भी ठप रहा। हमेशा गुलजार रहने वाले बाजार में ताले लटके रहे। मंगलवार दोपहर को अपर कलेक्टर केआर बडौले ने प्रस्ताव वापस लेने का लिखित आदेश दिया तो शाम 5 बजे से दुकानें, भोजनालय, गेस्ट हाउस खुलने लगे। बुधवार से रौनक लौटेगी।

महाकाल लोक जैसा भव्य कॉरिडोर बनना

था… सिंहस्थ तक पूरा करना था

  • 2022 में महाकाल कॉरिडोर बनने के बाद ओंकारेश्वर के विकास को लेकर भी नई चर्चा शुरू हुई। ज्योतिर्लिंग के आसपास सीमित जगह होने के चलते 2023 में ममलेश्वर लोक का प्रस्ताव सामने आया। लक्ष्य था, ओंकारेश्वर-ममलेश्वर द्वीप क्षेत्र के बीच भव्य कॉरिडोर और सांस्कृतिक परिसर बनाना।
  • 21 फरवरी 2025 को सिंहस्थ-2028 समिति की बैठक में प्रोजेक्ट को दो चरणों में पूरा करने का प्लान पेश किया गया। पर्यटन विभाग ने 4.6 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए डीपीआर बनाई, खर्च अनुमान- 120 करोड़ रु.।
  • दिसंबर 2027 तक पूरा प्रोजेक्ट तैयार कर देना, ताकि सिंहस्थ के दौरान इसका लाभ उठाया जा सके।
  • यदि लोक बनता तो ममलेश्वर लोक के शिखर दर्शन दीर्घा ‎में ओंकारेश्वर से जुड़ी कहानियां‎ दिखती। यह भव्य परिसर होता।

विरोध क्यों?

घर-दुकान टूट रहे थे, लोगों को लगा भव्यता के बदले बेघर होना पड़ेगा

  • ब्राह्मपुरी और आसपास के क्षेत्रों में प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए सैकड़ों घर, दुकानें, छोटे गेस्ट हाउस, आश्रम, धर्मशालाएं और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े कई स्थायी ढांचे हटाने की जरूरत पड़ती। लोगों का आरोप था कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई, जबकि स्थानीयों की सहमति और संत समाज की राय लेनी चाहिए थी। कई परिवार पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं और उनकी आजीविका पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों पर निर्भर है। संतों ने इसे आस्था पर चोट बताया।
  • स्थानीय संतों का कहना है कि हम किसी भी अच्छे काम के खिलाफ नहीं, लेकिन आस्था, परंपरा और आजीविका से समझौता नहीं हो सकता। हमारी सदियों पुरानी बस्तियों को हटाकर भव्य लोक नहीं चाहिए।

आगे क्या?

अभी के लिए प्रस्ताव रद्द, पर सहमति से नया डिजाइन बन सकता है…

फिलहाल ममलेश्वर लोक का प्रस्ताव रद्द कर दिया गया है, लेकिन प्रशासन यह संकेत दे रहा है कि भविष्य में स्थानीयों की सहमति से नया डिजाइन तैयार हो सकता है। धार्मिक निर्माण पर विशेषज्ञों और संतों का पैनल बनेगा। अपर कलेक्टर का कहना है कि विकास और परंपरा के बीच संतुलन बनाने का मॉडल खोजा जाएगा।

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