अफसरों को बता दिया फुल टाइम टीचर, 623 करोड़ की ग्रांट भी झूठी ?

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि (आरजीपीवी) को नैक से मिले ए++ ग्रेड पर तो सवाल उठ ही रहे हैं, अब इसकी सेल्फ स्टडी रिपोर्ट (एसएसआर) पर भी विवाद खड़ा हो गया है। नैक असेसमेंट के लिए भेजी गई इस रिपोर्ट में कई ऐसे दावे किए गए हैं जो हकीकत से मेल नहीं खाते।
एसएसआर के अनुसार, विवि ने पिछले पांच सालों में डिप्टी रजिस्ट्रार, रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक जैसे प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों को भी फुलटाइम शिक्षक के रूप में दिखा दिया। ऐसा पीएचडी, डीएससी और डीलिट उपाधि वाले फुलटाइम शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह नैक मानकों का सीधा उल्लंघन है। एसएसआर में दावा किया गया है कि 2018-19 से 2022-23 तक विवि को राज्य सरकार से 623 करोड़ का अनुदान सैलरी, पेंशन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए मिला। जबकि, हकीकत यह है कि राज्य सरकार आरजीपीवी को सैलरी-पेंशन मद में कोई अनुदान नहीं देती। इस बात की पुष्टि रजिस्ट्रार डॉ. मोहन सेन खुद कर रहे हैं।
एबीवीपी ने की एफआईआर की मांग उधर, इस मामले में एबीवीपी ने मंगलवार को तकनीकी शिक्षा से मुलाकात की और कुलपति सहित दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने तथा विवि में धारा-54 लागू करने की मांग उठाई।
ये भी गजब… प्लेसमेंट से लेकर फेकल्टी तक की गलत जानकारी
एसएसआर अप्रूवल के बिना भेजी वर्ष 2012-13 के बाद से राज्य सरकार की ओर से विवि को कोई अनुदान प्राप्त नहीं हुआ है। एसएसआर में दी गई यह जानकारी पूरी तरह असत्य और भ्रामक है। मेरे रहते कुलसचिव कार्यालय व वित्त नियंत्रक द्वारा एसएसआर में दी गई जानकारी को अप्रूव नहीं किया गया है। मुझे जानकारी दिए बिना ही एसएसआर नैक को भेजी गई। -डॉ. मोहन सेन, रजिस्ट्रार आरजीपीवी
एसएसआर के ये दावे भी संदिग्ध
एसएसआर में कहा गया है कि विवि के पास विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है। लेकिन छात्र कहते हैं कि स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बंद पड़ा है और स्पर्धाएं अन्य कॉलेजों के मैदानों में होती हैं।
- रिपोर्ट में 6 कॉन्स्टीट्यूट कॉलेज बताए हैं, जबकि वास्तविकता में इनकी संख्या 4 ही हैं। इनमें यूआईटी भोपाल, यूआईटी शिवपुरी, यूआईटी झाबुआ और यूआईटी शहडोल हैं। नैक असेसमेंट में केवल यूआईटी भोपाल के विभागों और यूटीडी (7 स्कूल्स) को शामिल किया। तीनों क्षेत्रीय यूआईटी को बाहर रखा।
- प्लेसमेंट से संबंधित जो दस्तावेज अपलोड किए गए हैं, उनमें कई जगह आंकड़े पढ़ना संभव ही नहीं है।
- रिपोर्ट में एक सक्रिय छात्र परिषद होने की बात कही गई है। जबकि दस्तावेजों में जो विवरण दिए गए हैं, उनमें कहीं वास्तविक छात्र परिषद दिखाई नहीं देती।
- बताया है विवि से 323 संबद्ध कॉलेज हैं और इनमें से 300 नैक से मान्यता प्राप्त है। जबकि नैक पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के अनुसार आरजीपी के सिर्फ 25 कॉलेजों को ही नैक मान्यता हैं।
प्रमुख सचिव को तथ्यों के वेरिफिकेशन के निर्देश दिए, गलत मिले तो कार्रवाई
एसएसआर में दी गई जानकारी का विवि के रिकॉर्ड से वेरिफिकेशन कराएंगे। पीएस को निर्देश दे दिए हैं। वे पूरा सिस्टम बनाएंगे। जानकारी और तथ्य गलत पाए जाते हैं तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -इंदर सिंह परमार, मंत्री, तकनीकी शिक्षा

