मध्य प्रदेश

सिंघार बोले- ₹204 करोड़ में अडाणी को सौंपा जंगल….सिंगरौली में ₹11 लाख करोड़ का है कोयला !!!

सिंघार बोले- ₹204 करोड़ में अडाणी को सौंपा जंगल:सिंगरौली में ₹11 लाख करोड़ का है कोयला; MP कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में की प्रेस कॉन्फ्रेंस
  • दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में एमपी कांग्रेस के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए। - Dainik Bhaskar
दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में एमपी कांग्रेस के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए।

सिंगरौली के धिरौली में कोल ब्लॉक के लिए काटे जा रहे पेड़ों को लेकर एमपी कांग्रेस के 10 नेताओं ने दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि धिरौली में कोयला खदान भी अडाणी की है। उसका संचालन और उत्पादन भी अडाणी का है।

कास्ट बेनिफिट एनालिसिस करें तो जमीन-जंगल देने के बदले कंपनी को 204 करोड़ मुआवजे के तौर पर सरकार ने दिया है। नेट जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार 558 मिलियन टन यानी 11 लाख करोड़ से ज्यादा की कीमत का कोयला सिर्फ 204 करोड़ रुपए के बदले दे दिया।

सिंघार ने कहा- अगर दो हजार रुपए टन का भाव ले लो और 558 मिलियन टन का हिसाब लगाओ तो 11 लाख करोड़ होता है। वैसे तो कोयले का भाव चार से पांच हजार रुपए मीट्रिक टन का है। क्या ये राष्ट्र और प्रदेश की आर्थिक नुकसान नहीं है?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, सीईसी मेंबर ओंकार सिंह मरकाम, सीडब्ल्यूसी मेंबर कमलेश्वर पटेल, बाला बच्चन, हिना कावरे, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, प्रदेश के सह प्रभारी रणविजय सिंह लोचब मौजूद रहें।

दिल्ली में मध्यप्रदेश कांग्रेस के 10 नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
दिल्ली में मध्यप्रदेश कांग्रेस के 10 नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

सिंघार बोले- कांग्रेस आदिवासियों की आवाज उठा रही

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी लगातार आदिवासियों की आवाज बुलंद कर रही है। जो देश में कई सालों से रह रहे हैं उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।

मोदी जी दिल्ली में पेड़ लगाते हैं। कहते हैं एक पेड़ मां के नाम और हजारों पेड़ काटने के लिए अडाणी के नाम कर देते हैं ।इससे पहले छत्तीसगढ़ में हसदेव के जंगल में सबने देखा। वही स्थिति सिंगरौली में अडाणी के लिए की जा रही है। पहले अडाणी ग्रुप को सुलियारी ब्लॉक मिला, जो उससे लगा हुआ है। दूसरा धिरौली ब्लॉक मिला।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा- खास बात ये है कि सुलियारी ब्लॉक में 90 प्रतिशत एरिया वन क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, वहां अंडरग्राउंड माइनिंग की परमिशन दी गई। दूसरी तरफ धिरौली में ओपन कास्ट माइनिंग की परमिशन दी गई है।

एक तरफ आप अंडरग्राउंड माइनिंग करके जंगल बचा रहे हैं। दूसरी तरफ खुले में खनन कर रहे। इसे भी दो टुकड़ों में बांट दिया। आने वाले 80 सालों में से 40 साल अंडरग्राउंड माइनिंग और 40 साल ओपनकास्ट माइनिंग होगी। तो क्या सरकार आदिवासियों और वहां जंगल पर आश्रित लोगों को बाहर करके उनके हितों का संरक्षण नहीं करना चाहती।

2672 हेक्टेयर में है खदान का क्षेत्र

सिंघार ने कहा- 3 मार्च 2021 को केंद्र सरकार ने इसकी मंजूरी दी। आनन-फानन में कलेक्टर और पूरा प्रशासन अडाणी की चरण वंदना करने पहुंच गए। इसमें 544 हेक्टेयर निजी भूमि थी। सरकारी भूमि 680 हेक्टेयर और लगभग 1400 हेक्टेयर वन भूमि थी। कुल खदान क्षेत्र 2672 हेक्टेयर है।

लगभग 6 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं। चरणबद्ध तरीके से पेड़ काटकर पेड़ लगाने की बात अड़ाणी समूह ने दूसरे जिलों में पेड़ लगाने की बात कही है। दिल्ली के बाद सिंगरौली देश में दूसरा प्रदूषित शहर है। उसी सिंगरौली में लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं। उन्हें सिंगरौली की आवोहवा ठीक नहीं करना है।

उन्हें तो उज्जैन की आबोहवा ठीक करना है जहां मुख्यमंत्री रहते हैं। सिंगरौली में पेड़ काटकर शिवपुरी गुना में पेड़ लगाने की बात हो रही है। जहां के पेड़ काटे जा रहे क्या वहीं पेड़ नहीं लगने चाहिए?

हम जब दौरे पर गए तो वहां स्कूल लग रहे थे। बच्चों ने कहा कि जब हम खाना खाते हैं तो कोयले के कण खाने में आ जाते हैं। कपडे़ काले हो रहे हैं। कई एक्सीडेंट हो रहे हैं। अगर पास के गांव में बारात लेकर जाना है तो एक-एक दिन लग जाता है। मेडिकल इमरजेंसी हो तो वो अस्पताल नहीं पहुंच सकता क्योंकि रास्ते में अडाणी के ट्रक खडे़ हैं।

कमलेश्वर बोले- एक पेड़ मां और पूरा जंगल अडाणी के नाम

कमलेश्वर पटेल ने कहा कि यहां मध्य प्रदेश के सिंगरौली से लोग आए हैं। धिरौली कोल ब्लॉक के लिए लाखों पेड़ मनमाने तरीके से काटे जा रहे हैं। दो हजार पुलिस बल तैनात करके पेड़ों की कटाई हो रही है। वर्षों से वहां जमीन पर काबिज लोगों को बिना राहत पुनर्वास, मुआवजा दिए बेदखल किया जा रहा है। ये सब छिप कर बड़ी मुश्किल से यहां दिल्ली तक आए हैं।

पटेल ने कहा- इस मामले को एआईसीसी की तरफ से एमपी के 12 नेताओं को शामिल कर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई थी। हम लोग जब वहां गए तो स्थानीय लोगों को अंदर बाहर जाने में भारी दिक्कत है।

हम जनप्रतिनिधि जब वहां गए और कहा कि हम 12 लोगों को जंगल के अंदर जाने दीजिए। पुलिस ने हमें रोक दिया। स्थानीय भाई बहनों ने जंगल की रक्षा के लिए आंदोलन किए तो उनके ऊपर केस दर्ज कर दिए।

अपने ही राज्य में जनप्रतिनिधियों को जाने से पुलिस ने रोका

कमलेश्वर ने कहा कि एक अडाणी के लिए 2672 हेक्टेयर जमीन का आवंटन किया है। अगर हमारे आदिवासी भाई 5-10 डेसीमिल जमीन पर काबिज हो जाएं तो उन्हें जबरन जेल में डाल देते हैं।

भारत में दो तरह का संविधान काम कर रहा है। अडाणी के लिए अलग कानून है और आम लोगों के लिए अलग है। हमारे भारतीय संविधान में अनुच्छेद एक डी के तहत यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी राज्य में आ जा सकता है। लेकिन, हम जैसे चुने हुए जनप्रतिनिधियों को वहां बड़ी मुश्किल से अंदर प्रवेश मिला।

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