मध्य प्रदेश

सिया चेयरमैन बोले:237 अवैध अनुमतियां निरस्त करने पहले ही शासन को लिख चुका

सिया चेयरमैन बोले:237 अवैध अनुमतियां निरस्त करने पहले ही शासन को लिख चुका

मस्तीपुरा में कोपरा और मुरम खदानों की पर्यावरणीय मंजूरी में धांधली का मामला उजागर होने के बाद इस मामले में कार्रवाई कौन करेगा इसको लेकर राज्य शासन में असमंजस की स्थिति बन गई है।

मप्र स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) के चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान का कहना है कि उन्होंने शासन से जून महीने में ही अनुरोध किया था कि मस्तीपुरा समेत सभी 237 अवैध ईसी को निरस्त किया जाए। दोषियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाए। जिस स्तर से इन अवैध ईसी के आदेश हुए, उसी स्तर से निरस्त करने का निर्णय लें।

विशेषज्ञ बोले– तीन पदों पर एक ही व्यक्ति, इसी कारण उल्लंघन हुआ

वहीं दूसरी ओर पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सिया, सिएक और मप्र प्रदूषण बोर्ड तीन अलग-अलग वैधानिक संस्थाओं की शक्तियों का समावेश प्रमुख सचिव पर्यावरण के पद पर बैठे एक ही व्यक्ति में हो जाने के कारण पर्यावरण संरक्षण कानून का न केवल उल्लंघन हुआ है, बल्कि कनफ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट भी है।

मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में अध्यक्ष का पद खाली होने से अध्यक्ष का प्रभार पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी के पास था। प्रमुख सचिव ही एप्को की महानिदेशक (डीजी) होते हैं, जिनके अधीन ही कार्यकारी निदेशक (ईडी) रहते हैं। एप्को के ईडी की सिया के मेंबर सेक्रेटरी होते हैं। जबकि, सिएक के मेंबर सेक्रेटरी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव होते हैं।

सभी विवादित 237 ईसी तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी के अनुमोदन पर तत्कालीन एप्को के ईडी श्रीमन शुक्ला ने जारी की थीं। ईसी जारी होने के बाद कंसेट टू एस्टेब्लिशमेंट (सीटीई) और कंसेंट टू आपरेट (सीटीओ) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी किया जाता है, जिसके प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष खुद पदेन प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी थे।

एडवोकेट खरे का कहना है कि ऐसी में स्थिति में पर्यावरण की सुरक्षा करने वाली तीन अलग-अलग संस्थाओं की निष्पक्षता और स्वतंत्रता खत्म हो जाती है, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और ईआईए नोटिफिकेशन के उद्देश्यों को ही खत्म कर देती है।

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पर्यावरण विभाग पर भारी अफसरशाही, सिया अध्यक्ष-प्रमुख सचिव के बीच चरम पर टकराव, FIR की सिफारिश
SIA President Shiv Narayan Chauhan

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक ओर जहां प्रशासनिक व्यवस्था में भष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे है वहीं दूसरी ओर उन्हीं के मताहत अफसर इस पर पलीता लगाकर सरकार की किरकिरी कराने  का कोई मौका नहीं छोड़ रहे है। ऐसी ही मामला राजधानी भोपाल में स्टेट एनवायरमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी (सिया) के दफ्तर से जुड़ा है जहां पर सिया अध्यक्ष शिवनारायण चौहान और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी व सिया के सदस्य सचिव और एप्को डायरेक्टर उमा आर माहेश्वरी के बीच आपसी खींचतान से जुडा है।

450 मामलों में पर्यावरणीय अनुमति से जुड़ा विवाद अब इतना आगे बढ़ गया है कि सिया अध्यक्ष शिवनारायण चौहाहन ने पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और एप्को डायरेक्टर उमा आर माहेश्वरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए मुख्य सचिव अनुराग जैन पत्र लिख दिया है।

खनिज के 200 मामलों समेत 450 केस में पर्यावरणीय मंजूरी के मामले में सिया के अध्यक्ष शिव नारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को लिखे पत्र में कहा है कि प्रमुख सचिव और एप्को डायरेक्टर ने 700 से अधिक लंबित प्रकरणों में से 237 पर्यावरणीय मंजूरियां गैर कानूनी तरीके से पिक एंड चूज पैटर्न पर जारी कर दी। जबकि सिंहस्थ से जुड़े कई अहम प्रोजेक्ट को लटकाकर रखा है।
सिया अध्यक्ष का दफ्तर सील करने पर बढ़ा विवाद- पिछले 3 माह से पर्यावरण विभाग में जारी विवाद सोमवार को उस वक्त बढ़ गया जब राजधानी भोपाल में पर्यावरण परिसर स्थित स्टेट एन्वायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी क दफ्तर को सील कर दिया गया। सिया अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान जब दफ्तर पहुंचे तो उन्हें दफ्तर पर ताला लटका मिला जब उन्होंने कर्मचारियों से दफ्तर खोलने को कहा तो उन्होंने मन कर दिया। सिया अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने इसका आरोप पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी पर लगाया। उन्होंने कहा कि मैंने पर्यावरणीय अनुमतियां जारी करने में भ्रष्टाचार को उजागर किया, इसलिए प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी ने मेरा चैंबर सील करा दिया। वहीं प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी ने अपनी सफाई देते  हुए कहा कि ऑफिस में बिजली संबंधी फॉल्ट था, कोई बड़ी दुर्घटना न हो इसलिए बंद कराया।
क्या है पूरा विवाद?– खनिज,उद्योग और बड़े निर्माण प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय मंजूरी जारी करने से जुड़े स्टेट एनवायरमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी (सिया) का पूरा विवाद मई में उस वक्त सामने आया जब प्रमुख सचिव के अनुमोदन से 450 मामलों में डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरी जारी कर दी है। 23 मई को यह ईसी जारी की गई थीं जिसमें 200 से अधिक मामले खनिज विभाग से संबंधित रहे।

सिया अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने डीम्ड परमिशन जारी किए जाने को गैर कानूनी बताते हुए पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से कर दी है। उनका आरोप है कि पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी व सिया के सदस्य सचिव और उमा आर माहेश्वरी जानबूझकर पर्यावरणीय अनुमित जारी करने के लिए बैठक नहीं होने दी। उनका आऱोप है कि सचिव ने बैठक का न एजेंडा दिया और न ही तारीख तय की, जबकि बैठक को लेकर उन्होंने कई पत्र लिखे, 7 मई के बाद कोई भी बैठक नहीं हुई जबकि 23 मई को अनुमति जारी कर दी गई। उनका आरोप है कि प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और सदस्य सचिव उमा माहेश्वरी खनिज माफिया से गठबंधन कर जानबूझकर बैठक नहीं होने दे रहे हैं।

इन अनुमति को लेकर ही अब सिया अध्यक्ष ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को नवनीत मोहन कोठारी और सदस्य सचिव के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की है। उन्होंने सभी अनुमतियों को नियम विरुद्ध बताते  हुए  कहा कि सिया की अनुमतियां सचिव ने आवेदक को नहीं दी और अपलोड भी नहीं कराए। ऐसी अनियमिताओं में पांच साल की सजा का प्रावधान है।

मंत्रालय से जुड़े सूत्र बताते है कि सिया दफ्तर से जुड़े विवाद और सरकार की किरकिरी से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सिया दफ्तर की तालाबंदी से जुड़े प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने सीधा हस्तक्षेप करते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन से भी नाराजगी जाहिर की थी जिसके बाद  आनन-फानन में दफ्तर का ताला खुलवाया गया था।

कौन है सिया अध्यक्ष शिवनारायण चौहान?जनवरी 2025 में सिय के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हुए शिवनारायण चौहान रिटार्यड IAS अधिकारी है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफर रहे शिवनारायण चौहान को 2013 में आईएएस अवॉर्ड हुआ था और साल 2017 में वह रिटायर्ड हुए थे। प्रशासनिक सेवा के रिटायर होने के बाद शिवनारायण चौहान ने 2017 में भाजपा में शामिल हो गए थे और उन्होंने 2018 के विधानसभा चुनाव के समय भाजपा मेनिफेस्टो कमेटी का सदस्य और  भाजपा स्टेट एफपीओ का इंचार्ज बनाया गया था। सगंठन से आने और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पंसद माने जाने वाले शिवनारायण चौहान की छवि काफी साफ सुथरी है।

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