भोपाल जोनल अफसरों के पॉवर घटे !!!

भोपाल नगर निगम में निगम आयुक्त के आदेश पर बुधवार देर रात बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई। फैसले के तहत अब जोन अधिकारी मर्जी से टैक्स नहीं घटा पाएंगे और संपत्तिकर की जांच तीन स्तरों पर होगी। पहली बार जोन अधिकारियों के ऊपर हर विधानसभा में एक-एक प्रभारी राजस्व अधिकारी (आरओ) नियुक्त किए गए हैं।
आदेश के अनुसार संपत्तियों के क्षेत्रफल, निर्माण के प्रकार, उपयोग परिवर्तन और गलत कर जैसे मामलों में संशोधन की शक्तियां तीन स्तरों में बांटी गई हैं। पहले जोन अधिकारियों को 20 हजार रुपए तक के अधिकार थे, अब इसमें आरओ और अपर आयुक्त भी शामिल होंगे।
इसके चलते सहायक आयुक्त कीर्ति सक्सेना को स्वास्थ्य शाखा से राजस्व व संपत्तिकर विभाग भेजा गया है। लंबे समय से जमे अधिकारियों और मनमानी की शिकायतों के कारण यह कदम उठाया गया।
सिर्फ 12 हजार रुपए तक के ही मामले की जांच कर पाएंगे
किसे क्या जिम्मेदारी
- जोनल अधिकारी (जोन 1 से 21): अब सिर्फ उन मामलों में निर्णय लेंगे, जहां कर योग्य संपत्तिकर मूल्य 12 हजार तक है।
- प्रभारी राजस्व अधिकारी (विधानसभावार): इन्हें 12,001 से 20,000 रुपए तक के कर मूल्य वाले प्रकरणों में संशोधन का अधिकार दिया है।
- अपर आयुक्त (विधानसभावार): 20,001 से 50,000 रुपए तक के प्रकरण अब अपर आयुक्त स्तर पर तय होंगे।
कमिश्नर लेंगी बड़े मामलों में फैसला
आदेश में स्पष्ट है कि यदि किसी संपत्ति का कर योग्य मूल्य 50,000 रुपए से अधिक है, तो ऐसे सभी प्रकरण निगम कमिश्नर के पास जाएंगे। 2020 के आदेश के तहत पहले ये अधिकार व्यापक रूप से जोनल अधिकारियों के पास थे।
बिजली शाखा में भी बदले गए: तकनीकी सहायक राकेश श्रीवास्तव को गोविंदपुरा और उत्तर विधानसभा, आशुतोष श्रीवास्तव को हुजूर और नरेला, और विश्वनाथ यादव को मध्य और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा की जिम्मेदारी दी है।
राजस्व और साफ-सफाई के काम में तेजी और पारदर्शिता के लिए कई बदलाव किए हैं। पहली बार जोन अधिकारियों के ऊपर प्रभारी राजस्व अधिकारी बनाए गए हैं। जरूरत के अनुसार आगे और बदलाव किए जाएंगे। -संस्कृति जैन, कमिश्नर नगर निगम

