मध्य प्रदेश

अयोध्या बायपास को 10 लेन बनाने से अच्छा है पूरा 16 किमी एलिवेटेड बनाएं… पेड़ भी बचेंगे, भविष्य भी !!

ये हमारी हरियाली का सवाल है:अयोध्या बायपास को 10 लेन बनाने से अच्छा है पूरा 16 किमी एलिवेटेड बनाएं… पेड़ भी बचेंगे, भविष्य भी

मैंने जिस अयोध्या बायपास का निर्माण किया, उसे आज जिस तरह 10 लेन बनाया जा रहा है, वह इंजीनियरिंग की दीर्घकालिक सोच से मेल नहीं खाती। सिर्फ सड़क चौड़ी करने के लिए 7,871 पेड़ों की कटाई करना यह दिखाता है कि हमने भविष्य की जरूरतों को साथ रखकर डिजाइन नहीं किया।

अयोध्या बायपास का यह कॉरिडोर भविष्य में रत्नागिरि से एयरपोर्ट तक प्रस्तावित मेट्रो रूट के लिए सबसे उपयुक्त है। गोविंदपुरा से आनंद नगर तक यह सीधा और व्यावहारिक मार्ग है। अगर आज सड़क जमीन पर चौड़ी की जाती है, तो कल मेट्रो के लिए फिर से खुदाई करनी पड़ेगी।

इससे न केवल लागत बढ़ेगी, बल्कि यातायात व पर्यावरण- दोनों पर दोबारा असर पड़ेगा। इसी कारण मेरा मानना है कि अयोध्या बायपास को पूरे 16 किमी में एलिवेटेड रोड के रूप में विकसित किया जाना चाहिए था। दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा प्रोजेक्ट में भी 16 किमी में से करीब 6 किमी एलिवेटेड रोड पहले से बनाई जा रही है, यानी लगभग 37.5% हिस्सा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आंशिक एलिवेशन संभव है, तो पूरा क्यों नहीं?

तो क्या इससे खर्च बढ़ता‌?

: ज्यादा नहीं। तकनीकी दृष्टि से देखें तो एलिवेटेड और जमीन पर बनने वाली सड़क की लागत में केवल 12% का अंतर होता है। मौजूदा योजना पर करीब 836 करोड़ रु. खर्च हो रहे हैं। यदि पूरे 16 किमी को एलिवेटेड बनाया जाता, तो यह काम 900 से 1000 करोड़ रुपए में पूरा किया जा सकता था। इस राशि में मेट्रो के लिए अतिरिक्त मजबूत पिलर और संरचनात्मक मजबूती भी शामिल की जा सकती है। यानी कुल करीब 175 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च आता।

मेरी राय में यहां बैरागढ़ की तर्ज पर डबल डेकर एलिवेटेड स्ट्रक्चर सबसे उपयुक्त विकल्प था। नीचे लोकल ट्रैफिक चलता, ऊपर एयरपोर्ट और शहर से बाहर जाने वाला ट्रैफिक। भविष्य में उसी संरचना पर मेट्रो। इससे बायपास लंबे समय तक बिना किसी बड़े हस्तक्षेप के काम करता रहता।

सर्विस रोड 7.5 मीटर की जगह 5 मीटर करते तो बचा सकते थे पेड़

मौजूदा प्रोजेक्ट में भी पेड़ बचाने की गुंजाइश थी। सर्विस रोड की चौड़ाई 7.5 मीटर से घटाकर 5 मीटर की जा सकती थी। जब हमने पीडब्ल्यूडी में रहते हुए इस सड़क का निर्माण किया था, तब इसके किनारे करीब 20 हजार पेड़ लगाए गए थे। आज उनमें से आधे ही बचे हैं। अधिकांश पेड़ दो कतारों में हैं। डिजाइन में मामूली बदलाव कर इन पेड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता था।

इस पूरे रूट को एलिवेटेड करने के पीछे दो बड़े तर्क

1 भविष्य में रत्नागिरि से एयरपोर्ट तक प्रस्तावित मेट्रो रूट के लिए यही सबसे उपयुक्त रूट, मेट्रो के लिए फिर खुदाई होगी 2 मौजूदा 10 लेन के प्रोजेक्ट में भी 16 किमी में से 6 किमी पहले से एलिवेटेड है, 10 किमी और रूट एलिवेटेड करना था

इससे 3 समस्याओं का समाधान हाेगा

1. पेड़ कटाई रुक जाती। 2. भविष्य की मेट्रो के लिए दोबारा खुदाई नहीं करनी पड़ती। 3. लोकल व बाहरी ट्रैफिक अलग-अलग लेवल पर व्यवस्थित हो जाता।

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