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ट्रंप की ‘ग्रीनलैंड जिद’ से सहमे नाटो देश !

ट्रंप की ‘ग्रीनलैंड जिद’ से सहमे नाटो देश, अमेरिका से आई इस खबर ने सबकी नींद उड़ाई!

डोनाल्ड ट्रंप की ‘ग्रीनलैंड’ खरीदने की जिद ने दुनियाभर के बाजारों में खलबली मचा दी है. नाटो देशों को दी गई ‘टैरिफ’ की धमकी से सोने-चांदी की कीमतों में उछाल आने के आसार हैं. वहीं, भारतीय शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव तय माना जा रहा है. जानिए, अमेरिका की इस नई ‘टैरिफ वॉर’ का आपकी जेब और निवेश पर क्या होगा सीधा असर.

ट्रंप की 'ग्रीनलैंड जिद' से सहमे नाटो देश, अमेरिका से आई इस खबर ने सबकी नींद उड़ाई!

डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ को हथियार बना रहे हैं….

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षाएं एक बार फिर वैश्विक बाजारों में भूचाल लाने को तैयार हैं. डेनमार्क के अधीन आने वाले विशाल आर्कटिक द्वीप ‘ग्रीनलैंड’ को खरीदने की अपनी जिद को पूरा करने के लिए ट्रंप ने अब अपने ही नाटो (NATO) सहयोगियों पर आर्थिक दबाव बनाने का फैसला किया है. इस बार भी उनका हथियार है भारी-भरकम टैरिफ. ट्रंप की इस घोषणा ने न केवल यूरोपीय देशों में खलबली मचा दी है, बल्कि भारतीय शेयर बाजार (दलाल स्ट्रीट) और सराफा बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है.

ट्रंप का नाटो देशों को अल्टीमेटमशनिवार को सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया कि अगर डेनमार्क और उसके सहयोगी देश ग्रीनलैंड की बिक्री पर बातचीत के लिए राजी नहीं होते, तो उन्हें आर्थिक मोर्चे पर इसकी कीमत चुकानी होगी. ट्रंप ने 1 फरवरी, 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड से होने वाले आयात पर 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की है. इतना ही नहीं, अगर 1 जून तक बात नहीं बनी, तो यह टैक्स बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा.

ट्रंप का तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है. हालांकि, यूरोपीय नेताओं ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे अटलांटिक के दोनों किनारों पर तनाव बढ़ गया है. कानूनी मोर्चे पर भी पेंच फंसा हुआ है, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट फिलहाल यह विचार कर रहा है कि क्या ट्रंप ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत इस तरह के टैरिफ लगा सकते हैं या नहीं. अगर कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ जाता है, तो यह उनकी रणनीति के लिए बड़ा झटका होगा. लेकिन फिलहाल, यह अनिश्चितता महंगाई और ग्लोबल ट्रेड के लिए खतरे की घंटी है.

सोना-चांदी में ये सुरक्षित निवेश का समय है?

जब भी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक शेयर बाजार के जोखिम से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागते हैं और ऐसे में सोना सबसे पसंदीदा विकल्प बन जाता है. बाजार के जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम सोने और चांदी की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है.

एलकेपी सिक्योरिटीज (LKP Securities) के वाइस प्रेसिडेंट जतीन त्रिवेदी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जारी उथल-पुथल के बीच सोने ने अपनी मजबूती बनाए रखी है. एमसीएक्स (MCX) पर सोना 1,43,150 रुपये के स्तर के आसपास बना हुआ है, जबकि कॉमेक्स पर यह 4,605 डॉलर के करीब है. उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहे तनाव और अब ग्रीनलैंड के मुद्दे ने बाजार में जोखिम का माहौल बना दिया है. ऐसे में डॉलर के विकल्प के रूप में सोने की मांग बढ़ना तय है. आने वाले दिनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जो 1,41,000 से 1,45,000 रुपये की रेंज में रह सकता है. चांदी की चाल भी सोने के ही नक्शेकदम पर रहने की उम्मीद है.

भारत के लिए खतरा या छुपा हुआ मौका?

भारतीय शेयर बाजार के लिए यह खबर मिली-जुली प्रतिक्रिया लेकर आई है. जानकारों का मानना है कि अगर यह ‘टैरिफ वॉर’ आगे बढ़ती है, तो शुरुआत में बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिल सकती है. अनिश्चितता के माहौल में विदेशी निवेशक (FIIs) उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में डालना पसंद करते हैं, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है.

हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भारत के लिए उम्मीद की किरण भी है. विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच यूरोपीय संघ (EU) भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की गति बढ़ा सकता है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत अंतिम चरण में है. ट्रंप के इस दबाव के बाद, यूरोप इस डील को जल्द से जल्द फाइनल करना चाहेगा. अगर यह समझौता होता है, तो लंबे समय में भारत के कपड़ा, फार्मा, जेम्स एंड ज्वैलरी, स्टील और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर्स को बड़ा फायदा मिल सकता है.

बाजार की नजरें इन संकेतों पर

बीता सप्ताह भारतीय बाजारों के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन अंत में सेंसेक्स और निफ्टी ने हल्की बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया. सेंसेक्स 83,570 और निफ्टी 25,694 के स्तर पर बंद हुआ, जिसमें आईटी और बैंकिंग शेयरों की खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई. जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि निवेशकों का रुझान अभी ‘देखो और इंतजार करो’ वाला है.

बाजार की अगली चाल अब काफी हद तक वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी. निवेशक अमेरिका के जीडीपी डेटा, महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर होने वाले फैसलों पर नजर गड़ाए बैठे हैं. भारत में कॉर्पोरेट नतीजों और पीएमआई (PMI) डेटा का भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रोल होगा.

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