मध्य प्रदेश

निकायों में सीधे प्रतिनियुक्ति ले रहे..मप्र के 16 निगमों में 500 ‘बाहरी’ ​सालों से अंगद जैसे जमे ?

निकायों में सीधे प्रतिनियुक्ति ले रहे…
मप्र के 16 निगमों में 500 ‘बाहरी’ ​सालों से अंगद जैसे जमे… भोपाल में ही ऐसे 90

मध्यप्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों को नगरीय विकास विभाग खासा रास आ रहा है। मप्र के 16 नगर निगमों में 400-500 अधिकारी-कर्मचारी ऐसे हैं, जो सालों से अपना विभाग छोड़कर डेप्युटेशन पर यहां डटे हुए हैं। अकेले भोपाल नगर निगम में ही ऐसे 90 अधिकारी-कर्मचारी हैं। ये अमला अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए सीधे निकायों में पोस्टिंग करवा लेता है, जबकि विभाग को इसकी सीधी जानकारी तक नहीं रहती।

नगरीय विकास विभाग में लगभग दो दशक से बाहरी विभागों से आए स्टाफ को हटाने के प्रयास चल रहे हैं। विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने जुलाई में निगमों को पत्र लिखकर बाहरी अमले को मूल विभाग में भेजने के निर्देश दिए थे।

दिलचस्प बात ये है कि विभाग में इस बात की सटीक जानकारी नहीं है कि खुद का अमला डेपुटेशन पर कहां है और बाहर के कितने अधिकारी-कर्मचारी निगमों में हैं। इसका कारण ये है कि विभाग का स्थापना सेक्शन 5-6 जगह बंटा हुआ है। हालांकि, ये दिक्कत सिर्फ निगमों में है, नगर पालिका और नगर परिषदों में नहीं।

अपर आयुक्त के 4 पदों पर 6 अधिकारी तैनात

भोपाल में वर्तमान में अपर आयुक्त के 4 पदों (दो प्रमोशन -2 डेपुटेशन) के विरुद्ध 6 अधिकारी हैं। इनमे अंजू अरुण कुमार (स्मार्ट सिटी सीईओ, अतिरिक्त प्रभार निगम में), आईएएस तन्मय वशिष्ठ, राज्य प्रशासनिक सेवा के मुकेश शर्मा और वरुण अवस्थी, विभाग से हर्षित तिवारी और वित्त सेवा के गुणवंत सेवतकर हैं।

जून में भोपाल निगम में डेपुटेशन पर पदस्थ आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान और सहायक आयुक्त एकता अग्रवाल को ट्रांसफर आदेश जारी हुआ था पर दोनों 4 महीने तक अपने विभागों में नहीं गए। विभाग ने दो महीने का वेतन रोका, तब विदा हुए। वित्त सेवा के अधिकारी गुणवंत सेवतकर 5 साल से भोपाल निगम में हैं। नगरीय विकास विभाग के अधिकारी कहते हैं, हमें तो पता ही नहीं कब कौन आकर चला जाता है। पूरा मामला ऊपरी कमाई का है

हरेंद्र कुशवाहा, चंचलेश गिराडे (ऊर्जा विभाग से) और दिनेश सिंह उपायुक्त हैं। उदित गर्ग (पीएचई से प्रभारी एसई हैं), दूसरे विभागीय एसई सुबोध जैन रिटायर हो गए। अब आरआर जारोलिया प्रभारी एसई हैं।

विभाग को अपने अमले की भी सही जानकारी नहीं

अगस्त 2020 में भोपाल निगम ने विभाग के निर्देश पर 66 बाहरियों की पहचान कर मूल विभाग में भेजने की तैयारी की। 15 लोग हाई कोर्ट चले गए। तर्क दिया कि विभाग के निर्देश पर डेप्युटेशन पर आए थे, निगम ने सीधे इसे निरस्त कर दिया। हाई कोर्ट ने स्टे दे दिया। हाल में नगरीय प्रशासन संचालनालय ने सभी 413 निकायों से अपने प्रतिनियुक्ति पर चल रहे अमले की लिस्ट मांगी थी जो 3 साल बाद भी विभाग में नहीं लौटे हैं। किसी भी नगर निगम ने अब तक जानकारी नहीं भेजी है। निकायों ने आधी-अधूरी जानकारी भेजी।

जनता से जुड़ा विभाग, भ्रष्टाचार की संभावना

खुद का अमला होने के बावजूद बाहरी स्टाफ राजनीतिक रसूख से निगम में पदस्थ हो जाता है। निगम में 9 ईई प्रमोट हुए हैं पर बाहर के अधिकारी एसई बने हुए हैं। ज्यादा सुविधाएं और वेतन मिलता है। जनता से जुड़ा सीधा विभाग है तो भ्रष्टाचार की बड़ी संभावना है। -जितेंद्र शुक्ला,भाजपा पार्षद भोपाल

आगे भी उठाएंगे मुद्दा

भ्रष्टाचार करने के लिए ही बाहरी लोग निगमों में आते हैं। पहले भी परिषद बैठक में ये मुद्दा उठाया है, आगे भी उठाएंगे और मांग करेंगे कि बाहरियों को मूल विभाग वापस भेजा जाए। -मो. अजीजुद्दीन,कांग्रेस पार्षद भोपाल

स्थापना का मामला बड़ी समस्या:

आयुक्त स्थापना का मामला हमारे विभाग की बड़ी समस्या रही है। फेस रिकग्निशन जैसे नवाचार से ये सामने आएगा कि कौन कहां पदस्थ है। इसके बाद आगे करवाई करेंगे। -संकेत भोंडवे, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास

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