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ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज:लैब में न बीकर, न कैडेवर, बिना प्रैक्टिकल MBBS की पढ़ाई

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज
लैब में न बीकर, न कैडेवर, बिना प्रैक्टिकल MBBS की पढ़ाई

नए ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज इंदौर में एमबीबीएस पहली बैच के 50 छात्रों का भविष्य अधर में है। सत्र शुरू हुए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन भविष्य के डॉक्टरों की नींव यहां ‘प्रैक्टिकल’ के बिना ही रखी जा रही है।

छात्रों को न कैडेवर उपलब्ध कराया गया, न ही लैब में बीकर-माइक्रोस्कोप की सुविधा है। एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे मूलभूत विषयों की पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित है। यहां नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की गाइडलाइन का भी उल्लंघन हो रहा है। इससे नाराज पूरे बैच (50 छात्रों) ने पिछले दिनों प्रैक्टिकल क्लास का बहिष्कार कर दिया था।

एनएमसी के नियमों के अनुसार हर 10-15 छात्रों पर एक कैडेवर होना चाहिए, ताकि वे मानव शरीर की बारीकियों को समझ सकें। 50 छात्रों के इस छोटे बैच के लिए भी कॉलेज प्रबंधन 3 महीने में एक भी कैडेवर नहीं जुटा पाया है। प्रबंधन का तर्क है कि इंदौर में शवों की कमी है।

पीपीटी से खानापूर्ति

फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री लैब की हालत और भी खराब है। छात्रों के मुताबिक लैब में माइक्रोस्कोप, टेस्ट ट्यूब, बीकर और जरूरी केमिकल (रीजेंट) तक उपलब्ध नहीं हैं। ‘एग्जामिनेशन टेबल’ तक नहीं है। प्रैक्टिकल के नाम पर पीपीटी दिखा देते हैं।

अब भविष्य की चिंता

बैच में 35 से अधिक छात्र हिंदी माध्यम से हैं। कई छात्रों ने जीएमसी भोपाल, जबलपुर और रतलाम सरकारी कॉलेजों की सीट छोड़कर ईएसआईसी इंदौर को चुना था। अब ये छात्र खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कीमती समय बर्बाद हो रहा है।

एक सप्ताह में सारी व्यवस्थाएं करेंगे : डीन ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. यू. राजेश संग्राम का कहना है कि छात्रों की शिकायतें संज्ञान में हैं और समाधान की प्रक्रिया चल रही है। छात्रों से एक सप्ताह का समय मांगा है।

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