सरकार का काम हम कर रहे…?
चंबल संभागायुक्त के खिलाफ हाई कोर्ट को गलत जानकारी देने के मामले में भिंड कलेक्टर केएल मीणा को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ अब अवमानना की कार्रवाई नहीं चलेगी। हालांकि, सरकारी जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच ने कहा- ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जहां सरकारी संपत्ति की सुरक्षा करना राज्य सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है, लेकिन केवल कोर्ट ही इसे गंभीरता से ले रहा है, अधिकारी नहीं।
हाई कोर्ट ने कहा- सरकारी वकील शैलेंद्र सिंह कुशवाह के बार-बार अनुरोध को देखते हुए और कलेक्टर के कॅरियर को ध्यान में रखते हुए अवमानना की कार्रवाई शुरू नहीं की जा रही। लेकिन इस मामले में भिंड कलेक्टर लापरवाह रहे, उन्होंने राज्य संपत्ति के हित को नजरअंदाज कर कोर्ट के सामने असत्य वक्तव्य देने में भी संकोच नहीं किया।
बता दें कि इस मामले में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भिंड कलेक्टर को प्रशासनिक चेतावनी दी है। मुख्य सचिव का आदेश कलेक्टर की सेवा पुस्तिका में रखा जाएगा।
सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता कुशवाह ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि कलेक्टर कोर्ट के आदेश को भविष्य में हल्के में नहीं लेंगे और अधिक सतर्क रहेंगे।
मामला: दंदरौआ सरकार मंदिर ट्रस्ट को मिली 50 हे. भूमि का दरअसल, दंदरौआ सरकार मंदिर ट्रस्ट को 24 जुलाई 2007 को लगभग 50 हेक्टेयर जमीन पौधरोपण के लिए लीज पर दी गई। कलेक्टर भिंड ने 25 अप्रैल 2011 को यह आवंटन निरस्त किया, जिसे ट्रस्ट ने चुनौती दी और 15 जनवरी 2015 को राजस्व मंडल ने कलेक्टर का आदेश पलट दिया।
मप्र शासन ने लगभग छह साल बाद 2021 में याचिका दायर की, जिसमें 13 फरवरी 2024 को नोटिस जारी हुए, पर 29 मई 2024 को प्रोसेस फीस न भरने पर याचिका खारिज हो गई। दोबारा सुनवाई की मांग पर कोर्ट ने देरी पर सवाल किए। भिंड कलेक्टर ने गलत जानकारी देने पर बाद में माफी मांगी।

