मेरठ के नेता पर 56 मुकदमे, दूसरा हिस्ट्रीशीटर…BSP में एंट्री हुई ??
बहुजन समाज पार्टी (BSP) अपना विस्तार करने के लिए अपराधियों को भी गले लगा रही है। हैरानी की बात ये है कि दो अपराधियों की सीधे बसपा प्रमुख मायावती से भेंट तक करा दी गई। दोनों अपराधियों को बसपा का पटका तक पहना दिया गया।
बताया जाता है कि दोनों अपराधी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में पार्टी की ओर से अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर किस्मत आजमाना चाहते हैं।
हालांकि इस इंट्री के होते ही पार्टी में उनके अतीत को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई। ये चर्चा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंची तो उनके हाथ–पांव फूल गए। बसपा प्रमुख मायावती के गुस्से से बचने के लिए वे पल्ला झाड़ने में जुट गए हैं। फिलहाल दोनों की इंट्री पर रोक लगा दी गई है।

पहली बार 2007 में दर्ज हुआ था केस
पार्टी सूत्रों की मानें तो दोनों अपराधी मेरठ के हैं। एक का नाम वसीम मुन्ने है। मेरठ जिले के मुंडाली थाना क्षेत्र के साफियाबाद लोटी गांव निवासी वसीम पुत्र मुन्ने निवासी पर 56 एफआईआर दर्ज हैं।
ये भी संयोग ही है कि उस पर पहला मुकदमा 2007 में दर्ज हुआ था, तब सूबे में बसपा प्रमुख मायावती ही मुख्यमंत्री थी। ये एफआईआर गाजियाबाद में दर्ज हुआ था। इसके खिलाफ गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, दिल्ली, हापुड़, मेरठ आदि जिलों में दर्ज है। दर्ज प्रकरणों में चोरी, लूट, डकैती, धोखाधड़ी, बलवा आदि शामिल हैं।
वहीं, बसपा की सदस्यता लेने वाला सुशील फौजी मेरठ जिले के भदौड़ा थाना रोहटा का रहने वाला है। वह थाने का गैंगस्टर है। इसके खिलाफ भी 12 प्रकरण दर्ज हैं। इसमें हत्या से लेकर बलवा आदि के प्रकरण दर्ज हैं।
यही नहीं सुशील के अलावा उसके भाईयों पर भी गैंगस्टर का प्रकरण दर्ज है। पुलिस ने अपने रिकॉर्ड में लिखा है कि सुशील फौजी गैंग बनाकर लूट, रंगदारी, हत्या और धमकी देकर लोगों में दहशत फैलाने का काम करता है।

22 जनवरी को लखनऊ में मायावती से कराई गई मुलाकात
पार्टी के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो दोनों अपराधियों की गुरुवार, 22 जनवरी को लखनऊ में मायावती से मुलाकात कराई गई। इन के साथ मेरठ के पदाधिकारी भी थे। दोनों के बारे में बसपा प्रमुख मायावती को बताया गया कि इनके शामिल होने से मेरठ जिले में पार्टी को काफी मजबूती मिलेगी।
सूत्रों की मानें तो दोनों के अतीत (अपराध) को जानबूझकर बसपा सुप्रीमो से छिपाया गया। बताते हैं कि मायावती से मुलाकात के बाद दोनों को पार्टी का पटका पहना कर विधिवत उन्हें सदस्यता दिला दी गई। इसकी जानकारी मेरठ के बसपा से जुड़े नेताओं को लगी तो लोग चौंक गए।
कारण कि बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी के पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दे रखी है कि पार्टी में किसी की भी इंट्री कराने से पहले उसके अतीत को जांच लें। आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों को पार्टी में शामिल करने से परहेज करने के लिए कहा है। हालांकि राजनीतिक कारणों से दर्ज प्रकरणों के मामले में मायावती ने छूट दी है।
दोनों को पार्टी में शामिल कराने के पीछे मेरठ कोआर्डिनेटर विक्रम सिंह का नाम सामने आया है। हालांकि विक्रम सिंह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि उन्होंने दोनों को पार्टी में शामिल नहीं कराया है

रेप के प्रकरण में आरोपी महिला को करा चुके हैं पार्टी में शामिल
मेरठ मंडल के कोआर्डिनेटर विक्रम सिंह पर पहली बार इस तरह के आरोप नहीं लगे हैं। इससे एक महीने पहले उन्होंने रेप के प्रकरण में सह आरोपी मीनाक्षी सिंह को पार्टी में शामिल कराया था।
रेप का ये प्रकरण चार साल पुराना है। बरेली निवासी एक मुस्लिम युवती ने तब भाजपा नेत्री रहीं मीनाक्षी सिंह, उनके भाई पर रेप का प्रकरण दर्ज कराया था। हिंदूवादी संगठन चलाने वाली मीनाक्षी सिंह पर उसने आरोप में कहा था कि उसने उसे घर में शरण दी थी।

इस दौरान मीनाक्षी सिंह के भाई ने नशीला पेय पिलाकर उसके साथ रेप किया था। मीनाक्षी सिंह पर आरोप था कि उन्होंने वीडियो क्लिपिंग बनाकर उस पर दबाव बनाया था। इसके बाद भाजपा ने मीनाक्षी सिंह को पार्टी से निकाल दिया था। उसी मीनाक्षी सिंह को बसपा ने पार्टी ज्वॉइनिंग करा दी। तब पदाधिकारियों ने मीनाक्षी सिंह को दिल्ली ले जाकर बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात कराई थी।

अपराधियों को लेकर मायावती का सख्त स्टैंड रहा है
बसपा प्रमुख मायावती के बारे में चर्चित है कि वह अपराधियों को लेकर किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतती हैं। पेशेवर अपराधियों को लेकर वे हमेशा से सख्त रहीं हैं। यहां तक 2007 से 2012 के बीच जब वे यूपी में सीएम थी तो उमाकांत यादव को अपने आवास पर बुलाकर गिरफ्तार करवा दिया था।
उमाकांत तब मछली शहर से बसपा के सांसद थे। उन पर एक महिला की जमीन कब्जा करने के प्रकरण में कोर्ट ने सजा सुना दी थी। इस प्रकरण में पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पा रही थी। तब डीजीपी ने बसपा प्रमुख मायावती से मिलकर इस मामले को रखा।
मायावती ने आवास से ही उमाकांत को फोन करवाया और मिलने बुलाया। जैसे ही वे सीएम आवास पहुंचे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उमाकांत की राजनीति इस गिरफ्तारी के बाद समाप्त हो गई।

अपराधियों की इंट्री पर मचा बवाल तो लगाई रोक
बसपा प्रमुख मायावती बिना जिलाध्यक्ष और मंडल कोआर्डिनेटर की संस्तुति से किसी से भी मिलती नहीं है। मायावती से मुलाकात का पूरा एक प्रोटोकॉल है। पार्टी में यदि किसी को टिकट चाहिए, तो उसकी भी एक अघोषित गाइडलाइन तय है। उस गाइडलाइन की शर्त पूरी करने वाले को ही मायावती से मिलाया जाता है। इसके बाद ही उसकी पार्टी में इंट्री होती है। लेकिन मेरठ के दोनों अपराधियों की मायावती से मुलाकात कराने के प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है।
पार्टी के मेरठ मंडल के कोआर्डिनेटर विक्रम सिंह ने ये कहते हुए कोई भी बात करने से साफ मना कर दिया कि इस प्रकरण में पश्चिम के प्रभारी नौशाद अली जी बताएंगे। इसके बाद दैनिक भास्कर ने नौशाद अली से बात की। उन्होंने भी कोई बयान देने से मना कर दिया। सिर्फ इतना कहा कि दोनों अपराधियों की इंट्री पर रोक लग गई है।

