नई दिल्ली। गंगा नदी को भारत में करोड़ों लोग पवित्र मानते हैं। आमतौर पर गंगा की चर्चा पूजा, स्नान और धार्मिक आस्था से जुड़ी होती है। लेकिन, इस बार गंगा अलग वजह से चर्चा में है।

ब्रिटेन को मशहूर जीवविज्ञानी और टीवी शो रिवर मॉन्सटर्स के होस्ट जेरेमी वेड ने गंगा के पानी पर एक साधारण टेस्ट किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जेरेमी वेड दुनिया की कई नदियों पर रिसर्च कर चुके हैं।

क्या गंगा का पानी साफ है?

इस वीडियो में उन्होंने किसी महंगे उपकरण का नहीं, बल्कि एक साधारण केमिकल टेस्ट का इस्तेमाल किया। यह टेस्ट पानी की गुणवत्ता के अनुसार रंग बदलती है। वेड सबसे पहले मिनरल वॉटर की जांच करते हैं। टेस्ट के बाद पानी का रंग गहरा गुलाबी-भूरा हो जाता है। उन्होंने बताया कि गुलाबी रंग साफी पानी की पहचान है।

इसके बाद वे गंगा से लिए गए पानी की जांच करते हैं। इस बार पानी का रंग हल्का भूरा हो जाता है। जेरेमी वेड ने कहा, यह गंगा का पानी है। इसका मतलब है इसमें फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया हैं, यानी यह पानी इंसानी मल से दूषित है।

वेड ने साधु के साथ किया गंगा स्नान

वीडियो में वेड यह भी कहते हैं कि गंगा की सफाई पर बात करना बहुत संवेदनशील विषय है। उन्होंने कहा, गंगा को गंदा कहना हिंदुओं के लिए बेहद अपमानजनक हो सकता है, क्योंकि यह उनके लिए सिर्फ नदी नहीं बल्कि पवित्र प्रतीक है। इस दौरान वेड की मुलाकात एक साधु से भी होती है, जो उन्हें गंगा में स्नान करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

बिना किसी का अपमान किए, जेरेमी वेड स्नान करने का फैसला करते हैं। वे नदी में उतरते हैं और बाद में कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि इस रस्म में तैरना भी शामिल है। उन्होंने कहा, यह ताजगी देने वाला है, लेकिन मैं आसपास तैरती चीजों और नीचे की नरम, फिसलन भरी सतह के बारे में सोचने से बच रहा हूं।

वीडियो में साधु गंगा का पानी पीते हुए भी दिखाई देते हैं। हालांकि, जेरेमी वेड पानी सिर्फ होंठोंतक ले जाते हैं और पीते नहीं हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, मैं खुद को तरोताजा महसूस कर रहा हूं। अब देखना है कि मुझे पेचिश या इससे भी कुछ बुरा होता है या नहीं।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने खुलकर अपनी राय रखी। एक यूजर ने लिखा, अंधी आस्था किसी की मदद नहीं करती, गंगा की भी नहीं। दूसरे ने कहा, धार्मिक विश्वास गंगा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। समझ के बिना शिक्षा भी एक तरह की अज्ञानता है।

एक दर्शक ने अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा, मैंने गंगा में कई बार तैराकी की है, लेकिन हिमालय की तलहटी में जैसे ऋषिकेश में। नीचे के इलाकों में मैं कभी तैरने की हिम्मत नहीं करूंगा। मैंने रोज लोगों को गाय का गोबर नदीं में फेंकते देखा है।