भोपाल बनेगा ‘ग्रीन सिटी’… बिना सरकारी खर्च के 170 पार्कों और रोटरी का होगा कायाकल्प
भोपाल बनेगा ‘ग्रीन सिटी’… बिना सरकारी खर्च के 170 पार्कों और रोटरी का होगा कायाकल्प
झीलों की नगरी भोपाल अब और भी खूबसूरत और हरी-भरी नजर आएगी। दरअसल राजधानी के पार्कों, रोटरी और जलस्रोतों की दशा सुधारने के लिए भोपाल नगर निगम ने एक बड़ी योजना तैयार की है। निगम ने शहर के 170 से अधिक सार्वजनिक स्थलों के कायाकल्प के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी कर दिया है।
भोपाल बनेगा ‘ग्रीन सिटी’… AI Generated- 170 सार्वजनिक स्थलों को CSR के जरिए गोद ले सकेंगी संस्थाएं और बैंक
- विज्ञापन पर रोक और 3 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी होगी अनिवार्य
- सोलर लाइट और वेस्ट मैनेजमेंट से भोपाल को ईको-फ्रेंडली बनाने का लक्ष्य
भोपाल। झीलों की नगरी भोपाल अब और भी खूबसूरत और हरी-भरी नजर आएगी। दरअसल राजधानी के पार्कों, रोटरी और जलस्रोतों की दशा सुधारने के लिए भोपाल नगर निगम ने एक बड़ी योजना तैयार की है। निगम ने शहर के 170 से अधिक सार्वजनिक स्थलों के कायाकल्प के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी कर दिया है।
खास बात यह है कि इस पूरी कवायद में सरकारी खजाने से एक भी रुपया खर्च नहीं होगा। सारा काम कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के जरिए किया जाएगा। राजधानी के कई उपेक्षित पार्कों के लिए यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि भोपाल की ‘हरियाली’ को ‘खुशहाली’ में बदलने के लिए कितने हाथ आगे आते हैं।
सिर्फ सुंदरीकरण नहीं, ईको-फ्रेंडली होगा बदलाव
नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य केवल पार्कों में घास लगाना या पुताई करना नहीं है। ईओआई के मुताबिक, गोद लेने वाली संस्थाओं को वहां आधुनिक लैंडस्केपिंग, पौधारोपण, बैठने की व्यवस्था और लाइटिंग के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। इसमें सोलर लाइट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे फीचर्स अनिवार्य किए गए हैं। इससे न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
तीन साल का बंधन और विज्ञापन पर कैंची
निगम ने इस बार रखरखाव को लेकर कड़े नियम बनाए हैं। जो भी संस्था किसी पार्क या रोटरी को गोद लेगी, उसे कम से कम तीन साल तक उसका रखरखाव करना होगा। संस्थाओं को किसी भी तरह के व्यावसायिक विज्ञापन या उत्पाद के प्रचार की अनुमति नहीं दी जाएगी। वे केवल अपनी पहचान के लिए एक सीमित आकार का बोर्ड या लोगो लगा सकेंगी। निगम ने साफ कर दिया है कि यह व्यापार नहीं, शहर के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर है।
सबके लिए खुले दरवाजे: नागरिक भागीदारी पर जोर
इस अभियान में भागीदारी के लिए पात्रता का दायरा बेहद व्यापक रखा गया है। केवल बड़े कॉर्पोरेट हाउस ही नहीं, बल्कि बैंक, शैक्षणिक संस्थान, मीडिया हाउस, स्टार्टअप, एनजीओ और यहां तक कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) भी अपने पास के पार्क को गोद ले सकते हैं। निगम का मानना है कि इससे नागरिकों में अपने शहर के प्रति अपनत्व की भावना बढ़ेगी।
तारीखें और प्रक्रिया: एक नजर में
- ईओआई जारी होने की तिथि: 28 जनवरी
- प्री-सबमिशन मीटिंग: 12 फरवरी
- प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि: 2 मार्च
भोपाल को सुंदर शहर बनाने के लिए निगम ने सीएसआर के जरिए लोगों को एक मौका दिया है। शहर को अपना समझकर आगे आएं और इस काम को करें। – संस्कृति जैन, निगमायुक्त, भोपाल

