मध्य प्रदेश

MP में अटकी SC-ST अत्याचार पीड़ितों की राहत राशि !

MP में अटकी SC-ST अत्याचार पीड़ितों की राहत राशि, 7,400 से ज्यादा मामले लंबित, मुख्य सचिव ने जताई नाराजगी

MP News: मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अत्याचार पीड़ितों को न्याय और आर्थिक संबल देने की प्रक्रिया कछुआ चाल से चल रही है। कानून के तहत मिलने वाली राहत राशि के हजारों प्रकरण फाइलों में दबे हुए हैं, जिससे पीड़ितों को समय पर मदद नहीं मिल पा रही है।MP में अटकी SC-ST अत्याचार पीड़ितों की राहत राशि, 7,400 से ज्यादा मामले लंबित, मुख्य सचिव ने जताई नाराजगीअटकी SC-ST अत्याचार पीड़ितों की राहत राशि। (Image Source: AI-Generated)

  1. मध्य प्रदेश में अत्याचार पीड़ितों को राहत में देरी
  2. 7,400 से ज्यादा फाइलें पुलिस के पास अटकीं
  3. मुख्य सचिव और DGP ने दिए सख्त निर्देश

 भोपाल। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के अत्याचार पीड़ितों को न्याय और आर्थिक संबल देने की प्रक्रिया कछुआ चाल से चल रही है। कानून के तहत मिलने वाली राहत राशि के हजारों प्रकरण फाइलों में दबे हुए हैं, जिससे पीड़ितों को समय पर मदद नहीं मिल पा रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में करीब 7,453 मामले पुलिस और जिला प्रशासन के स्तर पर अटके हुए हैं।

पुलिस और जिला समितियों के पास लंबित हजारों मामले

वर्तमान स्थिति यह है कि कुल 3,259 प्रकरण पुलिस स्तर पर लंबित हैं, जहां जांच या प्रारंभिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। इसके अतिरिक्त, 4,194 मामले जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समितियों के पास लंबित हैं। इन समितियों की जिम्मेदारी राहत राशि के वितरण की समीक्षा करना है, लेकिन बैठकों के समय पर न होने और प्रक्रियात्मक देरी के कारण मामला अधर में लटका हुआ है।

इन जिलों में स्थिति सबसे खराब

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पुलिस स्तर पर सर्वाधिक लंबित प्रकरण छिंदवाड़ा, विदिशा, राजगढ़, मुरैना, इंदौर और सागर जिलों में हैं। वहीं, जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समितियों की लापरवाही के मामले में सागर, ग्वालियर, नर्मदापुरम, धार और जबलपुर सबसे आगे हैं। इन जिलों में समीक्षा की कमी के कारण पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता रुकी हुई है।

क्या है राहत राशि का प्रावधान?

अत्याचार निवारण नियम, 1995 (संशोधित 2016) के अनुसार, एससी-एसटी वर्ग के पीड़ितों को अपराध की प्रकृति के आधार पर 75,000 रुपये से लेकर 8.5 लाख रुपये तक की राहत राशि दी जाती है। यह सहायता प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होने के बाद जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रदान की जाती है। राशि में देरी का सीधा असर पीड़ित के पुनर्वास और न्याय पाने की क्षमता पर पड़ता है।

मुख्य सचिव और डीजीपी ने दिए सख्त निर्देश

प्रकरणों की इस लंबी फेहरिस्त पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में मंत्रालय में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर एवं कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी लंबित प्रकरणों का तय समय-सीमा में निराकरण कर शासन को सूचित किया जाए। इसी क्रम में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने भी पुलिस अधीक्षकों को पुलिस स्तर पर लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने के निर्देश जारी किए हैं।

एससी-एसटी के प्रकरणों में राहत राशि समय पर न मिलने का सबसे बड़ा कारण प्रशासन की लापरवाही है। जिला प्रशासन और पुलिस ऐसे प्रकरणों को जानबूझकर लंबित रखती है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।- डॉ. हीरालाल अलावा, कांग्रेस विधायक, मनावर।

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