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बड़ा खेल: एक जैसी वारदात…एक अधीक्षक पर गिरी गाज, दूसरे पर मेहरबानी बरकरार; उच्चाधिकारियों पर उठे सवाल

बड़ा खेल: एक जैसी वारदात…एक अधीक्षक पर गिरी गाज, दूसरे पर मेहरबानी बरकरार; उच्चाधिकारियों पर उठे सवाल

प्रदेश की दो जेलों से बंदी फरार होने के मामलों में कार्रवाई का दोहरा मापदंड सामने आया है। अयोध्या में तत्काल जेल अधीक्षक निलंबित हुए, जबकि कन्नौज में दोषी पाए जाने के बावजूद अधीक्षक को बचा लिया गया। जांच रिपोर्ट में खेल के आरोप से कारागार प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
The big game: Similar incidents...one superintendent faces action, while the other remains in favor; questions
प्रतीकात्मक फोटो – फोटो

एक महीने के भीतर दो जेलों से बंदी फरार हुए। अयोध्या मामले में चंद मिनट में जेल अधीक्षक भी निपट गए लेकिन कन्नौज की घटना में दोषी पाए जाने के बाद भी अधीक्षक को बचा लिया गया। अब तक शासन को रिपोर्ट तक नहीं भेजी गई, क्योंकि जांच में बड़ा खेल कर दिया गया। कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग के उच्चाधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

28 जनवरी की रात अयोध्या जेल से दो बंदी भाग निकले। जेल अधीक्षक समेत 11 कर्मियों को निलंबित कर दिया गया। दूसरी तरफ 5 जनवरी की सुबह कन्नौज से भी दो बंदी भागे थे। उसमें जेलर, डिप्टी जेलर समेत पांच कर्मी सस्पेंड किए गए थे लेकिन जेल अधीक्षक पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ वहां से हटाकर मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया था। दोनों घटनाएं एक जैसी हैं, उसके बावजूद तत्कालीन कन्नौज जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद को फिलहाल बचा लिया गया।
जांच रिपोर्ट में खेल…

कन्नौज प्रकरण की जांच डीआईजी जेल कानपुर रेंज प्रदीप गुप्ता ने की थी। जिसमें तत्कालीन जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद, निलंबित जेलर विनय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद, हेड जेल वार्डर शिवचरणन, जेल वार्डर शिवेंद्र सिंह यादव व अतुल मिश्रा को दोषी पाया था। रिपोर्ट डीजी जेल को भेज दी थी। जिसे शासन भेजी जानी थी। सूत्रों के मुताबिक यहीं पर जांच रिपोर्ट में खेल किया गया। रिपोर्ट सीन कर शासन को भेजी जानी चाहिए थी लेकिन उसमें मामूली सी चेतावनी देकर ही जांच रफादफा कर दी गई।

आखिर कैसे दरकिनार की गई लापरवाही

डीआईजी जेल कानपुर रेंज की जांच में जेल अधीक्षक की लापरवाही उजागर हुई थी। इसलिए उनको दोषी बनाया था। गंभीर और संवेदनशील मामले में दोषी पाए गए अफसर पर कार्रवाई न करके मामला रफादफा करना उच्चाधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। क्योंकि अगर मंशा सही होती तो जिस तेजी से अयोध्या प्रकरण में रिपोर्ट भेजी गई और कार्रवाई हुई, उसी तरह कन्नौज मामले में भी एक्शन होता।

कारागार मंत्री बोले-जानकारी की जाएगी 

कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने बताया कि मामले की जानकारी की जाएगी। अगर जांच में किसी तरह की गड़बड़ी की गई होगी तो उसकी गहनता से तफ्तीश कराई जाएगी। किसी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डीजी बोले-डीआईजी रेंज ने जांच पूरी कर ली

डीजी कारागार पीसी मीणा ने बताया कि डीआईजी रेंज ने जांच पूरी कर ली है। अभी मैं जांच रिपोर्ट नहीं देख सका हूं। 

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