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बिना शराब वाले लोगों को भी फैटी लिवर का खतरा !

बिना शराब वाले लोगों को भी फैटी लिवर का खतरा, हर 10 में चार वयस्क शिकार; चौंकाने वाले तथ्य

CSIR and AIIMS Delhi research claims liver fibrosis in more than four percent of patients
सांकेतिक तस्वीर – फोटो : AI
देश में फैटी लिवर की बीमारी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। हाल में सीएसआईआर और एम्स दिल्ली की एक रिसर्च में सामने आया है कि देश में हर 10 में से लगभग चार वयस्क फैटी लिवर (एमएएसएलडी) से पीड़ित हैं। शोध के अनुसार इनमें से करीब 4.1 प्रतिशत मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस यानी लिवर के सख्त होने के लक्षण भी पाए गए हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो यह बीमारी अब सिर्फ शराब पीने वालों तक सीमित नहीं रही है। शराब न पीने वाले और पूरी तरह शाकाहारी लोग भी खराब खान-पान और गलत जीवनशैली के कारण फैटी लिवर का शिकार हो रहे हैं। जंक फूड, ज्यादा तला-भुना खाना, मीठा, मैदा, बढ़ता वजन और शुगर इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती दौर में कोई साफ लक्षण नजर नहीं आते। समय रहते जांच न होने पर लिवर धीरे-धीरे सख्त हो सकता है और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में परेशानी होती है। शोध में यह भी पाया गया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, मोटापे और डायबिटीज से पीड़ित मरीज ज्यादा जोखिम में हैं। 

समय पर जांच से बीमारी काबू में आ सकती है
उत्तर और मध्य भारत में पुरुषों और दक्षिण भारत में महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी गई है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि उम्र या वजन बढ़ने पर लिवर की जांच कराएं, मीठा और ज्यादा चर्बी वाला खाना कम करें, हरी सब्जियां और फल खाएं तथा नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें। सही समय पर सावधानी और जांच से फैटी लिवर की बीमारी को काबू में रखा जा सकता है।

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