ग्वालियर… मास्टर प्लान 2035 …शहर में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए बनने थे तीन ट्रांसपोर्ट नगर, 6 साल में काम तो दूर बैठक भी नहीं हुई
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए पिछले मास्टर प्लान में प्रस्तावित किए गए नए ट्रांसपोर्ट नगर बसाने के लिए 6 साल में काम शुरू होना तो दूर, बल्कि उनके लिए प्रारंभिक बैठक भी नहीं की गई। जिसका नतीजा ये है कि मौजूदा ट्रांसपोर्ट नगर पर ही तमाम तरह के सामान के आयात-निर्यात का दबाव रहता है। साथ ही दाल बाजार, लोहिया बाजार, नया बाजार, सदर बाजार समेत कई बड़े बाजारों में बड़े वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
जिससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी बिगड़ी रहती है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने नए मास्टर प्लान-2035 में भी इन ट्रांसपोर्ट नगरों को बसाए जाने का प्रस्ताव दोहराया है। अधिकारियों का मानना है इस बार संबंधित विभागों को इसे गंभीरता से लेकर काम करना चाहिए। ताकि, शहर की ट्रैफिक व बाजारों की व्यवस्था में राहत मिल सके।
टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक वीके शर्मा ने कहा कि पिछले मास्टर प्लान में 3 नए ट्रांसपोर्ट नगर प्रस्तावित थे, लेकिन संबंधित विभागों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नए मास्टर प्लान में इन्हें फिर प्रस्तावित किया गया है, इस बार वरिष्ठ अधिकारियों को बताया जाएगा कि इनके बनने से व्यवस्थाओं में सुधार होगा। इसलिए इन्हें बनाने पर फोकस किया जाए।
नए ट्रांसपोर्ट नगर का फायदा: ट्रांसपोर्टेशन खर्च और सड़क हादसे दोनों ही होंगे कम
- मौजूदा ट्रांसपोर्ट नगर बहोड़ापुर क्षेत्र में स्थित है, इसका मूल रूप से फायदा इंदौर-आगरा रूट पर चलने वाले वाहन चालकों को मिल पाता है। इन रूट से जो भी ट्रक चालक सामान लेकर आते हैं वे सीधे वहां पहुंच जाते हैं और सामान लेकर चले भी जाते हैं। लेकिन झांसी या इटावा रूट की बात करें, तो इन रूटों से वाहन चालकों को 25 से 35 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचना होता है।
- झांसी रोड, बेला की बावड़ी (शिवपुरी लिंक रोड) और भिंड रोड पर नए ट्रांसपोर्ट नगर बनने से सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि किसी भी हाइवे से आने वाला सामान बॉर्डर पर ही लोड-अनलोड हो सकेगा। इन वाहनों को शहर के अंदर नहीं आना होगा और न बहोड़ापुर स्थित ट्रांसपोर्ट नगर तक का चक्कर लगाना होगा। ऐसे में व्यापारियों का बड़े वाहनों पर होने वाला अतिरिक्त ट्रांसपोर्टेशन खर्च बचेगा।
- ट्रक व मिनी ट्रक कई बार शहर की सड़कों पर आकर एक्सीडेंट कर देते हैं और जान-माल का नुकसान होता है। नए ट्रांसपोर्ट नगर बसने पर वहां से छोटी लोडिंग गाड़ियों में ही सामान बाजार तक लाया जाएगा। जिससे बड़ी दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा। इतना ही नहीं, शहर से सटी सड़कों पर शाम के बाद से ट्रकों की लंबी कतार लग जाती है और ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ती है। ये समस्या भी कम हो जाएगी।