10 VVIP सीटों की रिपोर्ट …. योगी की अयोध्या और मौर्या का प्रयागराज पांचवें में; अखिलेश की मैनपुरी तीसरे और शिवपाल का संभल दूसरे चरण में होंगे

यूपी में चुनाव की घोषणा हो चुकी है। पहला नोटिफिकेशन 14 जनवरी को मकर संक्राति पर जारी होगा। 10 फरवरी को पहले चरण के आगाज से पहले दिग्गज नेताओं के चुनावी क्षेत्र को लेकर कयास लगने लगे हैं। यूपी के टॉप-10 VVIP नेताओं की परंपरागत सीट बदलने के आसार भी बने हैं।

योगी आदित्यनाथ पहली बार विधानसभा चुनावी मैदान में होंगे। अखिलेश ने भी कह दिया है कि अगर पार्टी कहेगी तो चुनाव लड़ेंगे। सपा में अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल के साथ चुनाव मैदान में आने के बाद सीटों के बंटवारे के समीकरण बदल गए हैं।

आइए आपको बताते हैं कि टॉप के दिग्गज नेता संभावित किन सीटों से चुनावी मैदान में नजर आ सकते हैं…

1. योगी आदित्यनाथ, सीएम
यहां से लड़ सकते हैं चुनाव – अयोध्या
मौजूदा विधायक – वेदप्रकाश गुप्ता, भाजपा

ऐसा पहली बार होगा कि योगी विधानसभा चुनाव मैदान में होंगे।
ऐसा पहली बार होगा कि योगी विधानसभा चुनाव मैदान में होंगे।

योगी आदित्यनाथ का अयोध्या से लगाव
गोरखपुर से 5 बार सांसद रहे योगी आदित्यनाथ ने कभी भी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। योगी अयोध्या आंदोलन के दौरान भी अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ के साथ यहां आते रहे। सीएम बनने के बाद 32 से अधिक बार अयोध्या आ चुके हैं। योगी ने 15 फरवरी 1994 को नाथ संप्रदाय के सबसे प्रमुख मठ गोरखनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी के रूप में अपने गुरु महंत अवैद्यनाथ से दीक्षा ली थी। अयोध्या में राम मंदिर बनाना भाजपा का कोर एजेंडा था। जोकि पूरा भी हुआ। इसलिए इस सीट से योगी चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।

2. केशव मौर्या, डिप्टी सीएम

केशव प्रसाद मौर्य लगातार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।
केशव प्रसाद मौर्य लगातार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।

यहां से लड़ सकते हैं चुनाव – प्रयागराज शहर उत्तरी सीट मौजूदा विधायक – हर्षवर्धन बाजपेयी, भाजपा

सिराथू है परंपरागत, इस बार बदलाव की उम्मीद
केशव प्रसाद मौर्य यूपी विधान परिषद के सदस्‍य हैं। उन पर राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान भीड़ में हिंसा फैलाने का आरोप भी है। वह एक बेहद गरीब घर में बड़े हुए। बचपन में चाय बेचते थे। 2012 में सिराथू विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फूलपुर सीट से जीत दर्ज की।

2017 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया। यूपी के उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। सूत्र बता रहे हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव में वह प्रयागराज की शहर उत्तरी सीट से ताल ठोंकते हुए नजर आ सकते हैं। इसी सीट के ज्वाला देवी इंटर कालेज पोलिंग सेंटर पर वह वोटर भी हैं।

3. दिनेश शर्मा, डिप्टी सीएम
यहां से लड़ सकते हैं चुनाव – लखनऊ कैंट सीट
मौजूदा विधायक – सुरेश चंद्र तिवारी, भाजपा

2017 को उन्हें यूपी के दो उप मुख्यमंत्रियों में से एक के रूप में नियुक्त किया गया था।
2017 को उन्हें यूपी के दो उप मुख्यमंत्रियों में से एक के रूप में नियुक्त किया गया था।

कैंट से है दिनेश की सियासी पकड़
दिनेश शर्मा पेशे से लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे। 2006 में लखनऊ के मेयर के रूप में चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की सफलता में उनके योगदान के बाद, 16 अगस्त 2014 को वे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने। 19 मार्च 2017 को, उन्हें यूपी के दो उप मुख्यमंत्रियों में से एक के रूप में नियुक्त किया गया। वह उत्तर प्रदेश विधान सभा के निर्वाचित सदस्य नहीं हैं। वह 9 सितंबर 2017 को विधान परिषद (उच्च सदन) के लिए चुने गए। उन्हें उच्च और माध्यमिक शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी विभागों के मंत्रालय आवंटित किए गए थे। लखनऊ की कैंट सीट पर उनका सियासी पकड़ मानी जाती हैं।

4. स्वतंत्र देव सिंह, प्रदेश अध्यक्ष

माना जा रहा है कि उनके चुनाव में उतरने से बुंदेलखंड में संदेश अच्छा जाएगा।
माना जा रहा है कि उनके चुनाव में उतरने से बुंदेलखंड में संदेश अच्छा जाएगा।

यहां से लड़ सकते है चुनाव – कालपी (जालौन) मौजूदा विधायक – नरेंद्र पाल सिंह, भाजपा

बुंदेलखंड कर्मक्षेत्र है स्वतंत्र का
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वंत्र देव सिंह ने 2012 में कालपी से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। बुंदेलखंड का एंट्री गेट कहे जाने वाले जालौन की कालपी सीट बहुत अहम है। स्वतंत्र देव पहले भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। माना जा रहा है कि उनके चुनाव में उतरने से बुंदेलखंड में संदेश अच्छा जाएगा। उनका कर्मक्षेत्र भी बुंदेलखंड ही है। 1962 में इस निर्वाचन क्षेत्र का गठन हुआ। यहां के पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर शिवसंपत्ति शर्मा विधायक निर्वाचित हुए।

1967 में ही विधानसभा में मुलायम सिंह की पहली एंट्री थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर उमाकांति सिंह विधायक निर्वाचित हुईं। वहीं 2017 के चुनाव में बसपा के छोटे सिंह को हराकर बीजेपी के प्रत्याशी नरेंद्र पाल सिंह जादौन ने जीत हासिल की।

5.श्रीकांत शर्मा, ऊर्जामंत्री
यहां से लड़ सकते हैं चुनाव – गोवर्धन सीट
मौजूद विधायक – कारिंदा सिंह, भाजपा

श्रीकांत शर्मा मथुरा सीट से मौजूदा विधायक है।
श्रीकांत शर्मा मथुरा सीट से मौजूदा विधायक है।

सीएम की चर्चा के बाद गोवर्धन शिफ्ट हो सकते है श्रीकांत
श्रीकांत शर्मा मथुरा सीट से मौजूदा विधायक हैं। योगी कैबिनेट में ऊर्जा मंत्री हैं। चूंकि मथुरा सीट से भी योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने की चर्चाएं हैं। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि बदलाव होने पर श्रीकांत शर्मा गोवर्धन सीट से विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इस सीट की खास बात है कि यहां कभी एक पार्टी विशेष का प्रभुत्व नहीं रहा। कांग्रेस से लेकर जनता दल, राष्ट्रीय लोकदल, बहुजन समाज पार्टी, जनता पार्टी और बीजेपी के उम्मीदवार जीतते आए हैं। हालांकि बीजेपी अकेली ऐसी पार्टी है जो इस सीट पर लगातार तीन बार जीत दर्ज करने में कामयाब रही। 2017 से पहले बीजेपी ने 2002 में इस सीट पर आखिरी बार जीत दर्ज की थी।

6. अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सपा
यहां से लड़ सकते हैं चुनाव – मैनपुरी सदर
मौजूदा विधायक – राजकुमार उर्फ राजू यादव, सपा

योगी के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा के बाद अखिलेश ने भी कहा कि पार्टी तय करेगी तो वह भी चुनाव लड़ेंगे।
योगी के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा के बाद अखिलेश ने भी कहा कि पार्टी तय करेगी तो वह भी चुनाव लड़ेंगे।

सबसे सुरक्षित सीट है मैनपुरी
समाजवादी पार्टी का पावर सेंटर होने के कारण मैनपुरी उत्तर प्रदेश की सबसे अहम विधानसभा सीटों में से एक है। इस इलाके में सपा की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2017 में बीजेपी की जोरदार लहर होने के बावजूद सपा ने यहां से जीत दर्ज की थी। योगी के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा के बाद अखिलेश ने भी कहा कि पार्टी तय करेगी तो वह भी चुनाव लड़ेंगे। माना जा रहा है कि उनके चुनावी मैदान में आने के लिए मैनपुरी की सदर सीट सबसे सुरक्षित मानी जा रही है। उनके पिता मुलायम सिंह का संसदीय क्षेत्र मैनपुरी ही है।

7. शिवपाल यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रसपा
यहां से लड़ सकते हैं चुनाव – संभल
मौजूदा विधायक – इकबाल महमूद, सपा

इसी सुरक्षित सीट से शिवपाल के मैदान में उतरने की उम्मीद है। वह अपनी विधानसभा सीट जसवंतनगर को छोड़ सकते हैं।
इसी सुरक्षित सीट से शिवपाल के मैदान में उतरने की उम्मीद है। वह अपनी विधानसभा सीट जसवंतनगर को छोड़ सकते हैं।

बेटे के लिए शिवपाल छोड़ सकते हैं जसवंतनगर की सीट
संभल सपा का गढ़ माना जाता है। विधानसभा सीट पर इकबाल महमूद चुनाव मौजूदा विधायक हैं। वह 5 बार से लगातार से सीट से जीत रहे हैं। राजनीतिक दृष्टि से भी संभल काफी महत्वपूर्ण है। संभल की 3 विधानसभा सीटों में से 2 पर सपा का कब्जा है। इसी सुरक्षित सीट से शिवपाल के मैदान में उतरने की उम्मीद है। वह अपनी विधानसभा सीट जसवंतनगर को छोड़ सकते हैं। ये सीट भी सपा के कोर वोटर्स की मानी जाती है। इस सीट को शिवपाल अपने बेटे आदित्य यादव के लिए छोड़ने की चर्चा है।

8. अजय कुमार लल्लू, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
यहां से लड़ सकते हैं चुनाव – तमकुहीराज
मौजूदा विधायक – अजय कुमार मौजूद, कांग्रेस

मोदी लहर में भी तमकुहीराज की जनता ने उन्हें ही चुना। उन्होंने बड़े अंतर से भाजपा प्रत्याशी को हराया था।
मोदी लहर में भी तमकुहीराज की जनता ने उन्हें ही चुना। उन्होंने बड़े अंतर से भाजपा प्रत्याशी को हराया था।

अजय की सबसे सुरक्षित सीट है तुमकुहीरा
अजय यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। कुशीनगर की तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। 2012 में पहली बार विधायक चुने गए थे। तब उन्होंने भाजपा के नंद किशोर मिश्रा को हराया था। 2017 में भाजपा और मोदी लहर में भी तमकुहीराज की जनता ने उन्हें ही चुना। उन्होंने न केवल अपनी सीट बचाई, बल्कि 2012 चुनाव से भी ज्यादा बड़े अंतर से भाजपा प्रत्याशी को हराया था। इसलिए ये तय माना जा रहा है कि अजय एक बार फिर इसी सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे।

9. आराधना मिश्र ‘मोना’, विधायक कांग्रेस
यहां से लड़ सकती हैं चुनाव-रामपुर खास
मौजूदा विधायक – आराधना मिश्र, कांग्रेस

प्रियंका गांधी के चुनावी कमान संभालने के बाद आराधना का कद पार्टी में और बढ़ा है।
प्रियंका गांधी के चुनावी कमान संभालने के बाद आराधना का कद पार्टी में और बढ़ा है।

रामपुर खास से ही चुनाव मैदान में हो सकती है आराधना मिश्रा
प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट पर कांग्रेस का दबदबा पिछले 41 सालों से कायम है। 1980 के बाद से ही प्रमोद तिवारी इस सीट पर काबिज रहे। प्रमोद तिवारी इस सीट से 10 बार विधायक बने। उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया। अब मौजूदा वक्त में आराधना मिश्र यहां से विधायक हैं। वह दोबारा इसी सीट से चुनावी मैदान में हो सकती है। कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीट से वह चुनाव लड़ सकती हैं।

10. अरविंद सिंह ‘गोप’, पूर्व लोक निर्माण राज्यमंत्री
यहां से लड़ सकते हैं चुनाव – दरियाबाद
मौजूदा विधायक : सतीश चंद्र शर्मा, भाजपा

अरविंद सिंह 'गोप' 2007 में बाराबंकी के हैदरगढ़ सपा से चुनाव लड़ा था।
अरविंद सिंह ‘गोप’ 2007 में बाराबंकी के हैदरगढ़ सपा से चुनाव लड़ा था।

बाराबंकी में सियासी वर्चस्व रखते हैं..
अरविंद सिंह ‘गोप’ ने 2007 में बाराबंकी के हैदरगढ़ सपा से चुनाव लड़ा था। वह पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश ने गोप को बेनी के बेटे राकेश वर्मा की जगह तरजीह देते हुए रामनगर से लगातार दूसरी बार प्रत्याशी बनाया था। अरविंद कुमार सिंह को शरद अवस्थी से 2017 के चुनाव में हार मिली थी। अरविंद 14वीं विधानसभा के सदस्‍य उपचुनाव में पहली बार निर्वाचित हुए थे।

इसके बाद 2003 में मुलायम सिंह मंत्रिमंडल में राज्‍यमंत्री, लोक निर्माण रहे। इसके बाद 2007 में अरविंद दूसरी बार 15वीं विधानसभा के सदस्‍य चुने गए। अब बाराबंकी की ही दरियाबाद सीट से चुनाव लड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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