इन 6 वजहों से दिल्ली छोड़ यूपी में रहेंगे अखिलेश …
दोहराना नहीं चाहते पुरानी गलतियां, विधानसभा चुनाव नतीजों को देख लिया बड़ा फैसला…
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को अखिलेश यादव ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपना इस्तीफा सौंपा। चर्चा है कि अखिलेश यादव अब विपक्ष की कमान संभालेंगे। अखिलेश यादव 2019 लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ से सांसद चुने गए थे।
अखिलेश ने विधायकी को तवज्जो देकर बड़ी रणनीति की तरफ इशारा कर दिया है। वह भाजपा सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेर सकते हैं। आखिर क्या है रणनीति और अखिलेश ने विधायक पद क्यों चुना? आइए जानते हैं।

अखिलेश यादव की सांसद पद से इस्तीफे की 6 बड़ी वजह
1. अखिलेश यादव जब लोकसभा से सांसद थे तो उनका ज्यादातर वक्त दिल्ली में गुजरता था। कई बार लोगों ने उत्तर प्रदेश से दूरी बनाने के भी आरोप लगाए। ऐसे में वो इस बार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद यूपी की सियासत पर ध्यान देना चाहते हैं।
2. अखिलेश ने आजमगढ़ लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा चुनाव में इस बार समाजवादी पार्टी का आजमगढ़ की विधानसभा सीटों पर अच्छा प्रदर्शन रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव को भरोसा है कि अगर आजमगढ़ लोकसभा की सीट पर उप चुनाव हुए तो ये सीट फिर से समाजवादी पार्टी के खाते में ही जाएगी।
3. यूपी में इस बार अखिलेश यादव विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभा सकते हैं, ताकि बीजेपी सरकार को कई मुद्दों पर घेरकर पार्टी को बढ़त मिल सके।
4. 2017 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव केंद्र की राजनीति में कूद पड़े थे। जिसके बाद ऐसा माना गया कि उत्तर प्रदेश में विपक्ष कमजोर पड़ गया था। अखिलेश यादव फिर से वही गलती नहीं दोहराना चाहते हैं। आजम खान के विधानसभा सदस्य बने रहने से भी पार्टी को उनके अनुभव का फायदा पहुंचेगा।
5. उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सबसे ज्यादा 80 सीटें हैं। 2024 आम चुनाव को लेकर अखिलेश यादव यूपी में सियासी जमीन को मजबूत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
6. अखिलेश यादव यह भी जानते हैं कि इस चुनाव में बसपा से बड़ी संख्या में मतदाताओं से दूरी बना ली है। इसका सबसे बड़ा फायदा सपा को हुआ। अखिलेश को पता है कि बसपा और कमजोर हुई तो उसके वोटरों के पाला बदलने का सिलसिला और तेज होगा। ऐसे वक्त में सपा कमजोर रही तो बीजेपी को बड़ा फायदा हो सकता है।
अखिलेश मौके पर चौका मारने में बिल्कुल पीछे रहना नहीं चाहते, इसलिए उन्होंने फैसला किया कि अब यूपी में ही अड्डा जमाया जाए, ताकि बसपा से छिटक रहे मतदाताओं में यह साफ संदेश जाए कि उनका नया ठिकाना सपा ही है, ना कि वो इधर से भी मायूस होकर बीजेपी की शरण में चले जाएं।
लोकसभा में सपा सासंदों की संख्या तीन
अखिलेश यादव और आजम खान के इस्तीफे के बाद अगले छह महीने के अंदर दोनों लोकसभा सीट पर उपचुनाव होगा। दोनों नेताओं के सांसदी छोड़ने के बाद लोकसभा में अब सपा के सांसदों की संख्या तीन हो गई है। मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, मुरादाबाद से एसटी हसन और संभल से शफीकुर्रहमा बर्क लोकसभा में सपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
अखिलेश ने करहल से दर्ज की थी जीत
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने करहल सीट से चुनाव लड़ा था। अखिलेश ने बीजेपी के प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल को 66 हजार वोटों के अंतर से हराया था। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी अखिलेश के समर्थन में मैदान में उतरे थे। सपा गठबंधन को 125 सीटें मिले थीं, जबकि अखिलेश ने अपने दम पर 111 सीटें लाकर कर प्रदेश में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी।