शिक्षाविदों ने उठाए सवाल …? प्रदेश की 40 प्राइवेट यूनिवर्सिटी के ऑफ कैंपस सेंटर खोलने की तैयारी
हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट अब मप्र की करीब 40 प्राइवेट यूनिवर्सिटी को ऑफ कैंपस सेंटर खोलने की अनुमति देने की तैयारी कर रहा है। यानी यूनिवर्सिटी अपने कैंपस से हटकर अपना सेंटर संचालित कर सकती हैं। इसके लिए मप्र प्राइवेट यूनिवर्सिटी रेग्यूलेटरी कमीशन ने ड्राफ्ट तैयार करके शासन को भेज दिया है। इसके अनुसार अब प्राइवेट यूनिवर्सिटी प्रदेश में अपने 4 से 5 सेंटर शुरू कर पाएंगी।.
ऐसे में पूरे मप्र में लगभग 200 ऑफ कैंपस सेंटर शुरू हो जाएंगे। लेकिन शिक्षाविद इस नए ड्राफ्ट पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी को बढ़ावा देने में आपत्ति नहीं है, लेकिन इनकी निगरानी में सख्ती करनी होगी।
यह बात इसलिए भी उठ रही है कि बीते एक साल में दो प्राइवेट यूनिवर्सिटी की फैकल्टी को फर्जी मार्कशीट बनाने के मामले में कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले में हायर एजुकेशन के अफसरों का कहना है कि हमारे पास ड्राफ्ट आने के बाद निर्णय लेंगे कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी को अनुमति देना है कि नहीं।
इसलिए उठ रहे हैं सवाल
- हिन्दी यूनिवर्सिटी ने स्टडी सेंटर शुरू किए, लेकिन नियमों स्पष्टता नहीं रखी। जिसके कारण विवाद हुए।
- भोज यूनिवर्सिटी के स्टडी सेंटर में भी नाम मात्र के स्टूडेंट बचे हैं। भोपाल समेत कई शहरों में बंद करने की नौबत आई।
- 3 चरण के बाद भी सरकारी-निजी कॉलेजों की 4 लाख सीटें खाली।
- निजी कॉलेजों की सीट भरने के लिए हर साल अक्टूबर तक एडमिशन प्रक्रिया चलाई जाती है।
सरकारी विवि और कॉलेज में फेसिलिटी नहीं होगी तो प्राइवेट को मौका देना होगा। लेकिन मॉनिटरिंग बेहद सख्त होना चाहिए। सरकारी की तरह प्राइवेट पर पूरे समय निगरानी हो, ताकि छात्रों के साथ अन्याय नहीं हो। सीटें समय पर भरी जाएं।
अरुण गुर्टू, पूर्व कुलपति, जबलपुर यूनिवर्सिटी
ऑफ कैंपस सेंटर के ड्राफ्ट पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है। यदि लगेगा कि अनुमति देनी चाहिए तो ही देंगे। मॉनिटरिंग को भी लगातार सख्त कर रहे हैं।
शैलेंद्र सिंह, एसीएस, हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट