कलेक्टर ने 300 रुपए में ठेकेदार को दे दी सड़क !
कटनी कलेक्टर ने जिले की बरही तहसील के 3 गांवों की सड़क एक ठेकेदार को लीज पर दे दी। ठेकेदार उस रास्ते पर गिट्टी डंप करने लगा। इससे रास्ता बंद हो गया। ग्रामीण परेशान होने लगे।
ऐसी स्थिति में ग्रामीणों ने कलेक्टर से रास्ता खोलने का निवेदन किया। जब कुछ नहीं हुआ तो जनहित याचिका दायर की। पूरे मामले से हाईकोर्ट से अवगत करवाया। कोर्ट ने जिला प्रशासन को रोड खोलने के निर्देश दिए, फिर भी प्रशासन ने रोड नहीं खोला।
इसके बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और राज्य सरकार, कटनी कलेक्टर, ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को नोटिस जारी कर दिया था।
कोर्ट के निर्देश पर 10 नवंबर को कलेक्टर कटनी कलेक्टर और ठेकेदार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। साथ ही राज्य सरकार ने भी जवाब पेश किया है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि बंद रास्ते को खोल दिया जाए और उसे आगे भी खुला रहने दे।
खनन के बाद डंप करने के लिए किराए पर दी सड़क
दरअसल, कटनी जिले की बरही तहसील के करौंदी खुर्द, कन्नौर और बिचपुरा गांव तक जाने के लिए यह एकमात्र सड़क है। यहां से रोजाना सैकड़ों ग्रामीण तहसील और शहर आते-जाते हैं।
1 जुलाई 2025 को खनिज विभाग की रिपोर्ट पर कटनी कलेक्टर ने बरही तहसील के ग्राम कन्नौर स्थित खसरा नंबर 861 की लगभग 65 हेक्टेयर भूमि को लीज पर दे दिया। ठेकेदार तिलकराज ग्रोवर को महज 300 रुपए वार्षिक किराया चुकाना है।
सड़क का इस्तेमाल खनन के बाद डंप करने के लिए होता है। इस जमीन का इस्तेमाल स्थानीय ग्रामीण कई सालों से कच्ची सड़क के रूप में करते आ रहे हैं। राजस्व रिकॉर्ड में भी यह जमीन रास्ते के रूप में दर्ज है।
प्रशासन ने मनमाने तरीके से इस सड़क को डंपिंग साइट में बदलने की कोशिश की। इसके चलते ग्रामीणों की आवाजाही रुकी और वे विरोध करने लगे। इसकी कलेक्टर से लिखित शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिससे पीड़ित पक्ष को कोर्ट जाना पड़ा।

याचिकाकर्ता से रोड बंद करने के फोटो मंगाए
कटनी निवासी याचिकाकर्ता संदीप जायसवाल ने 16 सितंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में 27 सितंबर को सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से उस जगह के फोटो पेश करने के लिए कहा था, जहां से रोड बंद की गई है।
13 अक्टूबर को हुई अगली सुनवाई में कोर्ट ने तस्वीर देखते हुए जिला प्रशासन को रोड खोलने के निर्देश दिए। हालांकि, फिर भी प्रशासन ने रोड नहीं खोला। इस पर 4 नवंबर को अवमानना याचिका दायर की गई।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार, अक्षत अरजरिया और चिरंजीवी शर्मा ने कोर्ट को बताया कि जिला प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में आकर रोड को किराए पर दे दिया।
डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हुआ है, तो यह गंभीर अवमानना का मामला है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनी सार्वजनिक सड़क को किसी भी निजी कंपनी या व्यक्ति के हित में नहीं दिया जा सकता।

जवाब संतोषजनक नहीं तो होगी कार्रवाई
कोर्ट ने कहा था कि प्रशासनिक अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे जनता की संपत्ति की रक्षा करें, न कि उसे राजनीतिक प्रभाव में आकर सौंप दें। अब इस पूरे मामले में कलेक्टर और ठेकेदार को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।
कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ग्रामीणों को फिलहाल राहत मिली है, क्योंकि सड़क पर डंपिंग का काम पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

