स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ स्कूल वाहनों में सेफ्टी गार्ड नहीं; क्षमता से अधिक ढोए जा रहे बच्चे

यातायात पुलिस और स्कूल प्रबंधन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। बुधवार को कई स्कूली वाहनों, खासकर टैक्सियों में क्षमता से अधिक बच्चे भरे हुए पाए गए। इन वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य सेफ्टी गार्ड भी मौजूद नहीं थे। यह स्थिति शहर में बच्चों के असुरक्षित परिवहन को दर्शाती है।

निजी टैक्सियों में ठूंसकर ले जाए जा रहे स्कूली बच्चे
शहर के अधिकांश स्कूलों में बच्चों को घर से लाने-ले जाने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। समाजसेवी नवीन जैन ने बताया कि अभिभावकों को मजबूरी में निजी टैक्सी, वैन और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ता है। ये वाहन अक्सर क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर चलते हैं। पुष्पा स्कूल, डिफोडिल, एंजेल एवोड, संस्कार इंग्लिश मीडियम और सरोज कॉन्वेंट जैसे कई स्कूलों के बच्चे असुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंच रहे हैं।
पेरेंट्स ध्रुव मिश्रा के अनुसार, सरकारी और निजी स्कूल बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। निजी स्कूल मोटी फीस वसूलते हैं, लेकिन सुरक्षित परिवहन प्रदान करने में विफल हैं। अधिकांश स्कूलों के पास अपने वाहन नहीं हैं, जिससे बच्चे निजी टैक्सियों, वैन और ई-रिक्शा पर निर्भर रहते हैं।

ट्रैफिक पुलिस ने कहा- जल्द चलेगा चेकिंग अभियान
टैक्सी चालक अधिक कमाई के लालच में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाते हैं। अयोध्यापुरी कॉलोनी निवासी रवि खरे ने बताया कि कई टैक्सियों में 15 से 20 बच्चों को बैठाया जा रहा है। परिवहन और पुलिस विभाग ऐसे वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे बड़ी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
यातायात प्रभारी कैलाश पटेल ने इस संबंध में कहा है कि स्कूल वाहनों की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही एक विशेष अभियान चलाकर स्कूल वाहनों की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी।

