क्या नए लेबर लॉ के आने से बंद हो जाएंगे ट्रेड यूनियन?
Labour Codes 2025: क्या नए लेबर लॉ के आने से बंद हो जाएंगे ट्रेड यूनियन? सरकार ने किया साफ
सोशल मीडिया पर लेबर कोड को लेकर फैल रही गलत जानकारी पर PIB ने सफाई दी है. आइए डिटेल में समझते हैं कि असल में लेबर लॉ, ट्रेड यूनियन को लेकर क्या कहता है?
PIB फैक्ट चेक टीम ने अपने सोशल मीडिया X अकाउंट पर पोस्ट किया किया कि सोशल मीडिया पर यह चल रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा का दावा है कि नए लेबर कोड मजदूरों के लिए मिनिमम वेज और सोशल सिक्योरिटी पक्का करेंगे, जो बेबुनियाद है. 90 परसेंट मजदूर अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में हैं और इन कोड के दायरे से बाहर हैं. ये कोड मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने के अधिकार को खत्म करते हैं और हड़ताल करने पर सख्त शर्तें लगाते हैं. ये दावे झूठे हैं.
It is circulating on social media that Samyukt Kisan Morcha claims that:
▪️The new labour codes will ensure minimum wages and social security for workers are unsubstantiated
▪️90 per cent of workers are in the unorganised sector and out of the ambit of these codes.
▪️The pic.twitter.com/TJA4JcQ2Jn
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) November 25, 2025
ये है सच्चाईनए लेबर नियम के मुताबिक, कर्मचारियों को कुछ जरूरी सुविधाएं मिलेंगी जैसे कि मिनिमम वेज सभी सेक्टर के सभी कर्मचारियों पर लागू होगा. नेशनल फ्लोर वेज यह पक्का करता है कि कोई भी राज्य तय फ्लोर से कम मिनिमम वेज तय नहीं कर सकता है. इसके अलावा पहली बार, ऑर्गनाइज्ड और अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर के सभी मजदूरों को सोशल सिक्योरिटी फ्रेमवर्क के तहत कवर किया गया है, जिसमें गिग, प्लेटफॉर्म और घरेलू मजदूर शामिल हैं.साथ ही ट्रेड यूनियनों को बातचीत करने वाली काउंसिल के तौर पर कानूनी पहचान दी गई है. ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार बना रहेगा. हफ्ते में चार दिन तक 12 घंटे काम करने की सुविधा दी जाती है, बाकी तीन दिन पेड छुट्टियां होती हैं.

