महिला अपराधों पर लगाम नहीं…14 जिलों में एक फीसदी भी महिला अफसर नहीं ????
महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर मप्र में हालात नहीं सुधर रहे हैं। साल 2021 में महिला अपराधों के 30,673 मामले सामने आए थे। 2024 में ये आंकड़ा 33,203 पर पहुंच गया। यानी 8.25% की बढ़ोतरी। ऐसे अपराध रोकने के लिए सरकार और पुलिस के स्तर पर तमाम कदम उठाने के दावे किए गए, लेकिन ये कारगर नहीं हो पाए। निर्भया मोबाइल वैन सड़कों से गायब है तो स्कूल-कॉलेज के पास पुलिस बूथ खाली पड़े हैं।
अफसरों का तर्क है, मैदान में महिला पुलिस अफसरों (डीएसपी से एएसआई) की कमी है, लेकिन हकीकत यह है कि इनकी संख्या बढ़ाने के ईमानदार प्रयास नहीं हुए। भिंड, श्योपुर, आगर, नीमच, पांढुर्ना, निवाड़ी, उमरिया आदि 14 जिले ऐसे हैं, जहां महिला पुलिस अफसर(ASI से DSP तक) अपनी कुल संख्या का 1% भी नहीं हैं। महिला अपराधों में इनके पास ही जांच होती है।
- ASI से DSP स्तर तक की महिला अफसरों की कमी, महिला अपराधों की जांच का जिम्मा इन्हीं पर
- प्रयास बेदम… निर्भया मोबाइल वैन गायब, कॉलेज कोचिंग के पास बने पुलिस बूथ खाली
ये है महिला अपराध रोकने उठाए गए कदम और उनकी हकीकत

ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क : 31 मार्च 2021 को शुरुआत। अभी थानों में 987 डेस्क संचालित हैं। इनमें 751 महिला अधिकारी पदस्थ हैं।
हकीकत : अधिकतर महिला सब इंस्पेक्टर पर 4-4 थानों का लोड है। पीड़िताएं इनका इंतजार करती रहती हैं।
निर्भया फंड: मप्र पुलिस को करीब 15 करोड़ रुपए मिले। सुरक्षा और पीड़िताओं की सहायता पर खर्च होना थे।
हकीकत: महिला अपराधों में तत्काल मदद के लिए इस फंड से 250 स्कूटी खरीदी गईं। ऊर्जा डेस्क का स्टाफ इनका उपयोग करता है। हालांकि जिस तरह के रिस्पॉन्स की जरूरत थी, वैसा नहीं मिल रहा है। पिछले 2 साल से मप्र को निर्भया फंड ही नहीं मिला है।
पैनिक बटन: पब्लिक व्हीकल में महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन लगाना थे।
हकीकत– अधिकतर वाहनों में लगे पैनिक बटन काम ही नहीं करते। कई वाहनों में डमी बटन लगाए गए हैं।
हम होंगे कामयाब: संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए। ऐसी जगह सादा कपड़ों में पुलिस बल, निर्भया मोबाइल वैन की तैनाती हुई। कोचिंग-कॉलेजों के पास पुलिस बूथ बनाए गए।
हकीकत : अब ज्यादातर जगह ये बूथ खाली दिखाई देते हैं। निर्भया मोबाइल वैन सड़कों से गायब है।

मप्र में मैदानी अमले में 1200 महिला अधिकारी
थानों में डेढ़ साल से बंद परिवार परामर्श केंद्र महिला थानों में चलने वाले परिवार परामर्श केंद्र डेढ़ साल से बंद हैं। घरेलू हिंसा और पति-पत्नी के विवाद इन केंद्रों के माध्यम से सुलझ जाते थे।
यहां कम अफसर

महिला सुरक्षा के लिए कई अभियान चल रहे
महिला सुरक्षा के लिए कई अभियान चलाए जा रहे हैं। ऑपरेशन मुस्कान में बालिकाओं की दस्तयाबी बड़े स्तर पर हो रही है। -अनिल कुमार, स्पेशल डीजी महिला सुरक्षा

