भोपाल में 99 प्रतिशत शुद्ध पानी सप्लाई का दावा, हकीकत में नालियों में बिछी है मौत की लाइन
जोन 11 वार्ड 41 के बाग फरहत अफजा में नालियों के अंदर से इस तरह पीने के पानी की पाइपलाइनें गुजरी हुईं हैं। इनसे दूषित पानी घरों में पहुंच सकता है। कई इलाकों में हैं ऐसे ही हालात।- शहर के इतवारा, बुधवारा, बाग फरहत अफजा, गैस राहत बस्ती की तंग बस्तियों में हालात खौफनाक
- पाइपलाइनें नालियों के ऊपर और किनारों पर मकड़जाल की तरह फैली हैं, इनमें जंग लग गया है
- नाली का पानी पाइप में आने से क्लोरिनेशन की तय मात्रा भी संक्रमण को रोकने में नाकाम रहती है
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई आठ मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है, लेकिन राजधानी भोपाल का नगर निगम प्रशासन अब भी कागजी दावों के भरोसे है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन का दावा है कि शहर का 99 प्रतिशत वाटर डिस्ट्रब्यूशन नेटवर्क पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन ग्राउंड जीरो की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। पुराने शहर के दर्जनों इलाकों में आज भी पीने के पानी की पाइपलाइनें नाले और बजबजाती नालियों के ऊपर और किनारे से होकर गुजर रही हैं। यह वही स्थिति है जिसने इंदौर में मासूमों की जान ली ।
सक्शन का खतरा : जब सप्लाई बंद होती है, तो पाइपलाइन में वैक्यूम बनता है। नालियों में डूबे हुए लीकेज पाइंट्स गंदा पानी सोख लेते हैं।
मकड़जाल : घरों तक पहुंचने वाले निजी कनेक्शन की पाइपलाइनें नालियों के ऊपर और किनारों पर मकड़जाल की तरह फैली हैं, जिनमें जंग लग चुका है।
क्लोरिन भी बेअसर : विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाइप के भीतर सीधे नाले का पानी प्रवेश कर जाए, तो क्लोरिनेशन की तय मात्रा भी संक्रमण को रोकने में नाकाम रहती है।
बड़ा सवाल : क्या अगले हादसे का इंतजार हैनिगम प्रशासन कह रहा है कि पुराने शहर में पाइपलाइन बदली जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि कब? इंदौर की घटना यह बताने के लिए काफी है कि जलप्रदाय में एक प्रतिशत की चूक भी जानलेवा साबित होती है। ऐसे में भोपाल नगर निगम का सब चंगा है वाला रवैया किसी बड़ी लापरवाही का संकेत तो नहीं।
भोपाल में जल वितरण का नेटवर्क काफी विस्तृत है, लेकिन यह दो बिल्कुल अलग दुनियाओं में बंटा हुआ है। एक तरफ नया भोपाल है जहां बुनियादी ढांचा आधुनिक है, वहीं दूसरी तरफ पुराना भोपाल है जहां नेटवर्क दशकों पुराना और जर्जर हो चुका है।

नान-रेवेन्यू वाटर : भोपाल में लगभग 16 से 20 प्रतिशत पानी उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही लीकेज या चोरी की वजह से बर्बाद हो जाता है । यही लीकेज पाइंट्स प्रदूषण के प्रवेश द्वार हैं।
सक्शन थ्योरी : पुराने शहर में जब पानी की सप्लाई बंद होती है, तो पाइप खाली होने पर बाहरी गंदगी नाली का पानी अंदर खींच लेते हैं। अगले दिन सप्लाई शुरू होते ही वही दूषित पानी घरों में पहुंचता है।
जीआई पाइपलाइन का मुद्दा : निगमायुक्त ने जीआई पाइप की बात की है, लेकिन पुराने शहर की गलियां इतनी तंग हैं कि वहां बड़ी मशीनें ले जाना और पूरी लाइन बदलना एक बड़ी चुनौती है ।
शहर में सैंपलिंग बढ़ा दी गई है
इंदौर की घटना के बाद भोपाल में जलप्रदाय व्यवस्था को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पानी की शुद्धता के लिए क्लोरिन गैस का उपयोग किया जा रहा है और शहर भर में सैंपलिंग की संख्या बढ़ा दी गई है। जीआई पाइप लाइन के जरिए पुराने नेटवर्क को बदला जाएगा। – संस्कृति जैन, आयुक्त, भोपाल नगर निगम

