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बेटे को स्कूल में बुली करते हैं…हिम्मत से जवाब देना कैसे सिखाएं !!!!

बेटे को स्कूल में बुली करते हैं:वह गुमसुम रहने लगा है, उसे बुलिंग का सामना करना, हिम्मत से जवाब देना कैसे सिखाएं

सवाल- मैं पुणे से हूं। मेरा 8 साल का बेटा क्लास 2 में पढ़ता है। पिछले कुछ दिनों से मैंने नोटिस किया है कि वह स्कूल से आने के बाद बहुत अपसेट रहता है, बहुत शांत रहने लगा है। मेरे बहुत पूछने पर उसने बताया कि स्कूल में बच्चे उसे बहुत चिढ़ाते हैं, अनाप-शनाप बोलते हैं और खेल में भी शामिल नहीं करते हैं।

वह स्कूल में शिकायत करने से डरता है। उसे लगता है कि अगर उसने टीचर या मैनेजमेंट से कहा तो खराब तरीके से ट्रीट किया जाएगा। मैं जानना चाहती हूं कि अपने बच्चे को क्या सिखाऊं कि वह बुली के शब्दों से टूटे नहीं और सही जवाब दे सके।

उसे स्कूल बुलिंग का सामना करना कैसे सिखाएं? किस स्थिति में स्कूल मैनेजमेंट से शिकायत करनी जरूरी है? कृपया मार्गदर्शन करें।

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- आपकी चिंता जायज है। स्कूल बुलिंग बच्चे की इमोशनल हेल्थ, सेल्फ-कॉन्फिडेंस, सोशल स्किल्स और यहां तक कि एकेडमिक परफॉर्मेंस पर भी गहरा असर डालती है। 6–12 साल की उम्र के बच्चे बुलिंग से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसी उम्र में वे ये समझते हैं कि दुनिया की नजर में उनकी छवि क्या है और वे स्वयं को किस तरह देखते हैं। हालांकि सही पेरेंटिंग और सपोर्ट से बच्चे इसे आसानी से हैंडल कर लेते हैं।

इसके लिए पेरेंट्स को चाहिए कि बच्चे को ऐसे जवाब सिखाएं, जो बिना लड़ाई के उनकी हिम्मत बढ़ाएं। तार्किक जवाब बच्चे को यह महसूस कराते हैं कि वह गलत नहीं है। साथ ही उन्हें सीख मिलती है कि बिना गुस्सा किए अपनी जगह बनाई जा सकती है। बुलिंग से निपटने का पहला तरीका कम शब्दों में शांत, स्पष्ट और कॉन्फिडेंट जवाब देना है। नीचे दिए ग्राफिक से बुली के संभावित शब्दों के सटीक जवाब समझिए-

  

हालांकि यहां समझने वाली बात ये है कि आपका बेटा बुली होने के बावजूद आपसे ये सब छिपा रहा था। इसका मतलब है कि वह आपसे भी इनसिक्योर फील करता है। जब बच्चे घर में सुरक्षित फील करते हैं, तभी वे आउटसाइड दुनिया को संभालना सीखते हैं।

आइए, अब स्कूल बुलिंग के बारे में विस्तार से समझते हैं…

स्कूल बुलिंग क्या है?

अक्सर पेरेंट्स या टीचर छोटी-छोटी बदमाशियों और बुलिंग को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। बुलिंग एक रिपीटेड, इरादतन और पावर इम्बैलेंस वाला व्यवहार है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

स्कूल बुलिंग के संभावित कारण

स्कूल बुलिंग का शिकार होने वाले बच्चों में कुछ कॉमन फैक्टर्स पाए जाते हैं। कई बार बच्चा खुद को अलग, असुरक्षित या कमजोर महसूस करता है। कुछ बच्चे नए माहौल में एडजस्ट नहीं कर पाते, जबकि कुछ का स्वभाव ही ऐसा होता है कि वे अपने लिए खड़े नहीं हो पाते। इन कारणों को पहचानना जरूरी है, ताकि उन्हें जल्दी सपोर्ट दें सकें।

स्कूल बुलिंग का बच्चे पर प्रभाव

बुलिंग बच्चे की इमोशनल हेल्थ, पढ़ाई, और सोशल लाइफ को धीरे-धीरे अंदर से तोड़ देती है। बच्चा खुद को असुरक्षित, असहाय और अकेला महसूस करने लगता है। उसका आत्मविश्वास कमजोर पड़ता है और वह छोटी-छोटी बातों से भी डरने लगता है। इसलिए समय रहते बुलिंग के संकेतों को पहचानना जरूरी है।

बच्चे को बुलिंग से निपटना सिखाएं

बच्चा तभी बुलिंग का सामना करना सीखता है, जब पेरेंट्स उसे सुरक्षित और सपोर्टेड महसूस कराते हैं। उसे यह समझाने की जरूरत होती है कि वह कमजोर नहीं है। बस उसे सही तरीके से खुद को व्यक्त करना, सीमाएं तय करना और जरूरत पड़ने पर मदद मांगना सिखाना है।

छोटी-छोटी स्किल्स जैसे स्ट्रॉन्ग-वॉइस, आंखों में देखकर बात करना और रोल-प्ले के जरिए जवाब देना बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं। साथ ही पेरेंट्स का शांत रहना, तुलना न करना और बच्चे को दोष न देना भी उसकी हिम्मत बनाने में मदद करता है। नीचे दिए ग्राफिक बुलिंग मैनेजमेंट के टिप्स समझिए-

किस स्थिति में स्कूल में शिकायत करना जरूरी

जब बुलिंग बच्चे की सुरक्षा, मेंटल हेल्थ या रोजमर्रा की पढ़ाई को प्रभावित करने लगे, तब स्कूल मैनेजमेंट से शिकायत करना जरूरी हो जाता है। अगर बच्चा अक्सर रोकर आता है, उसके शरीर पर चोट के निशान हैं, उसने दोस्तों से दूर रहना शुरू कर दिया है, स्कूल जाने से डरता है तो यह संकेत है कि मामला बुली से आगे बढ़ चुका है। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को क्लास टीचर, कोऑर्डिनेटर या स्कूल काउंसलर से तुरंत बात करनी चाहिए।

अंत में यही कहूंगी कि आपका आप बच्चे के लिए सबसे मजबूत सपोर्ट सिस्टम हैं। आपकी प्रतिक्रिया, उसकी भावनाओं को महत्व देना, स्कूल से बातचीत और घर पर कम्युनिकेशन स्किल्स का अभ्यास, ये चार चीजें मिलकर उसे कॉन्फिडेंट बनाने में मदद करेंगी। साथ ही जल्द ही वह स्कूल बुलिंग से खुद निपटना सीख जाएगा।

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