PMAY के नाम पर घोटाला: 69 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा, ED का बड़ा एक्शन
PMAY के नाम पर घोटाला: 69 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा, ED का बड़ा एक्शन
प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत सस्ते घर दिलाने के नाम पर हुए बड़े घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है. ED की अब तक की जांच में 69.02 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का खुलासा हुआ है.

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत सस्ते घर दिलाने के नाम पर हुए बड़े घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है. ED ने 9 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट (PMLA स्पेशल कोर्ट), नई दिल्ली में M/s Ocean Seven Buildtech Pvt. Ltd. के प्रमोटर स्वराज सिंह यादव और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.
यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर की गई है. एफआईआर में गुरुग्राम में PMAY के तहत शुरू की गई अफोर्डेबल हाउसिंग परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और वित्तीय घोटाले के आरोप लगाए गए थे.
सैकड़ों होम बायर्स और निवेशकों ठगे करोड़ों रुपये
शिकायतों के मुताबिक, सैकड़ों होम बायर्स और निवेशकों ने अपना जीवनभर की कमाई इस उम्मीद में निवेश की थी कि उन्हें सस्ते दामों पर समय पर घर मिलेगा. लेकिन हकीकत यह रही कि करोड़ों रुपये इकट्ठा होने के बावजूद आज तक एक भी घर डिलीवर नहीं किया गया, जिससे कई परिवार आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव में फंस गए. ED की जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया. इन पैसों से महंगी संपत्तियां खरीदी गईं और लग्जरी खर्च किए गए. जांच में यह भी सामने आया कि शेल कंपनियों के जाल के जरिए पैसे को घुमाया गया ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके.
69.02 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का खुलासा
इतना ही नहीं, कई मामलों में वैध अलॉटमेंट को अवैध तरीके से रद्द किया गया और उन्हीं फ्लैट्स को बाद में ऊंचे दामों पर दोबारा बेचा गया. कुछ सौदों में कानूनी कीमत से ज्यादा रकम नकद में भी ली गई. घर खरीदारों को डिफॉल्टर दिखाने के लिए फर्जी और जाली दस्तावेज तक तैयार किए गए. ED की अब तक की जांच में 69.02 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (Proceeds of Crime) का खुलासा हुआ है. ED ने साफ किया है कि मामले में जांच अभी जारी है और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अन्य आरोपियों व कंपनियों को भी जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाएगा.
कई कंपनियों में लगाया पैसा
एजेंसी का कहना है कि यह रकम आगे और बढ़ सकती है. इस पैसे को M/s KTP Infratech Pvt. Ltd. समेत कई कंपनियों के जरिए घुमाकर जमीन, होटल, रिसॉर्ट, ऑफिस स्पेस और अन्य संपत्तियों में लगाया गया. जांच के दौरान 13 नवंबर 2025 को दिल्ली और गुरुग्राम में कई ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और 86 लाख रुपये नकद बरामद किए गए.
आरोपी बिल्डर को स्वराज को 13 नवंबर को पकड़ा
ईडी ने बताया कि इसके बाद 05 जनवरी 2026 को 51.57 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया. इन संपत्तियों में गुरुग्राम, हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित विला, होटल-रिसॉर्ट, ऑफिस, जमीन और बैंक बैलेंस शामिल हैं. ED की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी देश से बाहर भागने की कोशिश कर रहा था और अपनी संपत्तियां बेचने की तैयारी में था. इसे देखते हुए उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया. स्वराज सिंह यादव को 13 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था, और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है.

