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2019 का ज‍िक्र और राष्ट्रपति का ‘खुला ऐलान’, ईरान में क्‍या होने जा रहा?

नरसंहार का डर, 2019 का ज‍िक्र और राष्ट्रपति का ‘खुला ऐलान’, ईरान में क्‍या होने जा रहा?

ईरान में 60 घंटे से इंटरनेट ठप है और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने प्रदर्शनकारियों को आतंकी और गला काटने वाले बताकर सुरक्षा बलों को खुली छूट दे दी है. यह मंजर ईरानियों को 2019 के उस ‘खूनी नवंबर’ की याद दिला रहा है, जब इसी तरह अंधेरे की आड़ में सरकार ने 1,500 लोगों को गोलियों से भून दिया था.

नरसंहार का डर, 2019 का ज‍िक्र, राष्ट्रपति का खुला ऐलान, ईरान में क्‍या हो रहा?
ईरान के मशहद शहर में कुछ इस तरह रव‍िवार को भी बवाल जारी रहा. (Reuters)
ईरान में क्‍या अब नरसंहार होगा? क्‍या प्रदर्शनकार‍ियों का कत्‍लेआम होगा? यह सवाल इसल‍िए क्‍योंक‍ि प्रदर्शनकार‍ियों का दावा है क‍ि अब अगर वे पीछे हटे तो उन्‍हें मार द‍िया जाएगा. इसील‍िए सरकार ने इंटरनेट बंद कर द‍िया है और फोन लाइनें काट दी गई हैं.पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां से वापसी का रास्ता खूनी दिखाई दे रहा है. एक तरफ दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन नरसंहार की चेतावनी दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने देश के नाम संबोधन में जो कुछ कहा, उससे डर और बढ़ गया है. लेकिन इन सबके बीच 2019 के उस ‘खूनी नवंबर’ का ज‍िक्र क्‍यों हो रहा है?
60 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, ईरान में इंटरनेट का ‘ब्लैकआउट’ है. 8 करोड़ लोग बाहरी दुनिया से कट चुके हैं. लेकिन इस अंधेरे के बीच से जो धुंधली तस्वीरें और चीखें बाहर आ रही हैं, वे बताती हैं कि तेहरान की सड़कों पर कुछ बहुत भयानक घट रहा है. मुर्दाघरों में शवों की पहचान के लिए लंबी कतारें हैं, अस्पतालों में खून खत्म हो चुका है, और अब राष्ट्रपति ने इसे ‘विदेशी आतंकवाद’ बताकर सुरक्षा बलों को खुली छूट दे दी है.
आतंकी बताने पर तुली सरकार
अब तक नरम रुख वाले नेता माने जा रहे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का रविवार को आया बयान बेहद चौंकाने वाला और आक्रामक है. उन्होंने प्रदर्शनकारियों के प्रति नरमी दिखाने के बजाय उन्हें सीधे तौर पर विदेशी एजेंट और हत्यारा घोषित कर दिया है. तेहरान टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेज़ेशकियन ने दावा किया कि इजरायल के साथ हुए युद्ध का असली मकसद ईरान को इसी अराजकता में धकेलना था. उन्होंने कहा, दुश्मनों ने देश के भीतर और बाहर लोगों को ट्रेनिंग दी है. उन्होंने विदेशों से आतंकवादियों को ईरान में दाखिल कराया है. ये वो लोग हैं जिन्होंने रश्त (Rasht) में बाजारों को जला दिया, मस्जिदों में आग लगा दी. ये आम लोग नहीं हैं. इन्होंने लोगों के गले काटे हैं, लोगों को जिंदा जलाया है और मशीनगनों से हत्याएं की हैं.
क्‍यों इस बयान के मायने खास
  • राष्ट्रपति का यह बयान कि प्रदर्शनकारी “गला काट रहे हैं”- बेहद खतरनाक माना जा रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि सरकार प्रदर्शनकारियों को ISIS जैसा क्रूर मानने लगी है ताकि जब सेना उन पर टैंक चढ़ाए या गोलियां बरसाए, तो उसे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बताकर जायज ठहराया जा सके.
  • पेजेशकियन ने अमेरिका और इजरायल पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा, वे इन दंगाइयों से कह रहे हैं क‍ि तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे पीछे हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि राष्ट्रपति ने अपने समर्थकों से आह्वान किया है कि वे मोहल्लों में इकट्ठा हों और इस अराजकता को रोकें. यह सीधे तौर पर गृहयुद्ध का न्योता है, जहां नागरिक ही नागरिक से भिड़ेंगे.
Smoke rises as protesters gather amid evolving anti-government unrest at Mashhad, Razavi Khorasan Province, Iran, in this screengrab obtained from a social media video released on January 10, 2026. SOCIAL MEDIA/via REUTERS  THIS IMAGE HAS BEEN SUPPLIED BY A THIRD PARTY. NO RESALES. NO ARCHIVES. NEWS USE ONLY.  Verification lines : Reuters was able to confirm the location of the video from the position of the bridge and fencing which matched file imagery of the area. The date could not be independently verified.
ईरान के मशहद शहर में देर रात हजारों की संख्‍या में लोग सड़कों पर नजर आए. (Reuters)
नरसंहार की बातें क्यों हो रही हैं?
  1. इंटरनेट ब्लैकआउट का खूनी इतिहास: ईरान में जब भी इंटरनेट पूरी तरह बंद होता है (जैसा कि अभी 60 घंटों से है), उसका मतलब होता है कि सरकार कुछ ऐसा करने जा रही है जिसे वह दुनिया को नहीं दिखाना चाहती. नवंबर 2019 में भी पेट्रोल की कीमतों को लेकर प्रदर्शन हुए थे. सरकार ने इंटरनेट बंद किया और तीन दिनों के भीतर 1,500 से ज्यादा लोगों को गोलियों से भून दिया. नेटब्लॉक्स ने पुष्टि की है कि ईरान अब डिजिटल अंधेरे में है. मानवाधिकार समूहों को डर है कि इस अंधेरे की आड़ में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स वही 2019 वाला कत्लेआम दोहरा रहे हैं.
  2. आंखों में गोलियां मारने की रणनीति: अमेरिका स्थित ‘सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान’ और डॉक्टरों की रिपोर्ट बताती है कि सुरक्षा बल भीड़ को तितर-बितर करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें अपंग बनाने के लिए फायर कर रहे हैं. अस्पतालों से लीक हुई रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के चेहरे और आंखों पर बर्डशॉट (छर्रे) मारे गए हैं. यह एक सुनियोजित क्रूरता है. कई वीडियो में देखा गया है कि सुरक्षा बल सीधे सिर और छाती पर निशाना लगा रहे हैं.
  3. मौत के आंकड़ों में भारी अंतर और मुर्दाघर: नॉर्वे स्थित ‘ईरान मानवाधिकार’ संगठन का दावा है कि मरने वालों की संख्या 192 के पार जा चुकी है. वहीं, HRANA का कहना है कि यह आंकड़ा 203 है, जिसमें 41 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में तेहरान के एक मुर्दाघर में शवों का ढेर दिखाया गया है, जहां परिजन रोते-बिलखते अपने बच्चों को पहचान रहे हैं. सरकार इन आंकड़ों को छुपा रही है और इसे फेक न्यूज बता रही है, जो अपने आप में संदेह पैदा करता है.
क्‍या हो सकता है…देखें ये 3 सिनेरियो
1979 जैसी क्रांति, लेकिन ज्यादा खून-खराबे वाली प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व इस बार जनरेशन Z और स्कूली बच्चे कर रहे हैं, जिन्हें मौत का डर नहीं है. वे खामेनेई मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं और धार्मिक प्रतीकों जैसे मस्जिदों और मदरसों को जला रहे हैं. अगर यह आंदोलन सेना के निचले स्तर के जवानों को प्रभावित करने में सफल रहा और सेना में फूट पड़ गई, तो इस्लामिक रिपब्लिक का पतन हो सकता है.
सीरिया जैसा गृहयुद्ध. राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने अपने समर्थकों बासिज मिलिशिया को मोहल्लों में उतरने को कहा है. उधर, प्रदर्शनकारी भी पुलिस थानों से हथियार लूट रहे हैं जैसा कि 37 सुरक्षाकर्मियों की मौत से पता चलता है. अगर दोनों तरफ से हथियार चले, तो ईरान सीरिया बन सकता है. रश्त और मशहद में हुई आगजनी और सुरक्षाकर्मियों की हत्याएं इसी दिशा में इशारा कर रही हैं. यह एक लंबा और विनाशकारी संघर्ष होगा.
‘खूनी शांति’, सबसे प्रबल आशंका यह है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे. वे टैंकों और भारी मशीनगनों का इस्तेमाल कर हजारों लोगों को मार डालेंगे. इंटरनेट हफ्तों तक बंद रहेगा. हजारों लोगों को ईश्वर के खिलाफ युद्ध के आरोप में सामूहिक फांसी दी जाएगी. सरकार फिर से नियंत्रण तो पा लेगी, लेकिन यह खूनी शांति होगी जो एक ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठी होगी.

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