मुख्य सचिव बोले-राजस्व मामलों की हर माह होगी मॉनिटरिंग !!!

जिलों में छोटी-बड़ी शिकायतों को यदि टाइम बाउंड (तय समय) प्रक्रिया से हल किया जाए तो 90% शिकायतें खत्म हो जाएंगी। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने जिलों में भ्रष्टाचार के बारे में पूछने पर यह बात कही।
उन्होंने जोड़ा कि मुख्यमंत्री और उनकी मंशा रही कि जिलों से जो शिकायतें शासन स्तर पर आ रही हैं, उनमें बड़ा कारण समय ही है। टाइम से सारी चीजों का निपटारा होना चाहिए। कलेक्टर-एसपी के साथ बुधवार की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी यही मंशा थी। कुछ जगहों पर लोगों को भ्रम हुआ, लेकिन मध्य प्रदेश में अधिकतर काम कलेक्टर के नेतृत्व में समस्त अधिकारी और कर्मचारी ही करते हैं। इसी कारण मप्र अधिकतर मामलों में अग्रणी राज्यों में रहता है।
जिलों में राजस्व के ज्यादातर मामले नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन से ही जुड़े रहते हैं। सीमांकन में मंडला, छतरपुर और अशोक नगर जिलों ने अच्छा काम किया। मैहर और सीधी काफी पीछे हैं। बंटवारे के केसों में मंडला और बड़वानी बेहतर हैं, तो पीछे सागर और रीवा हैं। नामांतरण में भी हरदा, बड़वानी, दतिया, बालाघाट, मुरैना और खंडवा आगे हैं। दमोह और सीधी पीछे हैं। ये काम सीधे जनता से जुड़े हैं। इन्हें समय पर करना चाहिए। इनके लिए 45 दिन से लेकर 180 दिन तय हैं।
मध्य प्रदेश ने लोकसेवा गांरटी अधिनियम बनाकर एक यूनीक पहल की थी। इसके साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बनाया। इसकी मॉनिटरिंग से ही ये आंकड़े सामने आए। अब इसकी हर माह मॉनिटरिंग की जाएगी। सीएस के मुताबिक नागरिकों को सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एमपी-ई सेवा वेब पोर्टल एवं मोबाइल एप एक नवंबर 2025 से शुरू हो गया है। वर्तमान में लगभग 600 विभागीय सेवाओं को सफलतापूर्वक एकीकृत किया जा चुका है।
सभी जिलों के अधिकारी अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझें
कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में सभी जिलों के अधिकारियों को यही कहा है कि वे जिम्मेदारी समझें। कॉन्फ्रेंस पांच प्रमुख विषयों से जुड़ी थी, इसमें कानून व्यवस्था, सुशासन, कृषि और संबंधित क्षेत्र, स्वास्थ्य व पोषण और नगरीय विकास शामिल है। यही ऐसे विभाग हैं जिनका लोगों पर सीधा असर होता है।
