रॉयल हेरिटेज बिल्डर के जीशान अली पर EOW ने दर्ज की FIR !
- सहकारी संस्था के नाम पर निजी मुनाफा, वर्षों तक ऑडिट भी नहीं कराया; धोखाधड़ी, जालसाजी व आपराधिक षड्यंत्र का केस दर्ज
सहकारी गृह निर्माण समिति की जमीन में सुनियोजित तरीके से किए गए बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) से स्वीकृत ले-आउट में पार्क, ओपन स्पेस, मंदिर और ट्रांसफार्मर के लिए आरक्षित जमीन को फर्जी नक्शे बनाकर प्लॉट दर्शाया गया और उनकी रजिस्ट्री कर दी गई।
ईओडब्ल्यू ने मामले में रॉयल हेरिटेज बिल्डर कॉलोनाइजर से जुड़े जीशान अली, उसके ससुर एमएस बख्श, स्व. मवासी राम सिंह और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का प्रकरण दर्ज किया है।
ईओडब्ल्यू में 10 दिसंबर 2025 को दीपक शुक्ला ने इस मामले की शिकायत की थी। जांच में सामने आया कि पिपलानी क्षेत्र की नरेला शंकर गृह निर्माण सहकारी समिति की कमला नगर स्थित 17.28 एकड़ जमीन में टीएनसीपी से अप्रूव्ड मूल नक्शे से छेड़छाड़ की गई। सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन पर 14 फर्जी प्लॉट दिखाकर आम लोगों को वैध भूखंड बताकर बेच दिया गया। समिति में पदाधिकारी सिर्फ नाम के थे, जबकि पूरा नियंत्रण जीशान अली के पास था।
जो प्लॉट है ही नहीं, उसे भी बेचा
ईओडब्ल्यू जांच में सामने आया कि टीएनसीपी से स्वीकृत मूल ले-आउट में ओपन स्पेस के लिए आरक्षित भूमि को फर्जी नक्शे में प्लॉट नंबर 254 से 267 तक दिखा दिया गया। मूल नक्शे में प्लॉट नंबर 262 का कोई अस्तित्व ही नहीं था। इसके बावजूद 17 सितंबर 2002 को इसी फर्जी प्लॉट 262 को अविनाश मिश्रा को 1.05 लाख रुपए में बेच दिया गया। मौके पर जांच में पाया गया कि वहां पार्क, मंदिर और बिजली का ट्रांसफॉर्मर मौजूद है। यानी जिस प्लॉट की रजिस्ट्री कराई गई, वह जमीन पर थी ही नहीं। इसकी पुष्टि पटवारी पंचनामे से भी हुई।
डमी पदाधिकारियों से चलाई समिति…राजस्व रिकॉर्ड में नामों में हेरफेर
जांच में सामने आया कि प्लॉट बिक्री से मिली राशि सीधे खरीदार से समिति में नहीं गई। रकम पहले एमएस बख्श को दी गई और बाद में जीशान अली तक पहुंची। सहकारी समिति का वास्तविक संचालन जीशान व उसके ससुर एमएस बख्श के हाथों में था। कर्मचारियों और रिश्तेदारों को डमी पदाधिकारी बनाकर समिति चलाई गई। वर्षों तक ऑडिट नहीं कराया गया। बाद में समिति की बची जमीन अपने और परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज कराई गई। राजस्व रिकॉर्ड में नामों में हेरफेर के भी सबूत मिले हैं, इनकी जांच की जा रही है।
दूसरे प्रोजेक्ट भी रडार पर: ईओडब्ल्यू जांच में जीशान से जुड़े अन्य प्रोजेक्ट भी संदेह के घेरे में आए हैं। बावड़िया कलां की 13 एकड़ जमीन पर रॉयल हेरिटेज बिल्डर के जरिए प्लॉट, डुप्लेक्स और शॉपिंग मॉल बनाए गए। कर्ज न चुकाने पर पंजाब नेशनल बैंक ने मॉल को कब्जे में लिया, पर नीलामी आगे नहीं पाई । शिकायत के मुताबिक सीहोर जिले के नींबूखेड़ा में 121 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा और शाहजहांनाबाद क्षेत्र में बनाई गई मल्टी में स्टाम्प चोरी की भी जांच की जा रही है।

