बसों में पैनिक बटन …..भोपाल-जबलपुर में नहीं हो रहा पालन ?
हाल ही में इंदौर आ रही बसों में दो अलग-अलग घटनाओं में एक युवती और नेशनल शूटर के साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करने का मामला जहां तूल पकड़ रहा है। वहीं अब कसावट भी की जा रही है। दरअसल प्रदेश में सैकड़ों युवतियां ऐसी हैं जो रोज रात को नौकरी, एजुकेशन और पारिवारिक काम के सिलसिले में सफर करती हैं। ऐसे में इनकी बसों में सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम हैं यानी खासकर सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन आदि को लेकर, इसे लेकर दैनिक भास्कर ने प्रमुख शहरों की स्थिति जानी। इसमें पता चला कि भोपाल और जबलपुर में पैनिक बटन का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। चूंकि इंदौर में अब दो घटनाएं हो चुकी हैं इसलिए अब कुछ कसावट है।
भोपाल: कई बसों में पैनिक बटन नहीं
………ने बुधवार को भोपाल ISBT बस स्टैंड पर रैंडम चेकिंग की। जांच में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई, कई बसों में पैनिक बटन तो लगे हैं, लेकिन कई बसें अब भी बिना बटन के चल रही हैं। कुछ ड्राइवरों को तो यह तक नहीं पता कि बटन लगा कहां है। वहीं आरटीओ जितेंद्र शर्मा ने कहा कि पैनिक बटन हर बस में अनिवार्य है, अगर कोई नियम का उल्लंघन करता नजर आया तो उसके खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाएगा। हमने हाल ही में ऐसी सैकडों बसों पर कार्रवाई की है जिनमें पैनिक बटन या अन्य जरूरी दस्तावेज या उपकरण नहीं पाए गए।
एक बस में ड्राइवर कनेक्शन जोड़ता दिखा
जिन बसों में पैनिक बटन नहीं मिले, उनमें एमपी-30, पीए-4040 और एमपी-38 पी-0664 प्रमुख हैं। इस दौरान एमपी-30 पीए 4040 के ड्राइवर को पैनिक बटन का कनेक्शन जोड़ते हुए देखा गया, लेकिन जब बस के अंदर पैनिक बटन ढूंढा गया तो कहीं भी बटन दिखाई नहीं दिया।
महिला यात्रियों ने कहा पैनिक बटन होना जरूरी
यात्री दीपांशी पटेल ने बताया कि मैं अक्सर अकेले सफर करती हूं। मुझे आज तक नहीं पता था कि बसों में पैनिक बटन भी होता है। आज पहली बार देखा है। लगता है यह बहुत जरूरी है और हर बस में होना चाहिए। अनूजा ने कहा कि सिंगल वुमन के लिए पैनिक बटन बहुत जरूरी है। यह हर बस में होना चाहिए, इससे सुरक्षा का भरोसा मिलता है।
जबलपुर: ड्राइवर-कंडक्टर को जानकारी नहीं
जबलपुर में आईएसबीटी बस स्टैंड पर रियलिटी चेक किया। यहां ज्यादातर बसों में न तो पैनिक बटन लगे थे और न ही ड्राइवर–कंडक्टर को इसके बारे में जानकारी थी। एक दर्जन से अधिक बसों का रियलिटी चेक किया। अधिकतर बसों में पैनिक बटन नदारद थे। कुछ बसों में लगे तो थे, लेकिन उनके कनेक्शन नहीं थे। कंडक्टरों का कहना था कि कई यात्री पैनिक बटन को मोबाइल चार्जर समझ लेते हैं, इसलिए कनेक्शन नहीं किया गया है।
नागपुर–हैदराबाद चलने वाली एक लग्जरी बस में भी यही हाल मिला। बस में यात्रियों के लिए एसी, मोबाइल चार्जर और वाईफाई की सुविधा तो मौजूद थी, लेकिन पैनिक बटन नहीं था। बस चालक हमारे सवालों का जवाब नहीं दे पाए, हालांकि कंडक्टर ने स्वीकार किया कि बस में फिलहाल पैनिक बटन नहीं लगा है, पर जल्द लगाया जाएगा, क्योंकि बस नई है।
कंडक्टर ने बताया कि रोजाना इस बस में 50 से अधिक यात्री सफर करते हैं, जिनमें कई बार महिलाएं या छात्राएं अकेले भी यात्रा करती हैं। कुछ लंबी दूरी की बसें ऐसी भी मिलीं, जिनमें शासन के आदेश का पालन किया गया था। जबलपुर से छिंदवाड़ा चलने वाली एक बस में ड्राइवर की सीट से लेकर यात्रियों की हर सीट पर पैनिक बटन लगा हुआ था।
आरटीओ आर.के. रघुवंशी का कहना है कि

परिवहन मंत्रालय के आदेश के बाद सभी बस संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक बस में पैनिक बटन होना अनिवार्य है। जिस बस में पैनिक बटन नहीं होगा, उसका फिटनेस पास नहीं किया जाएगा।

ग्वालियर: चालू हालत में मिले पैनिक बटन ग्वालियर में बसों में लंबे शहरों की यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए सरकार द्वारा आपातकाल समय में महिलाओं के लिए बसों में पैनिक बटन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। झांसी रोड स्थित वीडियो कोच बस स्टैंड पर पहुंचे तो टीम ने बस स्टैंड पर खड़ी बसों को जब चेक किया गया तो उनमें आपातकाल के समय महिलाओं के लिए पैनिक बटन लगे हुए थे और वह पूर्ण तरीके से आपातकाल के समय काम करने लायक थे। आपातकाल में पैनिक बटन की जानकारी बसों के कंडक्टर और ड्राइवर को भी थी। बस के कंडक्टर ने टीम को इन पैनिक बटन को आपातकाल के समय में हमें दबाकर भी दिखाया।
बस मालिक अर्जुन रावत ने बताया कि आपातकाल के समय बसों में सवार महिलाओं के लिए पैनिक बटन लगाए गए हैं। इससे उन्हें आपातकाल के समय में उनकी जो भी परेशानी उसे हल किया जा सके। यह सरकार की एक बहुत ही अच्छी मुहिम है। बस संचालक ने बताया कि इमरजेंसी के समय अगर महिला पेयरिंग बटन दबाती है तो इसकी जानकारी भोपाल में बीट अधिकारी तक पहुंचती है। इसके बाद अधिकारी संबंधित बस के चालक और मालिक से संपर्क करते हैं। उसके बाद जो भी महिला को जो भी परेशानी होती है उसका तत्काल निराकरण कर दिया जाता है।
इंदौर: यहां अब हो रही है कसावट
इंदौर में मुंबई से लौट रही एक युवती के साथ आधी रात को हुई घटना के बाद पुलिस ने ड्राइवर और क्लीनर गिरफ्तार कर लिया लेकिन मुख्य आरोपी किशोर सिंह अभी तक फरार है। इंदौर में लगातार कसावट कसी जा रही है। पिछले हफ्ते कलेक्टर शिवम वर्मा ने बस ऑपरेटरों-मालिकों की बैठक लेकर कड़ी चेतावनी दी थी। इसमें ड्राइवर-क्वलीर के वैरीफिकेशन, सीसीटीवी कैमरे, फायर सिस्टम और पैनिक बटन पर खास जोर दिया गया था।
शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने भी बैठक लेकर सभी को फिर चेतावनी दी थी। इस बीच अधिकांश ट्रेवल्स संचालक अब हर बिंदु पर पालन करते नजर आ रहे हैं। AICTSL की बसों की स्थिति जानी तो पता चला कि यहां 575 बसें संचालित होती हैं। इनमें से करीब पौने दो सौ बसें लंबी दूरी की है। इन सभी में पैनिक बटन होने का दावा किया गया है। अधिकांश बसों में पैनिक बटन भी है लेकिन कई लोगों को यही नहीं पता कि पैनिक बटन होता क्या है, कहां होता और इसका उपयोग कैसे करते हैं।
अब हर बस में पांच स्थानों पर पैनिक बटन
सुशील अरोरा (महासचिव, बस ऑपरेटर एसोसिएशन मप्र) ने बताया कि मप्र शासन ने जब से अपनी बसें बंद की हैं, एसोसिएशन लगातार सुरक्षा में कसावट कर रहा है। यहां से कोई भी वाहन बिना पैनिक बटन और जीपीएस के संचालित नहीं हो रहा है। अब तो बसों में पांच पैनिक बटन लगाए जा रहे हैं। इसमें बसो में पैसेंजर के हाथों के पास रहते हैं। ड्राइवर सीट केबिन के अलावा पीछे चार पैनिक बटन भी लगे रहते हैं। यात्री कभी भी जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग कर सकते हैं। इसका कंट्रोल भोपाल में है। आरटीओ प्रदीप शर्मा का कहना है कि

बिना पैनिक बटन के लंबी दूरी वाली बसों को परमिट ही जारी नहीं किया जाता। मुंबई से इंदौर लौटने के दौरान जिस युवती के साथ बस में घटना हुई थी वह वह मुंबई से आई थी। इसमें पैनिक बटन लगा था।

बस में पैनिक बटन होने का कितना सच
उधर, मुंबई से इंदौर लौटने के दौरान जिस युवती के साथ हंस ट्रेवल्स की बस में घटना हुई थी, उसे लेकर परिवार का कहना है कि पैनिक बटन नहीं था। राजेंद्र नगर पुलिस ने जब ट्रेवल्स के कर्ताधर्ताओं से सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के बारे में पूछा तो बताया गया कि वे भी वर्किंग में नहीं थे। तीन इमली बस स्टैंड पर पैनिक बटन की स्थिति जानी तो यहां शाम को चार बसें खड़ी थी इनमें पैनिक बटन मिले जबकि कई बसें बाहर से इंदौर आकर रवाना हो चुकी थी।
कहां होता है पैनिक बटन, कैसे करता है काम
ड्राइवर अब्दुल कायम खान ने पूरी बस की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में बताया। उन्होंने हर स्लीपर सीट के पास लगे पैनिक बटन की जानकारी दी। बताया कि धीरे से इसके कांच को अलग बटन दबाने पर काम करने लगेगा। इसकी सूचना पुलिस को पहुंचेगी और वहां से बस मालिक को सूचना मिलेगी। इसके बाद वह स्टाफ को इसकी जानकारी देगा। पैनिक बटन नहीं होने पर 20 हजार रु. ज्यादा का जुर्माना वसूलने का नियम है। इसी बस में नए नियमों के तहत फायर सिस्टम भी लगा मिला जो ड्राइवर अब्दुल ने बताया। उन्होंने ड्राइवर के पास लगा पैनिक बटन के बारे में भी बताया जो चालू हालत में था। ऐसी ही बस में सीसीटीवी कैमरे भी चालू हालत में मिले।
किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा, पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह और आरटीओ प्रदीप शर्मा ने बताया कि बसों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले बस ऑपरेटरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी
पुलिस कंट्रोल रूम की नहीं है कनेक्टिविटी
भोपाल आरटीओ में राज्य नियंत्रण कमांड सेंटर स्थापित करने पर 18 करोड़ खर्च होने के बावजूद दिसंबर 2022 में ट्रायल के तीन साल बाद भी यह सिस्टम पुलिस कंट्रोल रूम से डिस्कनेक्टेड है। नतीजतन 1.3 लाख वाहनों में लगे पैनिक बटन बेअसर हैं।
बटन दबाने पर कमांड सेंटर से केवल रजिस्टर्ड वाहन मालिक को कॉल आती है, पुलिस को नहीं। दरअसल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमांड सेंटर को निर्भया फंड से वित्त पोषित किया गया था, लेकिन इसकी अक्षमता के कारण लोगों की जान जोखिम में बनी हुई है।

