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एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल बना खतरा !!!

एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल बना खतरा, इंदौर में दवाएं बेअसर होने से मरीजों की बढ़ी परेशानियां

चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक दवाओं का पूरा कोर्स न लेना मरीजों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। इंदौर में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं, जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही हैं। इसका कारण दवाओं का अधूरा सेवन, बिना पर्चे दवा लेना और गैर-योग्य चिकित्सकों द्वारा एंटीबायोटिक का धड़ल्ले से उपयोग बताया जा रहा है।टीबायोटिक डोज अधूरा छोड़ना पड़ रहा भारी, पढ़िए चिकित्सकों की सलाह

  1. दवाई का अधूरा कोर्स बना मरीजों के लिए खतरा
  2. झोलाछाप चिकित्सकों से बिगड़ रही स्थिति
  3. गोली बेअसर होने पर इंजेक्शन देना पड़ रहा

 इंदौर: चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक दवा न लेने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शहर में सैकड़ों ऐसे मरीज चिकित्सकों के पास पहुंचते हैं, जिनकी बीमारी पर एंटीबायोटिक्स का असर न होने से बीमारी खत्म नहीं होती है।

ऐसे में चिकित्सक उनके एंटीबायोटिक्स बदलते हैं या उसके डोज बढ़ाते हैं। विदेश में जहां एमबीबीएस चिकित्सक के लिए सीमित मात्रा में एंटीबायोटिक दवाएं देने का प्रविधान है, वहीं इंदौर सहित भारत के अधिकांश शहरों व कस्बों में स्थिति यह है कि गली-मोहल्लों के झोलाछाप एवं बीएएमएस व बीएचएमएस भी मरीजों को एलोपैथी दवाओं के साथ एंटीबायोटिक दवा दे देते हैं।

ये चिकित्सक मरीज को एंटीबायोटिक का तय डोज नहीं बताते हैं। यही वजह है कि निर्धारित मात्रा में एंटीबायोटिक दवा न लेने पर मरीज के शरीर में दवा के लिए प्रतिरोध क्षमता विकसित हो जाती है और एंटीबायोटिक दवा लेने पर भी मरीज की बीमारी ठीक नहीं होती है।
गोलियां बेअसर हुईं तो इंजेक्शन से देना पड़ा एंटीबायोटिककेस एक : 35 साल की महिला को 10 दिन से बुखार था। उन्होंने घर के पास फिजिशियन से उपचार लिया। जांच में उन्हें टाइफाइड होना पाया गया। एंटीबायोटिक दवा भी ली, लेकिन बीमारी खत्म नहीं हुई। ऐसे में वो अन्य चिकित्सक के पास पहुंची तो वहां पता चला कि एंटीबायोटिक दवा उनकी बीमारी पर काम नहीं कर रही है। ऐसे में उन्हें अस्पताल में भर्ती करके इंजेक्शन के जरिए एंटीबायोटिक दवा देनी पड़ी।

कल्चर सेंसिटिविटी से पता संक्रमण सामान्य एंटीबायोटिक दवा के लायक नहींकेस दो: 42 वर्षीय महिला को यूरिन का इंफेक्शन था। उन्होंने कई अलग-अलग तरह के एंटीबायोटिक लिए, लेकिन बीमारी ठीक नहीं हुई। यूरिन का जब कल्चर व सेंसिटिविटी जांच करवाई तो पता चला कि उनका संक्रमण सामान्य एंटीबायोटिक दवा के लिए लायक नहीं था। उन्हें जब इंजेक्शन के माध्यम से एंटीबायोटिक दवा दी गई तब वह पूरी तरह ठीक हो पाईं।

इस तरह होती है लापरवाही

  • मरीज बिना चिकित्सक की सलाह के भी एंटीबायोटिक दवा सीधे केमिस्ट से खरीदता है।
  • एंटीबायोटिक दवा लेने पर तीन दिन में बीमारी ठीक हो जाती है, लेकिन मरीज दवा का तय डोज पूरा नहीं करता। बीच में छोड़ देता है।
  • चिकित्सक के पर्चे के बिना केमिस्ट लोगों को एंटीबायोटिक दवा दे देते हैं।
  • जिनके पास क्वालिफिकेशन नहीं, ऐसे चिकित्सक भी एंटीबायोटिक दे देते हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्र में कई चिकित्सक मरीजों को सीधे एंटीबायोटिक के इंजेक्शन ही लगाते हैं। मरीज कई बार इंजेक्शन के तय डोज नहीं लेता है।
  • मरीज कई बार चिकित्सक से जल्द ठीक करने का प्रेशर बनाते हैं, इस वजह से चिकित्सक मरीज को एंटीबायोटिक लिख देते हैं।

विदेश में एंटीबायोटिक दवा देने के नियम

  • विदेश में एमबीबीएस से कम क्वालिफिकेशन वाला व्यक्ति किसी मरीज को एंटीबायोटिक पर्चे पर न लिख सकता है और न दे सकता है।
  • विदेश में एंटीबायोटिक दवाओं को देने के लिए चिकित्सकों के लिए क्राइटेरिया भी अलग-अलग है। एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सक सीमित एंटीबायोटिक ही मरीजों को लिख सकता है। एमडी, एमएस क्वालिफाइड चिकित्सक अधिक एंटीबायोटिक दे सकते हैं।
  • विदेश में हायर एंटीबायोटिक देने के लिए दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की सहमति होना अनिवार्य है।
  • विदेश के साथ भारत के कई बड़े अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के संबंध में अस्पताल प्रबंधन रिव्यू मीटिंग करता है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि चिकित्सक स्पष्ट करे कि उसने मरीज को एंटीबायोटिक दवा आखिर क्यों दी।

चिकित्सक की सलाह

मरीज को चिकित्सक के परामर्श के अनुसार एंटीबायोटिक व अन्य दवाओं का पूरा डोज लेना चाहिए। बीच में दवा छोड़ने पर मरीजों के शरीर में बैक्टीरिया की एंटीबायोटिक दवा के लिए प्रतिरोध क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में मरीज की बीमारी को सही होने में ज्यादा समय भी लगता है। कई बार मरीज को इंजेक्शन के माध्यम से एंटीबायोटिक देना पड़ता है।

-डॉ. प्रवीण दाणी, एमडी मेडिसिन

यदि मरीज चिकित्सक के परामर्श के अनुरूप एंटीबायोटिक दवाएं निर्धारित समय पर ले और थोड़े समय के लिए ले तो बैक्टीरिया की थोड़ी ग्रोथ कुछ समय दवा लेने पर कम होती है। दवा का कोर्स पूरा नहीं लेने पर बैक्टीरिया पूरी तरह नष्ट नहीं होते हैं और दवा के लिए प्रतिरोध क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में उस व्यक्ति के दोबारा बीमार होने पर या उस व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को संक्रमण होने पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करती हैं।

-डॉ. वीपी पांडे, पूर्व डीन एमजीएम मेडिकल कालेज

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