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Delhi: ‘भारत टैक्सी’ सहकारी मॉडल से जुड़ने वाला देश का पहला राज्य बना दिल्ली !

Delhi: ‘भारत टैक्सी’ सहकारी मॉडल से जुड़ने वाला देश का पहला राज्य बना दिल्ली, ‘मजबूत होगी चालकों की आय’

दिल्ली सचिवालय में सीएम की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) और भारत टैक्सी की सहकारी इकाई सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। 

दिल्ली ‘भारत टैक्सी’सहकारी मॉडल से जुड़ने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ औपचारिक साझेदारी की गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि पहल का उद्देश्य पर्यटकों और नागरिकों को सुरक्षित, पारदर्शी टैक्सी सेवाएं देना और टैक्सी चालकों की आय को मजबूत करना है।

दिल्ली सचिवालय में सीएम की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) और भारत टैक्सी की सहकारी इकाई सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड (एसटीसीएल) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। रेखा गुप्ता ने कहा कि यह समझौता एक साथ ईज ऑफ लिविंग, ईज ऑफ ट्रैवल और ईज ऑफ अर्निंग को सशक्त करने की दिशा में अहम कदम है। इस दौरान दिल्ली सरकार के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

टैक्सी चालक बनेंगे दिल्ली पर्यटन के ‘ब्रांड एंबेसडर’
समझौते के तहत डीटीटीडीसी पर्यटन और ब्रांडिंग पार्टनर की भूमिका निभाएगा। टैक्सी चालकों को दिल्ली की संस्कृति, इतिहास, विरासत और सॉफ्ट स्किल्स से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वह पर्यटकों के लिए सकारात्मक परिचय के रूप में कार्य कर सकें। प्रशिक्षित चालक दिल्ली पर्यटन के ‘ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में सेवाएं देंगे।
पर्यटकों के लिए विशेष टैक्सी पैकेज
पर्यटकों की सुविधा के लिए दो घंटे, चार घंटे और पूरे दिन के दर्शनीय स्थल भ्रमण पैकेज शुरू किए जाएंगे। साथ ही शहर के भीतर पॉइंट-टू-पॉइंट टैक्सी सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। मोबाइल ऐप के जरिए आसान बुकिंग, पारदर्शी किराया व्यवस्था और तय सेवा मानकों से यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
टैक्सी चालकों की आय और सुरक्षा पर फोकस
इस सहकारी मॉडल का बड़ा लाभ टैक्सी चालकों को भी मिलेगा। चालक अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा स्वयं रख सकेंगे और सहकारी संस्था के हिस्सेदार भी होंगे। इससे उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी, संगठित सहयोग और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। इससे अनियमित टैक्सी सेवाओं पर निर्भरता घटेगी। परिवहन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

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