नई दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी आखिर शरीर में इतनी तेजी से कैसे फैलती है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए हाल ही में एक नया और महत्वपूर्ण अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में कैंसर कोशिकाओं की चालाकी का एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि कैंसर कोशिकाएं हमारे शरीर की रक्षा करने वाले इम्यून सेल्स को चकमा ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें अपने फायदे के लिए इस्तेमाल भी करती हैं।

Why body cannot fight cancer

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इम्यून सेल्स की ‘रीप्रोग्रामिंग’ का खेल

स्विट्जरलैंड की जिनेवा यूनिवर्सिटी और लुडविंग इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अपनी खोज में पाया कि कैंसर कोशिकाएं इम्यून सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करती हैं। वे ‘न्यूट्रोफिल्स’ नामक खास इम्यून सेल्स की ‘रीप्रोग्रामिंग’ कर देती हैं। इसका मतलब है कि जो कोशिकाएं शरीर की रक्षा के लिए बनी थीं, उन्हें कैंसर इस तरह बदल देता है कि वे ऐसे मॉलिक्यूल पैदा करने लगती हैं जो ट्यूमर को बढ़ने में मदद करते हैं। इन मॉलिक्यूल्स की मौजूदगी यह संकेत देती है कि शरीर में कैंसर बढ़ रहा है।

स्वस्थ होने का नाटक और धोखा

अध्ययन में एक और दिलचस्प बात सामने आई है। कैंसर सेल्स इम्यून सेल्स को यह भरोसा दिलाने में कामयाब हो जाती हैं कि वे ‘स्वस्थ’ हैं। इस धोखे की वजह से इम्यून सिस्टम उन्हें नष्ट नहीं करता। कैंसर कोशिकाएं या तो प्रतिरक्षा कोशिकाओं से छिप जाती हैं या उन्हें निष्क्रिय कर देती हैं। जब शरीर के रक्षक ही उन्हें नहीं रोकते, तो कैंसर को पनपने और फैलने का पूरा मौका मिल जाता है। इसके अलावा, कैंसर कोशिकाएं अपने आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को भी बदल देती हैं, जिससे सूजन और ऐसे कारक पैदा होते हैं जो बीमारी को बढ़ाते हैं।

वैज्ञानिकों की राय और पिछला शोध

यह शोध ‘कैंसर सेल जर्नल’ में प्रकाशित हुआ है। जिनेवा यूनिवर्सिटी के पैथोलॉजी और इम्यूनोलॉजी विभाग के शोधकर्ता मिकेल पिटेट का कहना है कि ट्यूमर को बढ़ाने वाले तत्वों की पहचान करना एक कठिन काम है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने इससे पहले ‘मैक्रोफेज’ (एक अन्य प्रकार की इम्यून सेल) में दो ऐसे जीन का पता लगाया था जो बीमारी बढ़ाते थे, लेकिन इस बार, नए अध्ययन में उन्होंने ‘न्यूट्रोफिल्स’ में हो रहे इस खतरनाक परिवर्तन को पकड़ा है।