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देशभर में साइबर फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क..एमपी में ‌638 करोड़ रुपए का फ्रॉड !!!

देशभर में साइबर फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क…,:एमपी में ‌638 करोड़ रुपए का फ्रॉड, ये पैसा 17 राज्यों के 2.93 लाख खातों में फ्रीज
मध्यप्रदेश से देश और विदेश तक साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। बिहार, उत्तरप्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, एमपी, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत 17 से ज्यादा राज्यों में बैठे साइबर ठग एमपी के लोगों को निशाना बना रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट, एपीके फाइल, सिम स्वैप जैसे हाईटेक हथकंडों से ठग रोजाना लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।

हालत यह है कि हर 100 में से 4 लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। ठगी के बाद रकम को तुरंत अलग-अलग राज्यों में खोले गए खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, ताकि पैसा ट्रेस न हो सके। साल 2025 के आंकड़े डराने वाले हैं- मध्य प्रदेश के 64 हजार लोगों से ठगों ने 638 करोड़ रुपए ऐंठ लिए। ठगी का यह पैसा पुलिस की नजर से बचाने के लिए 1 से लेकर 10 लेयर (स्तरों) तक घुमाया गया। ग्वालियर, भोपाल और इंदौर इस नेटवर्क के मुख्य निशाने पर रहे हैं।

साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट, सिम स्वैप और फर्जी एपीके फाइल जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रदेश में रोजाना औसतन 5523 कॉल किए जा रहे हैं, जिनमें से 175 लोग शिकार बन रहे हैं। यानी हर 100 में से 4 लोग अपनी जमा पूंजी गंवा रहे हैं। ठग रोजाना करीब 1.75 करोड़ रुपए ऐंठकर रकम को 800 से ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर कर रहे हैं।

समझिए… 1 से 10 खातों तक दौड़ता है आपका पैसा ठग पैसा आते ही ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ की तर्ज पर लेयरिंग करते हैं…

लेयर 1: सबसे पहले 56,743 खातों में पैसा पहुंचा। लेयर 2: यहाँ से रकम 65,789 खातों में बांटी गई। लेयर-3 यहां से पैसा 52,456 बैंक खातों में घुमाया गया। लेयर 10 तक: अंत में यह पैसा 2.93 लाख खातों तक फैला दिया गया ताकि पुलिस मुख्य सरगना तक न पहुंच सके।

निशाने पर ग्रामीण, 5 हजार में ले रहे खाते

ठगों ने गांव और कस्बों में एजेंट पाल रखे हैं। ये एजेंट जरूरतमंदों और ग्रामीणों को मामूली लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं या उनके खाते किराए पर ले लेते हैं। जब पुलिस जांच करती है, तो असली ठग के बजाय वह गरीब आदमी फंस जाता है जिसके नाम पर खाता है। बिहार, राजस्थान और पश्चिम बंगाल इस ‘खाता व्यापार’ के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं।

5 चरणों में जांच, फिर फ्रीज और अन-फ्रीज

फ्रॉड की शिकायत के बाद कार्रवाई 5 चरणों में होती है। पहले साइबर सेल जांच करती है। उसके बाद बैंक की नोडल टीम खाते होल्ड और फ्रीज लगाती है। फिर साइबर सेल थाना या 1930 पर शिकायत के बाद बैंक खाता फ्रीज करता है। पीड़ित, फ्रीज/होल्ड की शिकायत साइबर सेल में करता है। जांच में ठगी साबित होने पर साइबर सेल एनओसी/डिफ्रीज आदेश देता है।

एक्सपर्ट – प्रणय नागवंशी, एसपी, मप्र राज्य साइबर सेल

अनजान नंबर से कॉल आए तो 1 मिनट में काटें, 20 सेकंड सोचें

अनजान नंबर से डर या लालच वाली कॉल आए तो तुरंत फोन काटें। 20 सेकंड शांत होकर सोचें कि क्या यह सच हो सकता है? यहीं ठग की हार होती है। किसी भी अनजान लिंक या QR कोड पर क्लिक न करें, क्योंकि करीब 70% ठगी यहीं से शुरू होती है। बैंक के SMS अलर्ट चालू रखें। खाते में संदिग्ध लेन-देन दिखे तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें, ताकि समय रहते रकम रोकी जा सके।

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