8 साल में 374 करोड़ रुपए की वसूली के आदेश, हुई सिर्फ 10 करोड़ रुपए !

रियल एस्टेट में धोखाधड़ी रोकने के लिए बनी रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) मध्यप्रदेश में आम लोगों को अपेक्षित राहत नहीं दे पा रही है। पिछले आठ वर्षों में मप्र रेरा ने बिल्डरों के खिलाफ 2382 मामलों में 374 करोड़ रु. की राजस्व वसूली प्रमाण-पत्र जारी किए।
हालांकि इनमें से केवल 10 करोड़ रुपए (2.62%) की ही वसूली हो सकी है। इसी पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि रेरा पीड़ितों के बजाय बिल्डरों की मदद करता नजर आ रहा है और इसे बंद करने पर विचार होना चाहिए। मप्र में हर महीने ग्राहकों की क्षतिपूर्ति, मूलभूत सुविधाओं की कमी और प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन से जुड़े 200 से 250 मामले रेरा में दर्ज होते हैं।
चेयरमैन एपी श्रीवास्तव खुद सरकार के साथ न्यायिक विवादों में उलझे रहे हैं। प्रदेश में करीब 6 हजार प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत हैं। भोपाल के बिल्डर नए प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन में अनावश्यक अड़चनें डालने के आरोप भी लगाते रहे हैं।

8 साल से शून्य वसूली: हरदा, उज्जैन, देवास व सिवनी समेत 14 जिले।
आंकड़े 31 दिसंबर, 2025 तक

