दिल्ली

प्रदेश में बदहाल उच्च शिक्षा…19 विवि में प्रोफेसरों के 2003 पदों में से 1568 खाली !!

10 साल का इंतजार खत्म, भरे जाएंगे खाली पड़े पद
प्रदेश में बदहाल उच्च शिक्षा; 19 विवि में प्रोफेसरों के 2003 पदों में से 1568 खाली

मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। प्रदेश के 19 सरकारी विश्वविद्यालयों में स्वीकृत 2003 शैक्षणिक पदों में से 1568 खाली पड़े हैं। यानी महज 22% रेगुलर स्टाफ के भरोसे उच्च शिक्षा की नैया चल रही है। इस बदहाली पर अब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए देशभर की यूनिवर्सिटी को अल्टीमेटम दिया है कि शिक्षकों के खाली पड़े पद शीघ्र भरे जाएं। इसके बाद प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने सभी यूनिवर्सिटी को निर्देश दिए हैं कि अगले 4 माह में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 78% खाली पद अनिवार्य रूप से भरे जाएं।

प्रदेश के विश्वविद्यालयों में 78% पद यानी हर चार में से तीन पद खाली हैं और 70 हजार से ज्यादा छात्रों का भविष्य संकट में है। छात्रों का कहना है कि कई विषयों में वर्षों से नियमित प्रोफेसर नहीं हैं। सिलेबस समय पर पूरा नहीं हो पाता, रिसर्च गाइड उपलब्ध नहीं होते और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी प्रभावित होती है। यही नहीं प्रदेश की पांच यूनिवर्सिटी का हाल तो इतना खराब है कि वहां आज तक एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है।

हर 4 में 3 पद खाली… शिक्षकों की कमी से पढ़ाई, रिसर्च और करियर पर संकट

रोस्टर व कोर्ट की पेचीदगियों के कारण अटकी थी भर्ती प्रक्रिया

विशेषज्ञों के मुताबिक, भर्ती रुकने की सबसे बड़ी वजह आरक्षण रोस्टर की पेचीदगियां थीं। ओबीसी आरक्षण (14% बनाम 27%) के विवाद और प्रशासनिक ऊहापोह के कारण विज्ञापन निकलने के बाद भी मामला कोर्ट में अटक जाता था। अकेले जीवाजी यूनिवर्सिटी में पिछले 10 साल में 4 बार प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन अंजाम तक नहीं पहुँच सकी। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह बाधा दूर हो गई है।

विभाग ने तय की 4 माह की समय सीमा

उच्च शिक्षा मंत्री के निर्देशानुसार 4 महीने की समय-सीमा तय की गई है। रोस्टर को लेकर अब कोई भ्रम नहीं है। हमारा लक्ष्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। -अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग

कोर्ट से स्टे हटते ही मांगें जाएंगे आवेदन

समन्वय समिति की बैठक के बाद हमारी प्राथमिकता कोर्ट से स्टे हटते ही भर्ती प्रक्रिया को तेज करने की है। इससे कैंपस का अकादमिक माहौल बदलेगा। –डॉ. राजकुमार आचार्य, कुलगुरु, जेयू

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