634 करोड़ की ठगी पर मध्य प्रदेश बेबस…साइबर ठगी के मामले में एमपी में व्यवस्था ढीली !!!!
634 करोड़ की ठगी पर मध्य प्रदेश बेबस, यूपी में 75 साइबर थाने; एमपी में अब भी सिर्फ एक के भरोसे सुरक्षा
साइबर ठगी की घटनाएं और राशि लगातार बढ़ने के कारण अधिकतर बड़े राज्यों ने चुनौतियों से निपटने के लिए अपने संसाधन बढ़ाए, लेकिन मध्य प्रदेश इसमें पिछड़ा ही रह गया। भोपाल में प्रदेश का एकमात्र साइबर थाना है, जबकि उत्तर प्रदेश में 75 हैं।
भोपाल। साइबर ठगी की घटनाएं और राशि लगातार बढ़ने के कारण अधिकतर बड़े राज्यों ने चुनौतियों से निपटने के लिए अपने संसाधन बढ़ाए, लेकिन मध्य प्रदेश इसमें पिछड़ा ही रह गया। भोपाल में प्रदेश का एकमात्र साइबर थाना है, जबकि उत्तर प्रदेश में 75 हैं। पूरे देश की बात करें तो 500 से अधिक साइबर थाने हैं।
पुलिस मुख्यालय ने दो वर्ष पहले सभी जिलों में एक-एक साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। वर्ष 2026-27 के बजट में राशि मिलने की आशा थी, पर अभी तक थानों के लिए बल ही स्वीकृत नहीं हुआ है।
634 करोड़ रुपये की साइबर ठगी
बता दें, प्रदेश के लोगों से वर्ष 2025 में 634 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई है, जिसमें 137 करोड़ रुपये ही होल्ड कराए जा सकें। इस मामले में पांच राज्य मध्य प्रदेश से बेहतर स्थिति में हैं। वर्ष 2020 के बाद से अब तक देखें तो मध्य प्रदेश में एक साइबर थाना तब भी था और अभी भी वही स्थिति है।
हरियाणा जैसे छोटे राज्य में दो थाने थे, जो अब बढ़कर 29 हो गए हैं। गुजरात में चार से बढ़कर 39, बिहार में एक से बढ़कर 44, केरल में 20, महाराष्ट्र में 47, राजस्थान में 34 और तमिलनाडु में 54 थाने संचालित हो रहे हैं।
साइबर थाने का लाभ यह है कि उसका अलग से अमला होता है, जिससे मात्र साइबर अपराधों की विवेचना करनी होती है। इससे आरोपित की पहचान, गिरफ्तारी, विवेचना जल्दी हो जाती है। मध्य प्रदेश में अभी साइबर के अपराध सामान्य थानों में भी दर्ज हो रहे हैं, जबकि वहां इसमें दक्ष अमला नहीं है।
पहले चरण में पांच से छह थाने खोलने को हो सकता है निर्णय
साइबर मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव सभी जिलों के लिए भेजा गया है, पर पहले चरण में उन जिलों में पांच से छह थानों के लिए शासन से स्वीकृति मिल सकती है, जहां साइबर अपराध की घटनाएं अधिक हो रही हैं। इनमें इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा आदि जिले हो सकते हैं। इसका प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा जाएगा।
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मध्य प्रदेश में साइबर फ्रॉड के लगातार बढ़ रहे मामले. पिछले 5 साल में 1149 करोड़ की ठगी. रिकवर हो पाए करीब 100 करोड़ रुपए.
December 3, 2025 at 10:42 PM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश में साइबर अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. साइबर अपराधी लोगों को ठगने के नए-नए तरीके ढूंढ रहे हैं. पिछले 5 सालों में मध्य प्रदेश में साइबर अपराधी 1149 करोड़ की धोखाधड़ी कर चुके हैं. साल 2025 में अब तक जालसाज 298 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दे चुके हैं. साइबर फ्रॉड को लेकर 26 हजार से ज्यादा शिकायतें पुलिस के पास पहुंची, लेकिन इससे भी चिंताजनक यह है कि इनमें से चुनिंदा शिकायतकर्ताओं को ही अपनी रकम वापस मिल पाई है.
धोखाधड़ी की कुल रकम की 11 फीसदी हुई रिकवरी
मध्य प्रदेश में पिछले 5 सालों में 2 लाख 35 हजार से ज्यादा लोग साइबर अपराधों का शिकार हो चुके हैं. ये लोग डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ठगी, अकाउंट चोरी, सायबर बुलिंग जैसे कई तरह के साइबर अपराधों के शिकार हुए हैं. ऐसी वारदातें लोगों को आर्थिक नुकसान, तो पहुंचा ही रही हैं, साथ ही मानसिक रूप से भी परेशान कर रही हैं.
साइबर अपराधियों से निपटने में पुलिस को भी पसीना बहाना पड़ रहा है. अधिकांश मामलों में पुलिस ऐसे अपराधियों तक नहीं पहुंच पा रही है. पिछले 5 सालों में वित्तीय धोखाधड़ी की 1 लाख 8 हजार से ज्यादा शिकायतें साइबर सेल के पास पहुंची. जालसाजों ने 1149 करोड़ रुपए ठगे, लेकिन इसमें से पुलिस मात्र करीब 100 करोड़ रुपए की ही रिकवरी कर पाई.

मध्य प्रदेश में पिछले 5 साल के साइबर फ्रॉड के आंकड़े
1 लाख 27 हजार लोग साइबर अपराध के हो चुके शिकार
कुछ लोग आर्थिक नुकसान से तो बच गए, लेकिन उन्हें मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. एमपी में पिछले 5 सालों में साइबर अपराध के 1 लाख 27 हजार मामले दर्ज किए गए. इसमें सबसे ज्यादा मामले देवास में सामने आए. जहां 1956 शिकायतें दर्ज की गई. देवास जैसे छोटे जिलों में अपराधी लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं. यह जानकारी कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने दी.
‘ऐसे अपराधों को रोकने के लिए की गई है साइबर क्राइम सेल की स्थापना’
….. “साइबर अपराधी अब छोटे जिलों के लोगों को निशाना बना रहे हैं. जिस तरह से ऐसे अपराध बढ़ रहे हैं, उसके हिसाब से पुलिस के संसाधन अपर्याप्त हैं.” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लिखित जवाब में बताया कि साइबर अपराधों की जांच के लिए साइबर क्राइम सेल की स्थापना की गई है. साइबर थाने में सभी प्रकार की शिकायतें प्राप्त होती हैं. ऐसे मामलों में दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाम, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड, पंजाब सहित कई राज्यों से अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है.

साइबर ठगी के मामले में एमपी में व्यवस्था ढीली