मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के सभी 52 जिला अस्पतालों में शुरू होंगे आब्सटेट्रिक्स आईसीयू और एचडीयू !!

मध्य प्रदेश के सभी 52 जिला अस्पतालों में शुरू होंगे आब्सटेट्रिक्स आईसीयू और एचडीयू

प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) या अचानक बीपी बढ़ने जैसी जटिलताओं के मामले में जिला अस्पतालों से रेफरल की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लंबी दूरी तय करने के कारण प्रसूता ‘गोल्डन आवर’ खो देती है, जिससे उसकी जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। नई व्यवस्था के तहत हर जिले में चार से छह बेड का अत्याधुनिक सेटअप होगा।मध्य प्रदेश के सभी 52 जिला अस्पतालों में शुरू होंगे आब्सटेट्रिक्स आईसीयू और एचडीयूप्रसव के दौरान गंभीर रूप से बीमार होने वाली महिलाओं को महानगरों के मेडिकल कॉलेजों में रेफर नहीं होना पड़ेगा। – प्रतीकात्मक तस्वीर

  1. अब गंभीर प्रसूताओं को नहीं होना पड़ेगा रेफर, हर जिले में मिलेगी हाई-टेक क्रिटिकल केयर सुविधा
  2. स्वास्थ्य विभाग ने मिशन मोड में शुरू की तैयारी, प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने की कवायद
  3. केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग यहां स्टाफ की तैनाती पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा

भोपाल। मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए सभी 52 जिला चिकित्सालयों में अब विशेष आब्सटेट्रिक्स आईसीयू और हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) को पूरी तरह क्रियाशील किया जा रहा है।

अब प्रसव के दौरान गंभीर रूप से बीमार होने वाली महिलाओं को महानगरों के मेडिकल कॉलेजों में रेफर नहीं होना पड़ेगा। उन्हें जिला स्तर पर ही वह तमाम जीवन रक्षक सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक केवल बड़े निजी अस्पतालों या चुनिंदा मेडिकल कॉलेजों तक सीमित थीं।

26 जिलों में शुरू हुई सुविधा, शेष में काम अंतिम दौर मेंप्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन दो चरणों में किया जा रहा है। विभागीय जानकारी के मुताबिक अब तक आधे प्रदेश यानी 26 जिलों के अस्पतालों में यह सेटअप क्रियाशील हो चुका है। यहां प्रसूताओं को विशेषज्ञ सेवाएं मिलना शुरू हो गई हैं। शेष 26 जिलों में बुनियादी ढांचा तैयार है और वहां केवल वेंटिलेटर व मल्टी-पैरा मॉनिटर जैसे उपकरणों की स्थापना का काम शेष है, जिसे विभाग इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक पूरा करने का दावा कर रहा है।

चार से छह बिस्तर का अत्याधुनिक सेटअप रहेगा

अक्सर देखा जाता है कि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (पीपीएच) या अचानक बीपी बढ़ने जैसी जटिलताओं के मामले में जिला अस्पतालों से रेफरल की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लंबी दूरी तय करने के कारण प्रसूता ‘गोल्डन आवर’ खो देती है, जिससे उसकी जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। नई व्यवस्था के तहत हर जिले में चार से छह बेड का अत्याधुनिक सेटअप होगा। यहां वेंटिलेटर, मल्टी-पैरा मॉनिटर और अन्य जीवन रक्षक उपकरण 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।

प्रशिक्षित स्टाफ की होगी तैनातीअत्याधुनिक सेवाओं के तहत केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग यहां स्टाफ की तैनाती पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ-साथ निश्चेतना विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही नर्सिंग स्टाफ को ‘क्रिटिकल केयर इन आब्सटेट्रिक्स’ का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे आईसीयू में भर्ती गंभीर प्रसूताओं की बेहतर देखभाल कर सकें।

रेफरल की परेशानी झेलनी न पड़े

मध्य प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने कई जिलों में आब्सटेट्रिक्स आईसीयू और एचडीयू को क्रियाशील कर दिया है। शेष जिलों में उपकरणों की स्थापना का कार्य अंतिम चरण में है। हमारा लक्ष्य प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात होने वाली जटिलताओं का स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी प्रसूता को समय पर इलाज न मिलने के कारण रेफरल की परेशानी न झेलनी पड़े। – डॉ. प्रभाकर तिवारी, वरिष्ठ संयुक्त संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मप्र

 

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