कारम बांध टूटने के मामले में सीई, अधीक्षण यंत्री समेत पांच इंजीनियर दोषी, तीन को मिली क्लीनचिट ?
कारम बांध टूटने के मामले में सीई, अधीक्षण यंत्री समेत पांच इंजीनियर दोषी, तीन को मिली क्लीनचिट
धार जिले में स्थित करम बांध फूटने के मामले में 350 पन्नों की जांच रिपोर्ट पेश की गई है। मामले में सीई, अधीक्षण यंत्री समेत पांच इंजीनियर दोषी पाया गया है। वहीं तीन इंजीनियरों को जांच में मुक्त किया गया है। बांध के अचानक फूटने से शासन को वित्तीय हानि हुई है।
- कारम बांध फूटने के मामले में जांच रिपोर्ट पेश
- सीई, अधीक्षण यंत्री समेत पांच इंजीनियर दोषी
- 304.44 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन टूटा था
भोपाल: धार जिले के ग्राम कोठीदा में कारम सिंचाई परियोजना के तहत बने कारम बांध फूटने के मामले में 350 पेज की जांच रिपोर्ट पेश की गई है। इसमें सीई, अधीक्षण यंत्री समेत पांच इंजीनियर दोषी पाए गए हैं, इनके विरुद्ध जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा 17 फरवरी को सुनवाई की जाएगी।
वहीं तीन इंजीनियरों को साक्ष्यों के अभाव में क्लीनचिट दे दी है। नई दिल्ली की एएनएस कंसट्रक्शन कंपनी द्वारा 304.44 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन कारम बांध अगस्त 2022 में क्षतिग्रस्त हो गया था। अब इसकी जांच रिपोर्ट साढ़े तीन साल बाद शासन को प्रस्तुत की गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रभारी मुख्य अभियंता नर्मदा ताप्ती कछार सीएस घटोल, पी जोशी तत्कालीन अधीक्षण यंत्री जल संसाधन मंडल धार, बीएल निनामा तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग क्रमांक एक धार, विकार अहमद सिद्दीकी तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन उप संभाग धामनोद और विजय कुमार जत्थाप तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद पर लगे आरोप प्रमाणित पाए गए।
राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद, अशोक कुमार राम तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उपसंभाग धामनोद और दशवंता सिसोदिया तत्कालीन उपयंत्री जल संसाधन उप संभाग धामनोद पर लगे आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए। इसलिए तीन इंजीनियरों को जांच से मुक्त किया गया है।
बांध फूटने से शासन को हुई वित्तीय हानि
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बारिश के दौरान निर्माणाधीन मध्यम श्रेणी के बांध का क्षतिग्रस्त होना कोई सामान्य घटना नहीं है। इसे मात्र अतिवृष्टि से उत्पन्न प्राकृतिक घटना के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। आरोपी इंजीनियरों द्वारा यह तर्क देना कि कोई जनहानि नहीं हुई, उनके कदाचरण को कम नहीं करता है।
रिपोर्ट में कलेक्टर धार के 3 फरवरी 2026 के पत्र का उल्लेख किया गया है जिसमें कारम बांध दुर्घटना में किसानों और प्रभावित व्यक्तियों को हुए नुकसान के बाद 14 लाख 70 हजार 398 रुपये भुगतान सरकार ने किया। एक लाख 94 हजार 419 रुपये खेती की जमीन पर मिट्टी के जमाव के कारण दिए तो 9 लाख 90 हजार 679 रुपये फसल क्षति के रूप में भुगतान किया। ईंट भट्टों को हुए नुकसान पर 2 लाख 30 हजार और मकानों को हुए नुकसान पर 1 लाख 15 हजार 300 रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह शासन को यह वित्तीय हानि हुई है।


304.44 करोड़ की लागत से बना बांध अचानक टूट गया था